पांच मामलों में आजीवन कारावास, पॉक्सो के मामलों में 10 और 20 वर्ष की सजा, सम्मन-वारंट तामिला बढ़ाने के निर्देश
गाजीपुर। राइफल क्लब में शनिवार को मुख्य राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में अभियोजन की जनपद स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सितंबर 2026 में न्यायालयों में निस्तारित मुकदमों, अभियुक्तों को मिली सजा, सम्मन-वारंट की तामिला और गवाहों की उपस्थिति की समीक्षा की गई।
समीक्षा में पाया गया कि भारतीय दंड संहिता के तहत कुल 64 मुकदमों का निस्तारण हुआ। इनमें 23 मामलों में सजा, 16 में सुलह और 25 मामले कमिट के आधार पर निस्तारित हुए। अन्य अधिनियमों के तहत सात मुकदमों का निस्तारण हुआ और सभी सात मामलों में सजा हुई।
बैठक में बताया गया कि अधीनस्थ न्यायालयों में 410 सम्मन-वारंट जारी हुए, जिनमें 356 की तामिला हुई। उपस्थित 271 गवाहों में से 266 की गवाही दर्ज हुई। वहीं सत्र न्यायालयों में जारी 554 सम्मन में 426 की तामिला हुई। यहां 315 गवाह उपस्थित हुए, जिनमें 300 की गवाही दर्ज की गई। शेष गवाहों की गवाही पीठासीन अधिकारियों के अवकाश और अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण नहीं हो सकी।
सितंबर में थाना जमानियां के श्रीराम को आठ वर्ष, नगसर हाल्ट के लाल बहादुर को हत्या के मामले में आजीवन कारावास, भुड़कुड़ा के धर्मेंद्र राजभर को आजीवन कारावास तथा गहमर के कृष्णा दूबे को पॉक्सो मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। सैदपुर के रोहित यादव को 20 वर्ष और नोनहरा के संजीव राय उर्फ अन्नू को 10 वर्ष का कठोर कारावास मिला। जीआरपी के अमरजीत बिंद को एनडीपीएस मामले में एक वर्ष की सजा सुनाई गई।
मुख्य राजस्व अधिकारी ने गवाहों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए सम्मन-वारंट की तामिला बढ़ाने का निर्देश दिया। उन्होंने अभियोजकों को रिहा हुए अभियुक्तों के मामलों की पुनः समीक्षा कर सरकारी हित में अपील प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा पक्षद्रोही गवाहों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने प्रत्येक अभियोजक को प्रतिमाह कम से कम एक मुकदमे की केस डायरी तैयार कर विवेचना में पुलिस की कमियों को चिह्नित करने का निर्देश भी दिया, ताकि अभियोजन की गुणवत्ता में सुधार कर अधिकाधिक मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित की जा सके।















