अमित शाह ने पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होते ही भारतीय जनता पार्टी का अगला बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया है। पार्टी अब पूरी ताकत के साथ पंजाब पर फोकस करने जा रही है। इसी रणनीति के तहत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब हर महीने पंजाब का दौरा करेंगे और मई से राज्यभर में ड्रग्स के खिलाफ बड़े जन-जागरूकता अभियान की शुरुआत करेंगे।
बीजेपी की यह कवायद सिर्फ नशे के खिलाफ सामाजिक मुहिम नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की सियासत में अपनी जड़ें मजबूत करने और Bhagwant Mann सरकार को घेरने की बड़ी चुनावी रणनीति मानी जा रही है।
मई से शुरू होगा अमित शाह का मासिक पंजाब दौरा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह का ‘मिशन पंजाब’ मई महीने से औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा। शाह के दौरे के साथ ही पूरे पंजाब में बीजेपी की ओर से ड्रग्स विरोधी यात्राएं निकाली जाएंगी।
इन यात्राओं में समय-समय पर केंद्र और राज्य के बड़े बीजेपी नेता शामिल होंगे और गांव-गांव, शहर-शहर जाकर जनता को यह संदेश देंगे कि पंजाब में बढ़ते नशे, सीमा पार से हो रही ड्रग्स तस्करी और युवाओं की बर्बादी को रोकने के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है।
बीजेपी का दावा होगा कि चूंकि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, इसलिए केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने पर ड्रग्स नेटवर्क पर ज्यादा प्रभावी नकेल कसी जा सकती है।
नशे को पंजाब चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनाना चाहती है BJP
बीजेपी की अंदरूनी रणनीति साफ है—वह आने वाले विधानसभा चुनाव तक ड्रग्स को पंजाब का सबसे बड़ा जनभावनात्मक और राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहती है।
पार्टी का मानना है कि नशे की लत ने पंजाब के लाखों परिवारों को बर्बाद किया है। गांवों से लेकर शहरों तक युवाओं की एक बड़ी आबादी इससे प्रभावित है। ऐसे में अगर इस मुद्दे पर सीधे जनता के बीच पहुंचा जाए तो बीजेपी को व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है।
साथ ही पार्टी यह नैरेटिव भी खड़ा करेगी कि आम आदमी पार्टी ने 2022 में ‘नशा मुक्त पंजाब’ का वादा किया था, लेकिन चार साल बाद भी हालात जस के तस हैं।
नशे के बहाने AAP सरकार की घेराबंदी
बीजेपी इस अभियान के जरिए एक साथ दो राजनीतिक लक्ष्य साधना चाहती है—
पहला, पंजाब के गांव-गांव तक अपना संगठनात्मक विस्तार,
दूसरा, Aam Aadmi Party सरकार को ड्रग्स के मुद्दे पर कटघरे में खड़ा करना।
बीजेपी नेताओं की हर सभा, हर यात्रा और हर जनसंवाद में यह सवाल प्रमुखता से उठाया जाएगा कि जब AAP ने सत्ता में आने से पहले नशा खत्म करने का वादा किया था, तो आज भी पंजाब ड्रग्स संकट से क्यों जूझ रहा है?
यानी यह यात्रा सामाजिक जागरूकता से ज्यादा राजनीतिक प्रहार का मंच बनने जा रही है।
अकेले चुनाव लड़कर कमल खिलाने की तैयारी
बीजेपी ने इस बार साफ कर दिया है कि वह पंजाब में अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के सहारे नहीं, बल्कि अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरना चाहती है।
Amit Shah ने मार्च में मोगा की बदलाव रैली से इसकी शुरुआती झलक भी दे दी थी। अब ड्रग्स विरोधी यात्रा के जरिए पार्टी को उम्मीद है कि वह पंजाब के पिंड-पिंड तक पहुंच बनाएगी और खुद को एक मजबूत विकल्प के तौर पर पेश करेगी।
BJP को क्यों दिख रही पंजाब में सियासी संभावना?
बीजेपी का आकलन है कि इस बार पंजाब की राजनीतिक जमीन बदली हुई है—
Aam Aadmi Party सरकार वादों पर घिर रही है,
कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है,
शिरोमणि अकाली दल लगातार कमजोर हुआ है,
और बीजेपी खुद को नए विकल्प के रूप में स्थापित करने का मौका देख रही है।
यही वजह है कि पार्टी पंजाब में अभी से लंबी राजनीतिक लड़ाई की बिसात बिछा रही है।
साफ है BJP का संदेश: ‘नशे’ से निकलेगा 2027 का चुनावी रास्ता
बीजेपी के लिए यह सिर्फ एक जन-जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि पंजाब की सियासत में कमल खिलाने की लंबी तैयारी है। अमित शाह के मासिक दौरे, ड्रग्स विरोधी यात्राएं और AAP पर लगातार हमले इस बात का संकेत हैं कि 2027 आते-आते पंजाब की राजनीति का केंद्र ‘नशा’ बन सकता है।














