“नियमित मेंटेनेंस शुल्क के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का संकट, प्रबंधन पर उपेक्षा और डराने-धमकाने के आरोप; नोएडा प्राधिकरण से निष्पक्ष जांच की मांग”
नोएडा। शहर की प्रतिष्ठित आवासीय परियोजनाओं में गिनी जाने वाली महागुन सोसायटी इन दिनों अपने निवासियों के आक्रोश का केंद्र बनी हुई है। सोसायटी के निवासियों ने रखरखाव व्यवस्था, स्वच्छता, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की लगातार बिगड़ती स्थिति को लेकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि वे हर महीने नियमित रूप से भारी-भरकम मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वह सुविधाएं नहीं मिल रहीं जिनका वादा किया गया था।
निवासियों का आरोप है कि सोसायटी में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई देते हैं, नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जाता और कई बार बच्चों के खेलने वाले पार्क एवं कॉमन एरिया तक में कूड़ा फैला रहता है। इससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है बल्कि संक्रमण और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता
महागुन सोसायटी के निवासियों का कहना है कि साफ-सफाई किसी भी आवासीय परिसर की सबसे बुनियादी आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान समय में यही सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। उनका आरोप है कि कूड़ा समय पर नहीं उठाया जाता, सफाई कर्मचारियों की निगरानी प्रभावी नहीं है और कई स्थानों पर लंबे समय तक गंदगी बनी रहती है।
निवासियों के अनुसार, गंदगी के कारण मच्छरों और अन्य कीटों की संख्या भी बढ़ रही है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है क्योंकि जलभराव और कचरे के कारण संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है।
सोसायटी में रहने वाले अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के खेलने वाले क्षेत्रों में यदि गंदगी और कचरा फैला रहेगा तो उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों ने भी इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।
बार-बार दिखाई दे रहे सांप, दहशत में परिवार
स्वच्छता के साथ-साथ सुरक्षा का मुद्दा भी अब गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। हाल के दिनों में सोसायटी परिसर में कई बार सांप दिखाई देने की घटनाओं ने निवासियों की चिंता बढ़ा दी है।
निवासियों का आरोप है कि लंबे समय से घास की नियमित कटाई नहीं की जा रही है। कई स्थानों पर झाड़ियां काफी ऊंची हो चुकी हैं और पेस्ट कंट्रोल भी प्रभावी तरीके से नहीं कराया जा रहा। ऐसी स्थिति में सांप और अन्य जहरीले जीवों के निकलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
परिजनों का कहना है कि छोटे बच्चों का पार्क में खेलना और बुजुर्गों का टहलना अब पहले जैसा सुरक्षित महसूस नहीं होता। उनका मानना है कि यदि समय रहते घास की सफाई और पेस्ट कंट्रोल कराया जाता तो ऐसी घटनाओं से बचा जा सकता था।
बार-बार खराब हो रही लिफ्टें, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
महागुन सोसायटी के निवासियों ने लिफ्टों के रखरखाव पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई टावरों में लिफ्टें बार-बार खराब हो जाती हैं, जिससे ऊंची मंजिलों पर रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सबसे अधिक कठिनाई वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवारों को होती है। कई बार लिफ्ट लंबे समय तक बंद रहने से लोगों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ता है।
निवासियों का कहना है कि लिफ्ट जैसी आवश्यक सुविधा का नियमित निरीक्षण और समय पर रखरखाव होना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में ऐसा नहीं दिखाई देता।
भीषण गर्मी में बंद पड़े कॉमन एरिया के एसी
निवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि सोसायटी के कॉमन एरिया में लगे एयर कंडीशनर लंबे समय से बंद पड़े हैं। गर्मी के मौसम में क्लब हाउस, रिसेप्शन और अन्य साझा स्थानों पर आने-जाने वाले लोगों को अत्यधिक गर्मी झेलनी पड़ रही है।
उनका कहना है कि जब मेंटेनेंस शुल्क नियमित रूप से लिया जा रहा है तो कॉमन एरिया की सुविधाओं का संचालन भी नियमित रूप से होना चाहिए। लंबे समय तक एसी बंद रहना रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
शिकायतें होती रहीं, लेकिन समाधान नहीं मिला
निवासियों का कहना है कि यह समस्याएं नई नहीं हैं। पिछले काफी समय से वे लिखित आवेदन, ईमेल, व्हाट्सएप ग्रुप और व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से प्रबंधन को लगातार समस्याओं से अवगत कराते रहे हैं।
इसके बावजूद उनका आरोप है कि शिकायतों का या तो कोई जवाब नहीं दिया गया या फिर केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। कई शिकायतों पर आज तक स्थायी समाधान नहीं हो सका।
निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाते तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
प्रबंधन पर डराने-धमकाने के आरोप
कुछ निवासियों ने महागुन प्रबंधन के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने-धमकाने और असहयोगपूर्ण व्यवहार का सामना करना पड़ा।
उनका कहना है कि जब निवासी अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं तो उन्हें सकारात्मक संवाद और समाधान की उम्मीद होती है, लेकिन यदि शिकायतकर्ताओं के साथ ही असहयोगपूर्ण रवैया अपनाया जाए तो इससे विश्वास और अधिक कमजोर होता है।
हालांकि, इन आरोपों पर प्रबंधन का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका। यदि प्रबंधन की प्रतिक्रिया प्राप्त होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
मेंटेनेंस शुल्क पर उठे सवाल
निवासियों का कहना है कि वे हर महीने नियमित रूप से मेंटेनेंस शुल्क जमा करते हैं, ताकि सोसायटी की सफाई, सुरक्षा, लिफ्ट, पार्क, बिजली, कॉमन एरिया और अन्य सुविधाओं का बेहतर संचालन हो सके।
उनका सवाल है कि जब शुल्क समय पर लिया जा रहा है तो फिर मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता लगातार क्यों गिर रही है। उनका कहना है कि मेंटेनेंस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्राधिकरण से हस्तक्षेप की मांग
सोसायटी के निवासियों ने पूरे मामले की शिकायत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों तक भी पहुंचाने का दावा किया है। उन्होंने नोएडा प्राधिकरण तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि बिल्डर एवं सुविधा प्रबंधन अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन करें।
निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।
निवासियों की प्रमुख मांगें
निवासियों ने संयुक्त रूप से निम्न मांगें रखी हैं—
- सोसायटी में नियमित और प्रभावी सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- प्रतिदिन समय पर कूड़ा उठाने की व्यवस्था लागू की जाए।
- घास एवं झाड़ियों की नियमित कटाई कराई जाए।
- प्रभावी और निर्धारित अंतराल पर पेस्ट कंट्रोल कराया जाए।
- सभी लिफ्टों का नियमित निरीक्षण एवं समय पर रखरखाव सुनिश्चित हो।
- कॉमन एरिया के बंद पड़े एयर कंडीशनर तत्काल चालू कराए जाएं।
- शिकायत निवारण प्रणाली को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
- मेंटेनेंस व्यवस्था की जवाबदेही तय की जाए।
- नोएडा प्राधिकरण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे।
निवासी प्रतिनिधियों ने उठाई एकजुट आवाज
इस मुद्दे को लेकर आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में निवासियों ने भाग लिया और सामूहिक रूप से अपनी चिंताएं सामने रखीं। निवासी प्रतिनिधियों में नितिन गांधी, निखिल कुमार, ऋथि कश्यप, शिवांगी अग्रवाल, शिवा गोयल, पारुल गर्ग, एकता खरे एवं चेतना सहित अनेक निवासी उपस्थित रहे।
प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि सोसायटी में बेहतर, सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित कराना है। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि प्रबंधन संवाद के माध्यम से समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले ताकि सभी निवासी सम्मानजनक और सुरक्षित माहौल में रह सकें।














