“राउज एवेन्यू कोर्ट का अहम फैसला, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब ट्रायल की राह साफ; कोर्ट ने कहा—पूर्व रेल मंत्री के पद के दुरुपयोग का मजबूत संदेह”
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार के लिए गुरुवार का दिन बड़ा कानूनी झटका लेकर आया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल टेंडर से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत कुल **9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत के इस फैसले के बाद अब इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 अक्टूबर की तारीख तय की है। इस केस में लालू परिवार के अलावा सरला गुप्ता, लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स समेत अन्य लोगों और संस्थाओं को भी आरोपी बनाया गया है। हालांकि अदालत ने मामले में सभी आरोपियों को दोषी नहीं माना है और 7 आरोपियों को आरोपमुक्त भी कर दिया है।
अदालत के इस फैसले ने एक बार फिर उस मामले को सुर्खियों में ला दिया है, जिसकी जड़ें वर्ष 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौर से जुड़ी हैं।
लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर शिकंजा
राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद सबसे बड़ा झटका लालू परिवार को लगा है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में इतने आधार पाए कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कुल 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जाएं।
आरोप तय होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी दोषी साबित हो गए हैं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध जांच सामग्री और रिकॉर्ड को देखते हुए यह माना है कि मामले की विस्तृत सुनवाई और ट्रायल आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। अब अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने होंगे, जबकि बचाव पक्ष को अदालत में अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
इस फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इस मामले की चर्चा तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार पहले से ही विभिन्न मामलों में कानूनी लड़ाइयों का सामना करता रहा है। ऐसे में IRCTC होटल टेंडर मामले में आरोप तय होना उनके लिए एक नई और महत्वपूर्ण कानूनी चुनौती माना जा रहा है।
कोर्ट ने कहा—राजनीतिक बदले की कार्रवाई जैसी नहीं दिखती जांच
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। राउज एवेन्यू कोर्ट ने माना कि उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए ऐसा प्रतीत नहीं होता कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ की गई जांच केवल राजनीतिक कारणों से प्रभावित थी।
अदालत ने कथित रूप से लारा प्रोजेक्ट्स को जिस तरीके से फायदा पहुंचाए जाने का आरोप सामने आया है, उसे गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियां लालू प्रसाद यादव की भूमिका को लेकर मजबूत संदेह पैदा करती हैं।
अदालत की टिप्पणी के अनुसार, पूर्व रेल मंत्री के रूप में लालू प्रसाद यादव द्वारा अपने पद के कथित दुरुपयोग का मजबूत संदेह बनता है। यही वजह है कि अदालत ने मामले को ट्रायल के चरण तक आगे बढ़ाने का फैसला किया।
कोर्ट की यह टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर अक्सर राजनीतिक प्रतिशोध के आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और परिस्थितियों के आधार पर जांच को प्रथम दृष्टया केवल राजनीतिक कार्रवाई मानने से इनकार किया।
सात आरोपियों को मिली राहत, कोर्ट ने किया आरोपमुक्त
जहां लालू परिवार समेत 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, वहीं इस मामले में 7 आरोपियों को अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया है। यानी उनके खिलाफ उपलब्ध सामग्री को ट्रायल चलाने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
आरोपमुक्त किए गए लोगों में गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी और देवकी नंदन तुलस्यान शामिल हैं। इसके अलावा राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड को भी आरोपों से राहत मिली है।
कोर्ट का यह फैसला बताता है कि अदालत ने मामले में हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ मौजूद सामग्री को अलग-अलग आधार पर परखा। जिन लोगों के खिलाफ पर्याप्त आधार नहीं मिला, उन्हें आरोपमुक्त कर दिया गया, जबकि जिन आरोपियों के खिलाफ अदालत को ट्रायल चलाने योग्य प्रथम दृष्टया साक्ष्य और परिस्थितियां मिलीं, उनके खिलाफ आरोप तय किए गए।
2004 से 2009 के रेल मंत्रालय के कार्यकाल से जुड़ा है मामला
पूरा मामला उस दौर का है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय रेलवे की इकाई IRCTC के तहत रांची और पुरी में स्थित दो होटलों के रखरखाव और संचालन का ठेका कथित रूप से नियमों को दरकिनार कर दिया गया।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन होटलों का संचालन और रखरखाव एक निजी कंपनी सुजाता होटल्स को दिया गया। आरोपों के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में कुछ निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह आरोप सामने आया कि होटल टेंडर से कथित लाभ और जमीन के लेन-देन के बीच संबंध था। इसी कथित लेन-देन को जांच एजेंसियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से जोड़ा।
जमीन के लेन-देन पर जांच एजेंसियों का बड़ा आरोप
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED का आरोप है कि कथित भ्रष्टाचार के बदले जमीन का लेन-देन किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, पटना में स्थित एक कीमती जमीन को कथित तौर पर सरला गुप्ता के माध्यम से बेहद कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
आरोप है कि यह जमीन लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव से जुड़ी कंपनी लारा प्रोजेक्ट्स को हस्तांतरित की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि जमीन के वास्तविक मूल्य और उसके हस्तांतरण की कीमत के बीच बड़ा अंतर था।
इसी कथित लेन-देन को जांच एजेंसियों ने मामले का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना। आरोप है कि होटल टेंडर में कथित रूप से दिए गए लाभ के बदले जमीन के रूप में फायदा पहुंचाया गया।
हालांकि इन आरोपों पर अब अदालत में विस्तृत सुनवाई होगी और अभियोजन पक्ष को अपने दावों को सबूतों के जरिए साबित करना होगा। दूसरी ओर, आरोपियों को इन दावों का कानूनी तरीके से जवाब देने और अपना बचाव प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा।
लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स की भूमिका भी जांच के केंद्र में
मामले में लारा प्रोजेक्ट्स और सुजाता होटल्स की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है। अदालत के सामने जांच एजेंसियों की ओर से यह तर्क रखा गया कि होटल टेंडर और कथित भूमि लेन-देन के बीच एक संबंध मौजूद है।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने भी अपने फैसले में इस बात पर गौर किया कि कथित रूप से लारा प्रोजेक्ट्स को किस प्रकार लाभ पहुंचा। अदालत की टिप्पणी के अनुसार, उपलब्ध परिस्थितियां लालू प्रसाद यादव की भूमिका को लेकर संदेह पैदा करती हैं।
अब ट्रायल के दौरान यह स्पष्ट करने की कोशिश होगी कि होटल टेंडर की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं, किसी व्यक्ति या संस्था को अनुचित लाभ पहुंचाया गया या नहीं और कथित जमीन के लेन-देन का इन फैसलों से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।
अब शुरू होगी कानूनी लड़ाई का अहम चरण
अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब मामला एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। आगे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अपने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को साबित करने का प्रयास करेगा।
वहीं, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य आरोपी अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगे। भारतीय कानून के तहत ट्रायल पूरा होने और अदालत के अंतिम फैसले तक सभी आरोपी कानूनी रूप से निर्दोष माने जाते हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी। उस दिन अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई कर सकती है।
फैसले के बाद फिर सियासी हलचल तेज
लालू परिवार बिहार की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। लालू प्रसाद यादव राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख हैं, जबकि तेजस्वी यादव पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला केवल कानूनी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो सकती है। हालांकि फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अदालत ने आरोप तय कर मामले को ट्रायल के अगले चरण में पहुंचा दिया है।
राउज एवेन्यू कोर्ट का गुरुवार का फैसला लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए निश्चित रूप से एक बड़ा कानूनी झटका है। एक तरफ अदालत ने 9 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर ट्रायल का रास्ता साफ कर दिया है, वहीं दूसरी ओर 7 आरोपियों को आरोपमुक्त कर यह भी स्पष्ट किया है कि हर आरोपी की भूमिका को अलग-अलग आधार पर जांचा गया है।
अब सबकी निगाहें 3 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी रहेंगी, जहां इस बहुचर्चित IRCTC होटल टेंडर और कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कानूनी लड़ाई एक नए चरण में आगे बढ़ेगी।














