“उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक जुटाएगा वास्तविक वेंडरों का रिकॉर्ड, सरकारी विभागों को सौंपी जाएगी सूची”
नोएडा/गौतम बुद्ध नगर।
नोएडा समेत पूरे उत्तर प्रदेश में रेहड़ी-पटरी लगाकर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने वाले हजारों लोगों के लिए एक बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक आगामी सोमवार, 7 सितंबर 2026 से प्रदेशव्यापी सत्यापन एवं सूचीकरण अभियान शुरू करेगा। संगठन की टीमें रेहड़ी-पटरी संचालकों के व्यापारिक स्थलों पर पहुंचकर उनके व्यवसाय, पहचान और उपलब्ध दस्तावेजों का सत्यापन करेंगी।
संगठन का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि उन लोगों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करना है जो लंबे समय से रेहड़ी-पटरी के माध्यम से अपना रोजगार चला रहे हैं। सत्यापन के बाद तैयार सूची को संबंधित सरकारी विभागों, स्थानीय प्रशासन और आवश्यकता के अनुसार अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा, ताकि वास्तविक रेहड़ी-पटरी संचालकों का रिकॉर्ड प्रशासन के पास उपलब्ध हो सके और उन्हें कानून के मुताबिक उनके अधिकार दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
7 सितंबर से मैदान में उतरेगी संगठन की टीम
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम किशोर गुप्ता के अनुसार, 7 सितंबर से शुरू होने वाले अभियान के तहत संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सीधे रेहड़ी-पटरी संचालकों के पास उनके व्यापारिक स्थलों पर पहुंचेंगे।
इस दौरान संचालकों से आवश्यक जानकारी और उपलब्ध दस्तावेज लिए जाएंगे तथा उनका सत्यापन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि लंबे समय से सड़क किनारे, बाजारों और विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर अपना कारोबार करने वाले अनेक छोटे कारोबारी सरकारी व्यवस्था में स्पष्ट पहचान के अभाव में असमंजस की स्थिति में रहते हैं।
संगठन की कोशिश है कि ऐसे वास्तविक कारोबारियों की एक व्यवस्थित सूची तैयार हो, जिसे भविष्य में संबंधित विभागों के साथ साझा किया जा सके।
“जब दुकान लगाने की अनुमति है, तो बिक्री प्रमाण पत्र क्यों नहीं?”
अभियान को लेकर संगठन ने सबसे बड़ा सवाल रेहड़ी-पटरी संचालकों के व्यवसायिक अधिकार और पहचान को लेकर उठाया है।
संगठन का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति वर्षों से रेहड़ी-पटरी लगाकर अपना रोजगार चला रहा है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका व्यवसाय स्वीकार्य है, तो उसके लिए पहचान और वैधानिक दस्तावेज की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक का कहना है कि रेहड़ी-पटरी संचालक किसी शहर पर बोझ नहीं, बल्कि उसकी स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सुबह से देर शाम तक सड़क किनारे फल, सब्जी, भोजन, कपड़े, घरेलू सामान और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं बेचने वाले हजारों छोटे कारोबारी आम जनता को सस्ती और आसानी से उपलब्ध सेवाएं प्रदान करते हैं।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे कारोबारी अपनी स्थिति को लेकर अनिश्चितता में रहते हैं।
सर्वे से लेकर प्रमाण पत्र तक की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की मांग
संगठन की प्रमुख मांग है कि जो रेहड़ी-पटरी संचालक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार व्यवसाय करते पाए जाएं, उनके लिए वेंडिंग/बिक्री प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
संगठन के मुताबिक प्रमाण पत्र मिलने से न केवल वास्तविक कारोबारियों की पहचान सुनिश्चित होगी, बल्कि उनके सामने बार-बार उत्पन्न होने वाली कार्रवाई, हटाए जाने और रोजगार प्रभावित होने जैसी समस्याओं को भी व्यवस्थित तरीके से देखा जा सकेगा।
संगठन का कहना है कि सत्यापन अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि किसी भी नीति या व्यवस्था का आधार वास्तविक और प्रमाणित आंकड़े होने चाहिए।
सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने रखी जाएगी सूची
सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद संगठन द्वारा तैयार की गई सूची को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न स्तरों पर संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इसमें भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, नोएडा प्राधिकरण, नगर निगम, नगर पालिका, स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित पुलिस थाना और चौकी शामिल हो सकते हैं।
संगठन का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी सरकारी व्यवस्था के समानांतर व्यवस्था खड़ी करना नहीं, बल्कि वास्तविक रेहड़ी-पटरी संचालकों की पहचान और उनके व्यवसाय से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित रूप से सामने लाना है।
इससे प्रशासन के पास यह स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा कि कौन व्यक्ति वास्तव में रेहड़ी-पटरी के माध्यम से अपना रोजगार चला रहा है और किन लोगों को नियमानुसार व्यवस्थित किया जाना आवश्यक है।
श्याम किशोर गुप्ता बोले— नेतृत्व के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम किशोर गुप्ता ने अभियान को संगठन की जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि केवल नेतृत्व करना पर्याप्त नहीं है। जिन लोगों का संगठन नेतृत्व करता है, उन्हें व्यवस्थित करना और उनके अधिकारों की आवाज उठाना भी संगठन का दायित्व है।
उन्होंने कहा—
“जो काम किसी ने नहीं किया, वह राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक करने जा रहा है। हमारा दायित्व केवल नेतृत्व करना नहीं, बल्कि जिन लोगों का हम नेतृत्व करते हैं, उन्हें व्यवस्थित करना और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाना भी है।”
संगठन के अनुसार यह अभियान किसी एक शहर या जिले तक सीमित नहीं रहेगा। इसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में वास्तविक रेहड़ी-पटरी संचालकों तक पहुंच बनाना है।
सिर्फ पहचान नहीं, सम्मान और सुरक्षित रोजगार की मांग
रेहड़ी-पटरी संचालकों का मुद्दा केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। यह शहरों की अर्थव्यवस्था, छोटे कारोबार और स्वरोजगार से भी जुड़ा हुआ है।
संगठन का कहना है कि हजारों परिवारों की आजीविका इन छोटे कारोबारों पर निर्भर है। ऐसे में रेहड़ी-पटरी संचालकों को केवल अतिक्रमण या कार्रवाई के नजरिए से देखने के बजाय उन्हें कानून के तहत व्यवस्थित करने की आवश्यकता है।
संगठन चाहता है कि वास्तविक संचालकों की पहचान होने के बाद उनके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें वे नियमों का पालन करते हुए सम्मान के साथ अपना व्यवसाय कर सकें।
सत्यापन में सहयोग की अपील
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक ने सभी रेहड़ी-पटरी संचालकों से अपील की है कि जब संगठन की टीम उनके व्यापारिक स्थल पर पहुंचे तो वे सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें।
संगठन ने संचालकों से सही जानकारी उपलब्ध कराने और उनके पास मौजूद आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अपील की है, ताकि तैयार होने वाली सूची अधिक से अधिक वास्तविक और विश्वसनीय हो।
संगठन का कहना है कि यदि आंकड़े सही होंगे तो संबंधित विभागों के सामने वास्तविक स्थिति को प्रभावी ढंग से रखा जा सकेगा और भविष्य में रेहड़ी-पटरी संचालकों से जुड़े मामलों पर नीति बनाने में भी मदद मिल सकती है।
“रेहड़ी-पटरी संचालक सिर्फ वोटर नहीं, शहर की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं”
अभियान के जरिए संगठन ने सरकार और प्रशासन के सामने एक व्यापक संदेश रखने की कोशिश की है। संगठन का कहना है कि रेहड़ी-पटरी संचालकों को केवल चुनावी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
वे शहर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाली अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। उनकी मेहनत से हजारों परिवारों का घर चलता है और लाखों लोगों को रोजमर्रा की वस्तुएं सुलभ कीमत पर मिलती हैं।
राष्ट्रीय संगठन रेहड़ी पटरी संचालक का स्पष्ट संदेश है—
“रेहड़ी-पटरी संचालक सिर्फ वोटर नहीं, शहर की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें पहचान चाहिए, सम्मान चाहिए और कानून के अनुसार अपना व्यवसाय करने का अधिकार चाहिए।”
अब देखना होगा सत्यापन के बाद क्या बदलेगा
7 सितंबर से शुरू होने जा रहा यह अभियान रेहड़ी-पटरी संचालकों के लिए कितना प्रभावी साबित होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल संगठन ने वास्तविक कारोबारियों को एक मंच पर लाने और उनका व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने की घोषणा की है।
यदि सत्यापन के बाद तैयार सूची को संबंधित विभागों द्वारा गंभीरता से लिया जाता है और पात्र संचालकों के लिए वेंडिंग/बिक्री प्रमाण पत्र सहित वैधानिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ती हैं, तो इससे हजारों छोटे कारोबारियों को अपने रोजगार को लेकर अधिक स्पष्टता और स्थायित्व मिल सकता है।
फिलहाल 7 सितंबर से शुरू होने वाला अभियान नोएडा समेत उत्तर प्रदेश के रेहड़ी-पटरी संचालकों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार संगठन स्तर पर व्यापक तरीके से वास्तविक कारोबारियों की पहचान, सत्यापन और सूचीकरण की पहल की जा रही है।
अब असली सवाल यही है—क्या सत्यापन के बाद रेहड़ी-पटरी संचालकों को केवल आंकड़ों में जगह मिलेगी, या उन्हें वास्तव में पहचान, प्रमाण पत्र और सम्मान के साथ कारोबार करने का अधिकार भी मिलेगा?














