गाजीपुर। कासिमाबाद क्षेत्र के सूकहां स्थित कौशिक भवन पर रविवार को मशहूर सूफी संत कौशिक बाबा की 11वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने समाधि स्थल पर मत्था टेककर चादरपोशी की और मन्नतें मांगी। इस दौरान कव्वाली का भी आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालु देर तक मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पूजा-पाठ और चादरपोशी से हुई। इसके बाद आयोजित भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं का मानना है कि कौशिक बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं।
कौशिक बाबा के प्रिय शिष्य हृदय नारायण तिवारी ने बताया कि कौशिक बाबा का मूल नाम कुंवर महेंद्र प्रताप चंद्र कौशिक था। वर्ष 1970 में वह गोरखपुर के इलाहीबाद में बेनजीर शाह कादरी के शिष्य बने। गुरु ने उनका नाम प्रेमनाथ कादरी उर्फ कौशिक बाबा रखा। वर्ष 1980 के आसपास उन्होंने कासिमाबाद क्षेत्र के सूकहां में शिष्यों के बीच अपने गुरु के बताए ज्ञान की चर्चा शुरू की और बाद में कौशिक भवन की स्थापना की।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में बेनजीर शाह कादरी ने उन्हें अपना 43वां गद्दीनशीन बनाया था। बाबा ने समाज को हिंदू-मुस्लिम एकता और इंसानियत का संदेश दिया।
इस मौके पर अरविंद सिंह, मधुसूदन दुबे, आरके तोमर, प्रेम सिंह, योगेश सिंह, जसपाल सिंह, क्रिनांशु दास समेत सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। अंत में अरुण कौशिक और प्रकाश कौशिक ने सभी का आभार जताया।















