“भारत दौरे पर बार्ट डी वेवर ने खुले बाजार और नियम आधारित वैश्विक व्यापार की पैरवी की, पीएम मोदी को बताया ‘बुद्धिमान और प्रेरणादायक नेता’; भारत-ईयू FTA को कहा ‘मदर ऑफ ऑल डील्स”
मुंबई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ और व्यापार नीतियों को लेकर दुनिया के कई देशों में जारी बहस के बीच बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने बिना नाम लिए उन पर तीखा तंज कसा है। भारत दौरे के दौरान मुंबई में आयोजित भारत-बेल्जियम उच्चस्तरीय संवाद में डी वेवर ने कहा कि दुनिया में कुछ देश व्यापार और टैरिफ को लेकर पूरी तरह मनमाने ढंग से फैसले ले रहे हैं। वे सोमवार को कोई निर्णय लेते हैं, बुधवार को उसे वापस ले लेते हैं और शनिवार को फिर वही फैसला लागू कर देते हैं।
हालांकि बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को ट्रंप की बदलती व्यापार नीतियों पर कटाक्ष के तौर पर देखा गया। डी वेवर ने कहा कि मौजूदा दौर में संरक्षणवाद बढ़ रहा है और कई देश बाजारों को बंद करने तथा आयात पर शुल्क लगाने की नीति को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने इसके बजाय नियम आधारित खुले व्यापार और मजबूत आर्थिक साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया।
‘मैं नाम नहीं लूंगा, लेकिन आप जानते हैं किसकी बात हो रही है’
मुंबई में शुक्रवार, 4 सितंबर को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (India-EU FTA) पर आयोजित कार्यक्रम में भारतीय और बेल्जियम के कारोबारी प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए डी वेवर ने कहा कि दुनिया में आज आर्थिक नीतियों को लेकर काफी अनिश्चितता है।
उन्होंने कहा कि कई लोग प्रतिबंध लगाने, बाजारों को बंद करने और शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक, समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब ऐसे फैसले किसी स्पष्ट आर्थिक तर्क के बजाय मनमाने तरीके से लिए जाते हैं।
डी वेवर ने अपने अंदाज में कहा, ‘मैं नाम नहीं लूंगा, लेकिन आप उन लोगों को जानते हैं जो बिना किसी आर्थिक तर्क के मनमाने ढंग से ऐसा करते हैं।’
उन्होंने आगे कहा कि कुछ देश सोमवार को कोई फैसला लेते हैं, बुधवार को उसे रद्द कर देते हैं और शनिवार को फिर से लागू कर देते हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
तालियों के बीच बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘आपकी तालियां बता रही हैं कि आपको पता है कि मैं किसके बारे में बात कर रहा हूं।’ उनके इस अंदाज पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच माहौल हल्का हो गया।
संरक्षणवाद के खिलाफ खुली अर्थव्यवस्था की वकालत
बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैश्विक व्यापार में बढ़ते संरक्षणवाद को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई है और ऐसे समय में बाजारों को बंद करना तथा लगातार नए टैरिफ लगाना किसी भी देश के दीर्घकालिक हित में नहीं है।
उन्होंने नियम आधारित व्यापार व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देशों के बीच आर्थिक रिश्ते स्थिर, भरोसेमंद और पारदर्शी होने चाहिए। कारोबारियों और निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि उन्हें पता हो कि किसी देश की व्यापार नीति अगले दिन बदल नहीं जाएगी।
डी वेवर ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी व्यापारिक प्रतिबंधों को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। कुछ परिस्थितियों में देश अपनी रणनीतिक या आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नीतिगत कदम उठा सकते हैं, लेकिन जानबूझकर और बिना स्पष्ट आर्थिक आधार के बाजार को विकृत करना अलग विषय है।
पीएम मोदी की जमकर तारीफ, बोले—‘वे बुद्धिमान नेता हैं’
टैरिफ नीति पर तंज के बीच बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। डी वेवर ने पीएम मोदी को दुनिया के सबसे प्रेरणादायक नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि उनसे मिलना उनके लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता, तनाव और चुनौतियों से गुजर रही है। कई विश्व नेताओं के बयानों में डर, बेचैनी और खतरे की भावना दिखाई देती है।
इसके विपरीत पीएम मोदी की नेतृत्व शैली की तारीफ करते हुए डी वेवर ने कहा कि जब प्रधानमंत्री मोदी बोलते हैं तो लोगों को लगता है कि उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने मोदी को ‘एक बुद्धिमान नेता’ बताया।
बेल्जियम के प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत-बेल्जियम संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स समेत कई क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
भारत-ईयू FTA को बताया ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
डी वेवर ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए इसे दुनिया के सबसे व्यापक व्यापार समझौतों में से एक करार दिया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता करीब दो अरब उपभोक्ताओं वाले बाजार को जोड़ने की क्षमता रखता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से को प्रभावित करेगा। उन्होंने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ यानी बेहद व्यापक और ऐतिहासिक समझौते की संज्ञा दी।
उनके मुताबिक, भारत और यूरोप के बीच यह समझौता केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार को बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे दोनों पक्षों के बीच विश्वास और आर्थिक साझेदारी भी मजबूत होगी।
डी वेवर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में भारत और यूरोप के बीच मजबूत आर्थिक संबंध दोनों पक्षों को बाहरी दबावों और वैश्विक व्यवधानों से निपटने में मदद कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत और यूरोप मिलकर अधिक मजबूत, खुले और आत्मविश्वास से भरे आर्थिक साझेदार बन सकते हैं।
बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स पर भी जोर
मुंबई में आयोजित कार्यक्रम का एक प्रमुख केंद्र भारत-बेल्जियम के बीच बंदरगाह, समुद्री संपर्क और लॉजिस्टिक्स सहयोग रहा। डी वेवर ने वैश्विक व्यापार में बेल्जियम के बंदरगाहों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके देश के बंदरगाह स्वतंत्र और निष्पक्ष व्यापार की बुनियाद हैं।
भारत के लिए यूरोप तक बेहतर समुद्री संपर्क और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क व्यापार विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग को भारत-यूरोप व्यापार संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मौजूद रहे। बैठक में बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स, समुद्री संपर्क और व्यापार के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।
पांच साल में दोगुना होगा भारत-बेल्जियम व्यापार
डी वेवर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को लेकर भी बड़ा लक्ष्य तय किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री की मुलाकात के दौरान अगले पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया।
यह लक्ष्य ऐसे समय में तय किया गया है जब भारत यूरोप के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की कोशिश कर रहा है। बेल्जियम यूरोप के महत्वपूर्ण व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में शामिल है, जबकि भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार के रूप में वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने से उद्योग, लॉजिस्टिक्स, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
रक्षा सहयोग को भी मिली नई गति
भारत और बेल्जियम के बीच केवल व्यापारिक संबंध ही नहीं, बल्कि रक्षा सहयोग को भी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को लेकर एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए।
इसके अलावा बेल्जियन सिक्योरिटी एंड डिफेंस इंडस्ट्री एसोसिएशन और सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के बीच एक समझौता ज्ञापन भी हुआ। इसका उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाना और बेल्जियम की तकनीक, विशेषज्ञता तथा बाजार तक भारतीय रक्षा क्षेत्र की पहुंच को आसान बनाना है।
भारत अब रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी पर भी जोर दे रहा है। ऐसे में बेल्जियम के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
व्यापार से आगे बढ़ती भारत-बेल्जियम साझेदारी
बार्ट डी वेवर का भारत दौरा ऐसे समय हुआ है जब वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। अमेरिका की टैरिफ नीति, बढ़ता संरक्षणवाद और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों ने दुनिया के देशों को नए आर्थिक साझेदार तलाशने के लिए प्रेरित किया है।
ऐसे माहौल में भारत और यूरोप के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी की जरूरत और बढ़ गई है। बेल्जियम के प्रधानमंत्री का भारत में खुले बाजार और नियम आधारित व्यापार की वकालत करना इसी व्यापक आर्थिक बदलाव की ओर संकेत करता है।
भारत और बेल्जियम अब व्यापार के साथ-साथ रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक, समुद्री संपर्क और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ और भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को लेकर डी वेवर का उत्साह इस बात का संकेत है कि यूरोप में भारत को एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के तौर पर देखा जा रहा है।
दुनिया जहां टैरिफ और संरक्षणवाद की नई चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं भारत और यूरोप खुले बाजार, स्थिर व्यापार नीतियों और मजबूत आर्थिक साझेदारी के जरिए एक नया रास्ता तलाशने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बेल्जियम के प्रधानमंत्री का संदेश साफ है—वैश्विक अर्थव्यवस्था को मनमाने फैसलों से नहीं, बल्कि भरोसे, स्थिरता और नियम आधारित व्यापार से मजबूती मिल सकती है।














