“17.82 करोड़ रुपये का होटल कुर्क, 175 करोड़ के लेनदेन की जांच; पूर्वोत्तर से दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक फैले कथित ड्रग्स-मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर शिकंजा”
नई दिल्ली/आइजोल। म्यांमार से भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे होने वाली कमाई को हवाला के जरिए ठिकाने लगाने के कथित नेटवर्क पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा प्रहार किया है। एजेंसी की आइजोल और इंफाल टीमों ने 23 अक्टूबर को मिजोरम और मणिपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी कर छह लोगों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान ड्रग्स तस्करी और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया, जबकि मिजोरम के चम्फाई में स्थित पांच मंजिला होटल और उससे जुड़ी जमीन को कुर्क किया गया। इस संपत्ति का मूल्य 17.82 करोड़ रुपये बताया गया है।
ईडी के मुताबिक, पहले फ्रीज किए गए 8.19 करोड़ रुपये के बैंक खातों में इस कार्रवाई के तहत सुरक्षित की गई संपत्तियों को जोड़ने पर अब तक 26 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर कार्रवाई की जा चुकी है। जांच का दायरा केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं है। एजेंसी उन बैंक खातों, मनी ट्रांसफर केंद्रों, संदिग्ध कंपनियों और हवाला ऑपरेटरों की भूमिका भी खंगाल रही है, जिनके जरिए कथित तौर पर ड्रग्स की कमाई को कई स्तरों पर घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों को छिपाने की कोशिश की गई।
इस मामले के सामने आए वित्तीय आंकड़े जांच की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। मणिपुर के चुराचांदपुर स्थित एक मिनी एटीएम और मनी ट्रांसफर सेंटर के जरिए 2024 से जून 2026 के बीच करीब 175.03 करोड़ रुपये के लेनदेन का पता चला है। ईडी को संदेह है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल ड्रग्स से जुड़े धन को अलग-अलग खातों में पहुंचाने के लिए किया गया। हालांकि, इन लेनदेन की पूरी प्रकृति, प्रत्येक खाताधारक की भूमिका और धन के अंतिम उपयोग का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
पूर्वोत्तर बना कथित तस्करी मार्ग, सीमापार तक पहुंची पैसों की कड़ी
ईडी की जांच के अनुसार, म्यांमार से हेरोइन, ब्राउन शुगर और मेथामफेटामाइन की गोलियों की कथित तस्करी भारत में की जाती थी। मिजोरम के जोखावथार सीमा क्षेत्र से नशीले पदार्थों को भारत लाने और फिर चम्फाई तथा आइजोल के रास्ते असम, त्रिपुरा और अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, तस्करी की खेपों को किन रास्तों से आगे भेजा जाता था और उससे अर्जित रकम किन माध्यमों से वापस सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचती थी।
जांच में सामने आए प्रारंभिक विवरण के मुताबिक, मणिपुर, मिजोरम, असम और त्रिपुरा में नशीले पदार्थों की बिक्री से प्राप्त रकम विभिन्न बैंक खातों और मनी ट्रांसफर केंद्रों के जरिए जमा कराई जाती थी। इसके बाद पैसा अलग-अलग खातों में स्थानांतरित होता था और कथित तौर पर हवाला के माध्यम से म्यांमार में मौजूद सप्लायरों तक भुगतान पहुंचाया जाता था।
ईडी का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ लोगों ने कमीशन लेकर अपने बैंक खाते दूसरे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए दिए। ऐसे खातों में रकम जमा होने के बाद उसे कुछ ही दिनों में अन्य खातों में भेज दिया जाता था। इस तरह लेनदेन की कई परतें तैयार होती थीं, जिससे धन के वास्तविक स्रोत का पता लगाना कठिन हो सकता था। एजेंसी अब यह जांच रही है कि खाताधारकों को लेनदेन की वास्तविक प्रकृति की जानकारी थी या नहीं और इस व्यवस्था को संचालित करने में किन लोगों की प्रमुख भूमिका थी।
मिनी एटीएम सेंटर से 175 करोड़ रुपये का लेनदेन
जांच के केंद्र में चुराचांदपुर स्थित ‘गो अल्फा ट्रिप’ नाम का मिनी एटीएम और मनी ट्रांसफर सेंटर भी है, जिसे एच. गौजालाल संचालित करता था। ईडी के मुताबिक, ड्रग्स नेटवर्क से कथित तौर पर जुड़ी जेनंगाइह्नियांग उर्फ तानियांग इस केंद्र पर प्रतिदिन एक करोड़ रुपये तक जमा कराती थी। उसके पास उन बैंक खातों की सूची भी होती थी, जिनमें रकम भेजी जानी थी।
एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2024 से जून 2026 के बीच इस केंद्र से 2,947 लेनदेन हुए, जिनके जरिए लगभग 175.03 करोड़ रुपये अलग-अलग कारोबारियों, दवा दुकानों और व्यक्तियों के खातों में भेजे गए। ईडी को संदेह है कि विभिन्न खातों के माध्यम से रकम को कई बार स्थानांतरित करने का उद्देश्य उसके मूल स्रोत को छिपाना हो सकता था।
जांच में शामिल सात बैंक खातों में करीब 11.98 करोड़ रुपये जमा होने की बात सामने आई है, जबकि उनमें से केवल 17 लाख रुपये नकद निकाले गए। एजेंसी इस पैटर्न को महत्वपूर्ण मानते हुए जांच कर रही है कि क्या इन खातों का इस्तेमाल मुख्य रूप से धन को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया गया था।
ईडी के अनुसार, कुछ खाताधारकों को अपने खाते इस्तेमाल करने देने के बदले प्रत्येक एक लाख रुपये पर 500 रुपये तक कमीशन मिलता था। हवाला लेनदेन में कथित तौर पर प्रति लाख रुपये 250 से 500 रुपये तक कमीशन दिए जाने की भी जांच की जा रही है। इन भुगतानों के पीछे मौजूद लोगों और कथित नेटवर्क के वित्तीय संचालकों की पहचान करना जांच का अहम हिस्सा है।
32 टन से अधिक रसायनों की सप्लाई भी जांच के घेरे में
जांच का एक और गंभीर पहलू कथित तौर पर नशीले पदार्थों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की आपूर्ति से जुड़ा है। ईडी के मुताबिक, मिजोरम की कंपनी एम/एस कृषिव एंटरप्राइजेज ने मार्च से नवंबर 2024 के बीच 15 खेपों में लगभग 32 टन कैफीन एनहाइड्रस भेजा। इसके अतिरिक्त करीब 10 टन एल्युमिनियम क्लोराइड एनहाइड्रस की आपूर्ति का भी उल्लेख किया गया है।
ये रसायन आइजोल और सीमावर्ती इलाकों में स्थित कुछ छोटी दवा दुकानों तथा एक जनरल स्टोर को भेजे गए थे। एजेंसी को संदेह है कि इनके जरिए रसायनों को म्यांमार पहुंचाया गया होगा, जहां उनका इस्तेमाल मेथामफेटामाइन की गोलियां बनाने में किया जा सकता था। इस संबंध में आपूर्ति की वास्तविक मंजिल, रसायनों के अंतिम उपयोग और संबंधित कारोबारी इकाइयों की जानकारी की जांच की जा रही है।
रसायनों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति अपने आप में किसी अपराध का अंतिम प्रमाण नहीं है। जांच में यह स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित रसायन कहां पहुंचे, उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और आपूर्तिकर्ताओं को किसी अवैध गतिविधि की जानकारी थी या नहीं।
दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक पहुंची वित्तीय जांच
ईडी के मुताबिक, कथित हवाला नेटवर्क की वित्तीय कड़ियां पूर्वोत्तर तक सीमित नहीं थीं। जांच में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, गुवाहाटी और सिलचर से जुड़े कुछ लेनदेन भी सामने आए हैं।
एजेंसी के अनुसार, कोलकाता की कुछ संदिग्ध कंपनियों से हवाला ऑपरेटर लालरिंकिमा के बैंक खातों में करीब 2.14 करोड़ रुपये आए। वहीं, हावड़ा की एक कंपनी से तानियांग के खाते में 10 लाख रुपये भेजे गए। इ















