पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक Siddh Nath Gupta का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। सिद्धनाथ गुप्ता 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन अब वे अगले छह महीने तक राज्य की कानून-व्यवस्था और चुनावी सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभालते रहेंगे।
गृह मंत्रालय ने इस संबंध में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को औपचारिक पत्र भेजकर आदेश लागू करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया है कि यह फैसला जनहित में लिया गया है और केंद्रीय कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
चुनाव आयोग ने बनाया था नया DGP, अब केंद्र ने दिया एक्सटेंशन
सिद्धनाथ गुप्ता 1992 बैच के IPS अधिकारी हैं। उन्हें इसी साल 16 मार्च को चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के तत्कालीन DGP पीयूष पांडे को हटाकर राज्य का नया DGP नियुक्त किया था। चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद आयोग ने पुलिस और प्रशासन में बड़े फेरबदल किए थे, जिसमें कोलकाता पुलिस कमिश्नर, ADG लॉ एंड ऑर्डर और कई वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला भी शामिल था।
ऐसे में अब मतदान के बीच उनका कार्यकाल बढ़ाया जाना राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बंगाल चुनाव के बीच क्यों अहम है यह फैसला?
राज्य में पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को हो चुकी है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। ऐसे संवेदनशील समय में DGP का रिटायर होना पुलिस नेतृत्व में अचानक बदलाव ला सकता था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसी संभावित प्रशासनिक शून्य को रोकने के लिए सिद्धनाथ गुप्ता को सेवा विस्तार दिया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था की कमान एक ही अधिकारी के हाथ में बनी रहे।
सियासी जानकारों का मानना है कि हिंसा, बूथ कब्जे और चुनावी तनाव के आरोपों से घिरे पश्चिम बंगाल में यह फैसला सीधे तौर पर “फ्री एंड फेयर इलेक्शन” नैरेटिव से जुड़ा हुआ है।
मुख्य सचिव से लेकर DGP तक… चुनाव से पहले बड़े-बड़े तबादले
चुनाव शेड्यूल घोषित होते ही चुनाव आयोग ने बंगाल प्रशासन में ताबड़तोड़ बदलाव किए थे। राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को हटाकर दुष्यंत नारियाला को जिम्मेदारी दी गई। गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा की जगह संघमित्रा घोष को लाया गया। इसके बाद पुलिस विभाग में भी कई बड़े चेहरों को बदला गया।
इसी फेरबदल के तहत सिद्धनाथ गुप्ता को DGP की कमान सौंपी गई थी और अब केंद्र ने उनके कार्यकाल को बढ़ाकर साफ संकेत दिया है कि चुनावी सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
केंद्र के इस फैसले के राजनीतिक मायने
बंगाल चुनाव हमेशा से हिंसा, प्रशासनिक निष्पक्षता और पुलिस की भूमिका को लेकर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रहा है। ऐसे में मतदान के बीच DGP का सेवा विस्तार केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है।
इससे यह साफ है कि केंद्र सरकार चुनाव के अंतिम चरण तक पुलिस नेतृत्व को स्थिर रखना चाहती है, ताकि चुनाव आयोग की निगरानी में सुरक्षा इंतजामों पर कोई असर न पड़े।
अब सबकी नजर दूसरे चरण की वोटिंग पर
पहले चरण में 152 सीटों पर करीब 93 फीसदी मतदान दर्ज किया गया है और चुनाव आयोग ने इसे कुल मिलाकर शांतिपूर्ण बताया है। अब दूसरे चरण की वोटिंग से ठीक पहले DGP का कार्यकाल बढ़ने से बंगाल की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।
विपक्ष इसे केंद्र की रणनीतिक तैयारी मान रहा है, जबकि सत्ताधारी खेमे में भी इस फैसले को लेकर हलचल तेज हो गई है।














