गाजीपुर। बिरनो क्षेत्र के भड़सर गांव में शुक्रवार की रात अति प्राचीन रामलीला समिति की ओर से आयोजित ऐतिहासिक रामलीला में सीता हरण, शबरी के आश्रम में भगवान राम-लक्ष्मण के पहुंचने और हनुमान-सुग्रीव मिलन के प्रसंगों का मंचन किया गया। शबरी के जूठे बेर भगवान श्रीराम द्वारा प्रेमपूर्वक स्वीकार करने का दृश्य देखकर दर्शक भावविभोर हो उठे। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
समिति की ओर से आयोजित रामलीला इस वर्ष अपने 62वें आयोजन वर्ष में पहुंच गई है। वर्ष 1952 से लगातार रामलीला का मंचन होता आ रहा है। इस ऐतिहासिक परंपरा को बनाए रखने में ग्रामीणों और स्थानीय कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रामलीला स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।
शबरी के आश्रम में भगवान राम और लक्ष्मण के पहुंचने का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। शबरी की निश्छल भक्ति और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान श्रीराम ने उनके जूठे बेर स्वीकार किए। इस प्रसंग के माध्यम से कलाकारों ने समाज को समानता, प्रेम और सद्भाव का संदेश दिया। मंचन में दर्शाया गया कि सच्ची भक्ति में जाति और ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जंगीपुर विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा कि रामलीला भगवान श्रीराम और उनके भाई भरत के अटूट प्रेम, माता सीता के त्याग तथा माता-पिता के आदेशों का पालन करने की प्रेरणा देती है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, आदर्श और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है। उनके आदर्शों को अपनाना प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का मूल मंत्र होना चाहिए। उन्होंने गांव के कलाकारों की सहभागिता की सराहना की।
इस मौके पर रामलीला अध्यक्ष प्रदीप सिंह ने आगंतुकों का माल्यार्पण कर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम में चंचल सिंह तुर्कवलिया, कैलाश यादव, ग्राम प्रधान विनोद गुप्ता, उपेंद्र सिंह, सुरेश सिंह, कमला पाल, वीरेंद्र सिंह, अरविंद पटेल, कृष्णानंद यादव, विनोद खरवार, पुनपुन सिंह, श्यामसुंदर राजभर, अनिल पटेल, इद्रीश खान, कृष्णा राजभर, रिक्की पाल, मुकेश राजभर, विपिन चौरसिया सहित अन्य लोग मौजूद रहे।















