“वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के भव्य आयोजन में दिखी ब्रज की झलक, श्री राधा वृंदावन चंद्र के महाअभिषेक ने बांधा समां”
नोएडा, 30 अगस्त: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की पूर्वसंध्या पर रविवार को नोएडा पूरी तरह कृष्ण भक्ति में डूबा नजर आया। वृंदावन चंद्रोदय मंदिर की ओर से सेक्टर-74 स्थित वेडिंग क्राउन बैंक्वेट हॉल में आयोजित भव्य ‘कृष्णोत्सव’ में श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिकता का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम स्थल पर देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के अखंड संकीर्तन और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंजता रहा।
वैदिक मंत्रों से हुआ शुभारंभ, आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हुआ माहौल
कृष्णोत्सव का शुभारंभ वैदिक परंपराओं के अनुरूप वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया।
“ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥”
मंत्रोच्चार के साथ ही कार्यक्रम स्थल का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। वैदिक ध्वनियों, शंखनाद और भक्ति संगीत के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। इसके बाद कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई।
वेद मंत्रों की गूंज के साथ शुरू हुए इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिक शहर की व्यस्त जीवनशैली के बीच भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सनातन मूल्यों के लिए लोगों के मन में आज भी गहरी आस्था और आकर्षण मौजूद है।
बाल कृष्ण की लीलाओं ने मोहा मन, कलाकारों की प्रस्तुतियों पर झूमे श्रद्धालु
कृष्णोत्सव की सबसे खास प्रस्तुतियों में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं रहीं। बच्चों और निपुण कलाकारों ने कृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी चंचलता, गोपियों के साथ उनकी लीलाओं और सनातन संस्कृति के विभिन्न आयामों को मंच पर जीवंत कर दिया।
कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कभी बाल कृष्ण की शरारतों पर लोगों के चेहरे खिल उठे तो कभी भक्तिमय प्रस्तुतियों के दौरान श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए। मंच पर जैसे ही भगवान कृष्ण की लीलाओं का चित्रण हुआ, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट और ‘जय श्री कृष्णा’ के जयघोष से गूंज उठा।
बच्चों की प्रस्तुतियों ने विशेष रूप से दर्शकों का ध्यान खींचा। उनके अभिनय और नृत्य के माध्यम से सनातन संस्कृति की कथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी प्रभावी ढंग से सामने आया।
मुख्य अतिथि ने की मंदिर की पहल की सराहना
समारोह में “ज्वाइंट कमिश्नर लॉ एंड ऑर्डर नोएडा पुलिस राजीव नरायण मिश्रा” ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में आध्यात्मिक चेतना के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने वृंदावन चंद्रोदय मंदिर की ओर से भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
समारोह में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। दिव्य कृष्णात्रेय, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए सेक्टर-105, उद्योगपति मनमोहन शर्मा, पीयूष द्विवेदी, अध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश तथा मोनू चौहान, सीईओ मूनलाइट इंफ्रा सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।
गणमान्य अतिथियों ने श्रद्धालुओं के साथ कार्यक्रम का आनंद लिया और वृंदावन चंद्रोदय मंदिर द्वारा आयोजित इस पहल का स्वागत किया।
महाअभिषेक बना कृष्णोत्सव का सबसे भावुक और अलौकिक क्षण
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक क्षण श्री राधा वृंदावन चंद्र का भव्य महाअभिषेक रहा। महाअभिषेक के लिए विग्रहों को विशेष रूप से श्री वृंदावन धाम से लाया गया था।
जैसे ही महाअभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई, वातावरण भक्तिभाव से भर गया। श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह दिखाई दिया। हरे कृष्ण महामंत्र के अखंड संकीर्तन, शंखनाद और जयकारों के बीच महाअभिषेक संपन्न हुआ।
श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण इसलिए भी विशेष रहा क्योंकि उन्हें नोएडा में ही वृंदावन धाम की आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर मिला। भगवान श्री राधा वृंदावन चंद्र के दर्शन और महाअभिषेक के दौरान अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए।
“हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥”
के संकीर्तन से पूरा परिसर देर तक गुंजायमान रहा।
नोएडा में दिखा ब्रज का रंग, भक्ति में डूबा शहर
कृष्णोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह नोएडा जैसे आधुनिक महानगर में ब्रज संस्कृति की जीवंत झलक बनकर सामने आया। कार्यक्रम स्थल की सजावट, भक्ति संगीत, कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित प्रस्तुतियां और महाअभिषेक ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव कराया।
शहर के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे परिवारों ने कार्यक्रम में भाग लिया। बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं की मौजूदगी ने यह भी दिखाया कि आधुनिक पीढ़ी भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़ने में रुचि रखती है।
आयोजन के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर दिखाई दिए। कई परिवारों ने इसे बच्चों को भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से परिचित कराने का अवसर भी बताया।

नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का प्रयास
वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संदेश भी है।
उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के तनावपूर्ण और तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में श्रीकृष्ण के विचार लोगों को कर्तव्य, धैर्य, आत्मसंयम और सकारात्मक दृष्टिकोण की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने मंदिर द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने कहा कि मंदिर का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देना भी है।
आस्था के साथ सामाजिक सरोकार का संदेश
कार्यक्रम में आध्यात्मिकता के साथ सामाजिक सरोकार भी प्रमुख रूप से दिखाई दिया। मंदिर प्रबंधन की ओर से बताया गया कि विभिन्न सामाजिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचने और युवाओं तथा बच्चों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कृष्णोत्सव के माध्यम से भी यही संदेश देने का प्रयास किया गया कि सनातन संस्कृति केवल पुस्तकों और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे संगीत, नृत्य, नाटक, कला और सामूहिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी के जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महानगरों में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने के साथ-साथ पारिवारिक और सामुदायिक मूल्यों को भी बढ़ावा देते हैं।
महाप्रसाद के साथ हुआ भव्य आयोजन का समापन
देर शाम तक चले कृष्णोत्सव का समापन महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। महाअभिषेक और भक्ति कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल से लौटते समय भी लोगों के चेहरों पर भक्ति और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था।
श्रद्धालुओं के लिए यह आयोजन जन्माष्टमी के उत्सव की शुरुआत से पहले ही एक यादगार आध्यात्मिक अनुभव बन गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कृष्णोत्सव ने एक बार फिर यह दिखाया कि नोएडा केवल आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और कॉरपोरेट गतिविधियों का शहर नहीं है, बल्कि यहां धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के प्रति भी गहरा जुड़ाव मौजूद है।
‘कृष्णोत्सव’ ने दिया एकता, संस्कार और भक्ति का संदेश
वृंदावन चंद्रोदय मंदिर का यह आयोजन हजारों श्रद्धालुओं के लिए केवल भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और भक्ति का अवसर नहीं रहा, बल्कि इसने संस्कृति और संस्कारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश भी दिया।
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर महाअभिषेक तक हर प्रस्तुति में भक्ति और संस्कृति का समन्वय दिखाई दिया। मंच पर कलाकारों की प्रस्तुतियां हों या सभागार में गूंजता महामंत्र—हर पल श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ता रहा।
नोएडा में आयोजित इस भव्य कृष्णोत्सव ने जन्माष्टमी के उल्लास को एक दिन पहले ही चरम पर पहुंचा दिया। कार्यक्रम स्थल से लेकर श्रद्धालुओं के बीच तक एक ही भाव दिखाई दिया—भक्ति, आस्था और श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण।
महाप्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम समाप्त जरूर हुआ, लेकिन हजारों श्रद्धालुओं के मन में कृष्ण भक्ति की वह गूंज देर तक बनी रही।
“जय श्रीकृष्ण” के जयघोष के साथ नोएडा में सजा यह कृष्णोत्सव शहर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान में एक और खूबसूरत अध्याय जोड़ गया।














