“सालों से शिकायतों के बावजूद नहीं मिला स्थायी समाधान, सेक्टर-130 के आरडब्ल्यूए उपाध्यक्ष अशोक चौहान ने प्राधिकरण की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल”
नोएडा: नोएडा को देश के आधुनिक और सुनियोजित शहरों में शामिल किया जाता है, लेकिन शहर के कई सेक्टरों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति इस दावे पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। सेक्टर-130 के निवासियों का आरोप है कि यहां टूटी आंतरिक सड़कें, क्षतिग्रस्त लोहे के जाल, जगह-जगह उफनते सीवर और उनसे निकलती दुर्गंध लोगों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से बनी हुई है और बार-बार शिकायत करने के बावजूद इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया।
सेक्टर-130 आरडब्ल्यूए के उपाध्यक्ष अशोक चौहान ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सेक्टर के करीब पांच प्रतिशत भूखंडों की आंतरिक सड़कों की हालत खराब है। कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं और लोहे के जाल टूटे हुए हैं। इसके साथ ही सीवर ओवरफ्लो होने के कारण सड़क और आसपास के हिस्सों में गंदा पानी तथा दुर्गंध फैल रही है। उनका कहना है कि स्थिति ऐसी हो गई है कि कई जगहों से होकर गुजरना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है।
‘सालों से शिकायत, फिर भी स्थायी समाधान नहीं’
अशोक चौहान के मुताबिक सेक्टर की समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। खास तौर पर सीवर लाइन की सफाई को लेकर लंबे समय से आश्वासन दिए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवर व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधा में लगातार परेशानी बनी रहना गंभीर चिंता का विषय है। बरसात के दौरान स्थिति और भी खराब होने की आशंका रहती है। सीवर ओवरफ्लो के कारण गंदा पानी सड़क पर आने से आवागमन प्रभावित होता है और आसपास के वातावरण में दुर्गंध फैलती है।

टूटी सड़कें और खुले जाल बने परेशानी
सेक्टर की समस्या केवल सीवर तक सीमित नहीं है। आरडब्ल्यूए पदाधिकारी के अनुसार कई आंतरिक सड़कों की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई है। जगह-जगह सड़कें टूटने और लोहे के जाल क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
टूटे हुए जाल और खराब सड़कें पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इनकी मरम्मत नहीं की गई तो छोटी समस्या आगे चलकर बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
‘एसी कमरों में बैठकर नहीं होता समस्याओं का समाधान’
अशोक चौहान ने अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि केवल कार्यालयों में बैठकर कागजी कार्रवाई करने से जमीनी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए और उसके बाद संबंधित विभागों को जिम्मेदारी तय करके काम पूरा कराना चाहिए।
उनका कहना है कि यदि अधिकारी नियमित रूप से सेक्टर का निरीक्षण करें तो उन्हें सड़क, सीवर, सफाई और क्षतिग्रस्त जाल जैसी समस्याओं की वास्तविक स्थिति का पता चल सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फील्ड निरीक्षण के अभाव में कई शिकायतें कागजों और ऑनलाइन शिकायत प्रणालियों तक सीमित रह जाती हैं।
‘कभी मशीन नहीं, कभी कर्मचारी नहीं’
आरडब्ल्यूए उपाध्यक्ष ने सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब सीवर या नाले की सफाई की जरूरत होती है तो कभी मशीन उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आती है तो कभी कर्मचारियों की कमी बताई जाती है। इससे समस्या लगातार बनी रहती है।
स्थानीय निवासियों का सवाल है कि यदि प्राधिकरण के पास सफाई और रखरखाव के लिए व्यवस्था है तो उसका उपयोग समय पर क्यों नहीं किया जा रहा। आखिर सीवर लाइन की नियमित सफाई और सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग की है और इसके लिए तय व्यवस्था का पालन क्यों नहीं हो रहा?
टेंडर व्यवस्था पर भी उठे सवाल
अशोक चौहान ने सीवर सफाई के टेंडर को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सफाई कार्य के लिए टेंडर कब जारी होता है, कब समाप्त होता है और उसके बाद व्यवस्था किस प्रकार चलती है, इसकी जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारी ही दे सकते हैं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि प्राधिकरण को इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता रखनी चाहिए। यदि किसी कार्य के लिए टेंडर जारी किया गया है तो उसका कार्यक्षेत्र, अवधि और प्रगति सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोगों को यह जानकारी मिल सके कि उनकी समस्या के समाधान के लिए वास्तव में क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

‘अब शिकायतों का जवाब भी नहीं मिलता’
सेक्टरवासियों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि शिकायत करने के बाद उन्हें अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिलती। अशोक चौहान के अनुसार पहले शिकायत करने के बाद कम से कम जवाब मिलने की उम्मीद रहती थी, लेकिन अब कई मामलों में शिकायतों का जवाब तक नहीं मिलता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी नागरिक व्यवस्था में शिकायत का समाधान न हो पाना एक समस्या है, लेकिन शिकायत का जवाब तक न मिलना उससे भी बड़ी निराशा पैदा करता है। नागरिकों को कम से कम यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उनकी शिकायत किस अधिकारी या विभाग के पास है और उसके समाधान के लिए कब तक कार्रवाई की जाएगी।
बीमारियों के खतरे को लेकर बढ़ी चिंता
उफनते सीवर और लंबे समय तक जमा गंदे पानी को लेकर स्थानीय निवासियों में स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी बढ़ रही है। गंदगी और दुर्गंध के कारण वातावरण प्रभावित होने की शिकायत की जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि सीवर ओवरफ्लो की समस्या लगातार बनी रही तो मच्छरों और अन्य संक्रमण फैलाने वाले माध्यमों की समस्या भी बढ़ सकती है।
निवासियों की मांग है कि प्राधिकरण केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय नियमित निरीक्षण और प्रिवेंटिव मेंटेनेंस की व्यवस्था मजबूत करे। सीवर लाइन की समय-समय पर सफाई हो, क्षतिग्रस्त जाल तत्काल बदले जाएं और टूटी सड़कों की मरम्मत निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए।
सेक्टरवासियों में बढ़ता आक्रोश
इन समस्याओं को लेकर सेक्टर-130 के निवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बार-बार शिकायत और अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बावजूद जब स्थिति जस की तस रहती है तो नागरिकों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है।
अशोक चौहान का कहना है कि प्राधिकरण को यह समझना होगा कि शहर का विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट, चौड़ी मुख्य सड़कें और नई योजनाएं बनाने से नहीं होता। विकास की असली कसौटी यह है कि किसी सेक्टर की आंतरिक सड़कें कितनी सुरक्षित हैं, सीवर व्यवस्था कितनी सुचारु है, सफाई व्यवस्था कितनी प्रभावी है और आम नागरिक को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी परेशानी उठानी पड़ रही है।
आरडब्ल्यूए की मांग—जमीन पर दिखे कार्रवाई
सेक्टर-130 आरडब्ल्यूए और स्थानीय निवासियों की मांग है कि नोएडा प्राधिकरण इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों की टीम को मौके पर भेजे। टूटी सड़कों का सर्वे कराया जाए, क्षतिग्रस्त लोहे के जाल बदले जाएं और जिन स्थानों पर सीवर ओवरफ्लो हो रहा है वहां तत्काल सफाई कराकर मूल कारण का स्थायी समाधान किया जाए।
इसके साथ ही सीवर लाइन की व्यापक सफाई, नियमित निरीक्षण और भविष्य में दोबारा ओवरफ्लो की स्थिति न बने, इसके लिए स्थायी कार्ययोजना तैयार करने की मांग की गई है।
‘अगर कुछ शर्म लगे तो समस्याओं का समाधान करें’
अशोक चौहान ने तीखे शब्दों में कहा कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उन्होंने प्राधिकरण से सड़क मरम्मत, टूटे लोहे के जालों की व्यवस्था और सीवर ओवरफ्लो की समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग की है।
उनका कहना है कि अधिकारी यदि वास्तव में सेक्टर की समस्याओं को समझना चाहते हैं तो उन्हें एसी कमरों से बाहर निकलकर मौके पर पहुंचना होगा। वहां जाकर उन्हें स्वयं देखना होगा कि नागरिक किन परिस्थितियों से गुजर रहे हैं।
सेक्टर-130 के निवासियों की अपेक्षा अब किसी नए आश्वासन से ज्यादा जमीनी कार्रवाई की है। सवाल यही है कि टूटी सड़कों, क्षतिग्रस्त जालों और उफनते सीवर से परेशान नागरिकों को राहत कब मिलेगी और नोएडा प्राधिकरण की ओर से इस समस्या का स्थायी समाधान कब जमीन पर दिखाई देगा?














