Friday, September 4, 2026
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“जब फर्स्टवन रिहैब के बच्चे बने कान्हा-राधा, जन्माष्टमी पर भावुक हुआ पूरा माहौल”

 “भक्ति, उल्लास और भावनाओं से सराबोर हुआ फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन — नन्हे कृष्ण-राधा की मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समां”

नोएडा: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर नोएडा के सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में शुक्रवार को भक्ति, उल्लास और मानवीय संवेदनाओं से सराबोर ऐसा आयोजन हुआ, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। दिव्यांग बच्चों ने अपने परिजनों और फाउंडेशन की टीम के साथ मिलकर जन्माष्टमी का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया। कार्यक्रम में बच्चों की मासूम मुस्कान, कृष्ण-राधा की आकर्षक वेशभूषा और भजन-कीर्तन की गूंज ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

जन्माष्टमी के इस विशेष आयोजन का सबसे आकर्षक केंद्र रहे फाउंडेशन के नन्हे-मुन्ने बच्चे, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रूप में सजकर अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीत लिया। किसी बच्चे ने नटखट कान्हा का रूप धारण किया तो कोई राधा के रूप में बेहद सुंदर नजर आया। बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह संदेश भी दिया कि प्रतिभा और उत्साह किसी शारीरिक चुनौती के मोहताज नहीं होते।

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत पूजा-अर्चना और आराधना के साथ हुई। बच्चों और उनके परिजनों ने श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया। इसके बाद जैसे-जैसे भजन और कीर्तन की धुनें गूंजने लगीं, बच्चों के चेहरे पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई देने लगा।

ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्ति गीतों के बीच बच्चों ने जमकर नृत्य किया। बच्चों की प्रस्तुतियों को देखकर अभिभावकों के साथ-साथ फाउंडेशन की पूरी टीम भी भावुक नजर आई। कई अभिभावकों के लिए यह क्षण बेहद खास था, क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में पूरे उत्साह के साथ भाग लेते देखा।

कृष्ण-राधा की वेशभूषा में दिखी नन्ही प्रतिभा

जन्माष्टमी के अवसर पर बच्चों को विशेष रूप से कृष्ण और राधा की वेशभूषा में तैयार किया गया। मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और पारंपरिक परिधानों में सजे नन्हे कृष्ण बेहद आकर्षक लग रहे थे, वहीं राधा के रूप में सजी बच्चियों ने भी अपनी मासूमियत और सुंदर प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।

इस विशेष प्रस्तुति को तैयार करने में एडमिन हेड कृष्णा यादव, स्पेशल एजुकेटर इलिका रावत और फिजियोथेरेपिस्ट अभिनव प्रताप सिंह का विशेष योगदान रहा। टीम ने बच्चों की क्षमता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुतियों की तैयारी कराई, ताकि प्रत्येक बच्चा आयोजन का हिस्सा बन सके और अपनी प्रतिभा को व्यक्त कर सके।

भजन-कीर्तन पर थिरके नन्हे कदम, तालियों से गूंज उठा परिसर

कार्यक्रम के दौरान जब भजन-कीर्तन शुरू हुआ तो बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ बच्चों ने नृत्य किया और अपनी खुशी का इजहार किया। उनके साथ मौजूद परिजनों और फाउंडेशन के सदस्यों ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

नन्हे बच्चों के नृत्य और कृष्ण-राधा की मनमोहक प्रस्तुतियों पर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। आयोजन में मौजूद लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों की खुशियों, आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी का उत्सव बन गया।

बच्चों की प्रस्तुतियों ने यह भी साबित किया कि यदि उन्हें उचित अवसर, प्रोत्साहन और सहयोग मिले तो वे किसी भी मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं।

दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना हमारा उद्देश्य : डॉ. महिपाल सिंह

फाउंडेशन के निदेशक एवं फिजियोथेरेपिस्ट और एर्गोनोमिस्ट डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए बच्चों के भीतर खुशी, आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव की भावना भी मजबूत होती है।

उन्होंने कहा कि त्योहार हमारी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। जब दिव्यांग बच्चे इन आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं तो उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ता है और वे स्वयं को समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करते हैं।

त्योहारों के जरिए संस्कृति से जुड़ रहे बच्चे

फाउंडेशन की सेंटर मैनेजर सुरभि जैन ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में बच्चों की भागीदारी उनके व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने बताया कि फाउंडेशन में बच्चों की जरूरतों और क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल चिकित्सकीय और शैक्षणिक सहयोग देना ही नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाना है।

अभिभावकों के लिए भी यादगार रहा आयोजन

जन्माष्टमी समारोह बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों के लिए भी बेहद भावुक और यादगार रहा। अपने बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में देखकर अभिभावकों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कई अभिभावकों ने बच्चों की प्रस्तुतियों को कैमरे में कैद किया और उनके उत्साहवर्धन के लिए तालियां बजाईं।

आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि दिव्यांग बच्चों को अवसर और मंच दिया जाए तो वे अपनी प्रतिभा से समाज को प्रेरित कर सकते हैं। उनके लिए त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी आत्मविश्वास बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

स्वयंसेवकों ने भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राजवी सिंह, कृति यादव, आरवी, सक्षम और भाविका ने आयोजन की तैयारियों से लेकर बच्चों की प्रस्तुतियों तक में विशेष सहयोग किया।

स्वयंसेवकों ने बच्चों की सुविधा, उनकी तैयारियों और कार्यक्रम के संचालन में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी मेहनत और सहयोग से कार्यक्रम व्यवस्थित और उत्साहपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

फाउंडेशन की पूरी टीम रही मौजूद

इस अवसर पर फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन की प्रबंध निदेशक डॉ. दीक्षा श्रीवास्तव, मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुष्मिता भाटी और डिजिटल मीडिया एंड कम्युनिकेशन मैनेजर सौम्या सोनी सहित फाउंडेशन की टीम के सदस्य मौजूद रहे।

फाउंडेशन की टीम ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उनकी प्रस्तुतियों की सराहना की। कार्यक्रम में बच्चों के परिजनों की भागीदारी ने भी समारोह की रौनक बढ़ा दी।

खुशियों के साथ मिला सामाजिक जुड़ाव का संदेश

फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन में आयोजित जन्माष्टमी समारोह ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी दिया। कार्यक्रम ने दिखाया कि दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केवल उपचार और शिक्षा ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों में समान अवसर देना भी जरूरी है।

नन्हे कृष्ण-राधा के रूप में बच्चों की मुस्कान, भक्ति गीतों पर उनके थिरकते कदम और परिजनों की खुशी पूरे आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। जन्माष्टमी के इस समारोह ने सभी को यह एहसास कराया कि खुशियां और उत्सव हर बच्चे का अधिकार हैं और सही अवसर मिलने पर हर बच्चा अपनी प्रतिभा और क्षमता से समाज में अपनी पहचान बना सकता है।

सेक्टर-70 में आयोजित यह जन्माष्टमी समारोह इसी सकारात्मक सोच, समावेशी समाज और दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक खूबसूरत पहल के रूप में याद किया जाएगा।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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