“ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गैलेक्सी वेगा सोसायटी में लिफ्ट फंसने से दहशत; बच्चों ने हिम्मत बनाए रखने के लिए पढ़ी हनुमान चालीसा, लगातार हो रही घटनाओं के बीच लिफ्ट सुरक्षा पर फिर उठे सवाल”
ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटियों में लिफ्ट सुरक्षा एक बार फिर बड़े सवालों के घेरे में है। मंगलवार को गैलेक्सी वेगा सोसायटी में चार मासूम बच्चे करीब 30 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे। अचानक बिजली चली जाने से लिफ्ट के भीतर अंधेरा छा गया। घबराए बच्चों ने मदद के लिए आवाजें लगाईं, लेकिन समय पर सहायता नहीं पहुंचने से उनका डर और बढ़ता गया। इस बीच खुद को संभालने और हिम्मत बनाए रखने के लिए चारों बच्चे लिफ्ट के फर्श पर बैठ गए और एक साथ हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।
बच्चों के सुरक्षित बाहर निकल आने के बाद घटना का वीडियो और जानकारी सामने आई तो सोसायटी के निवासियों में भारी नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अनेक हाईराइज सोसायटियों में लिफ्ट फंसने, अचानक बंद हो जाने और तकनीकी खराबी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद रखरखाव व्यवस्था और जवाबदेही में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा।
30 मिनट की दहशत, मासूमों ने दिखाई हिम्मत
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार चारों बच्चे लिफ्ट से अपने फ्लोर पर जा रहे थे। तभी लिफ्ट अचानक बीच रास्ते में रुक गई। कुछ ही क्षण बाद बिजली चली गई और लिफ्ट के भीतर अंधेरा हो गया।
बच्चों ने इमरजेंसी सहायता के लिए आवाज लगाई और बाहर संपर्क करने की कोशिश की। काफी देर तक राहत नहीं मिलने पर वे घबरा गए। लेकिन रोने या घबराहट में टूटने के बजाय उन्होंने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।
करीब आधे घंटे बाद लिफ्ट का दरवाजा खोला गया और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि इस दौरान बच्चों और उनके परिवारों ने भारी मानसिक तनाव झेला।
#GreaterNoida@myogiadityanath @OfficialGNIDA ग्रेटर नोएडा की एक सोसाइटी में लिफ्ट अचानक बंद हो जाने से कई छात्राएं करीब 30 मिनट तक उसमें फंसी रहीं
घबराहट बढ़ने पर उन्होंने खुद को संभालने के लिए हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।
सूचना मिलने के बाद तकनीकी टीम ने मौके पर पहुंचकर… pic.twitter.com/P9K3ZKdrK2
— PARDAPHAAS NEWS (@pardaphaas) July 14, 2026
लगातार बढ़ रही हैं लिफ्ट फंसने की घटनाएं
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान लिफ्ट से जुड़े हादसे लगातार चर्चा का विषय बने हैं। कहीं लिफ्ट बीच मंजिल पर अटक जाती है, कहीं अचानक तकनीकी खराबी आ जाती है तो कहीं रखरखाव में कमी की शिकायतें सामने आती हैं।
हाईराइज आवासीय परियोजनाओं की बढ़ती संख्या के साथ लाखों लोग प्रतिदिन लिफ्ट का उपयोग करते हैं। ऐसे में लिफ्ट की नियमित जांच, समय पर मरम्मत और आपातकालीन व्यवस्था का प्रभावी होना बेहद आवश्यक माना जाता है।
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों का आरोप है कि कई सोसायटियों में मेंटेनेंस एजेंसियां केवल औपचारिक निरीक्षण करती हैं, जबकि वास्तविक तकनीकी जांच समय पर नहीं होती।
लिफ्ट एक्ट लागू, लेकिन सवाल बरकरार
उत्तर प्रदेश में लिफ्ट और एस्केलेटर की सुरक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इसका उद्देश्य लिफ्टों के पंजीकरण, नियमित निरीक्षण, सुरक्षा मानकों के पालन और दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करना है।
इसके बावजूद रेजिडेंट्स का आरोप है कि कई सोसायटियों में सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा। उनका कहना है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका सख्ती से पालन कराने और उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है।
अब तक सरकार और जनप्रतिनिधियों ने क्या कदम उठाए?
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कई स्तरों पर कदम उठाए गए हैं।
पहला, प्रदेश सरकार ने लिफ्ट सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया ताकि बिना पंजीकरण और सुरक्षा मानकों के लिफ्ट संचालन पर रोक लगाई जा सके।
दूसरा, गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने समय-समय पर बिल्डरों, एओए (Apartment Owners Association) और मेंटेनेंस एजेंसियों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।
तीसरा, कई मामलों में जिला प्रशासन ने लिफ्ट दुर्घटनाओं की जांच कराई और संबंधित एजेंसियों से स्पष्टीकरण भी मांगा।
चौथा, जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न मंचों पर हाईराइज सोसायटियों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है और निवासियों की शिकायतों को प्रशासन तक पहुंचाया है।
हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन कदमों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। उनका मानना है कि जब तक नियमित ऑडिट, जवाबदेही तय करने और लापरवाह एजेंसियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकेंगी।
रेजिडेंट्स की मांग—सिर्फ जांच नहीं, कार्रवाई भी हो
घटना के बाद गैलेक्सी वेगा सहित आसपास की कई सोसायटियों के निवासियों ने मांग की है कि—
- सभी हाईराइज सोसायटियों की लिफ्टों का स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट कराया जाए।
- प्रत्येक लिफ्ट का समयबद्ध तकनीकी निरीक्षण अनिवार्य बनाया जाए।
- इमरजेंसी अलार्म, इंटरकॉम, बैकअप पावर और रेस्क्यू सिस्टम की नियमित जांच हो।
- लापरवाही मिलने पर बिल्डर, मेंटेनेंस एजेंसी या जिम्मेदार संस्था पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
- जिला प्रशासन समय-समय पर निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
लिफ्ट सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश हादसों की जड़ में रखरखाव की कमी, समय पर पुर्जों का प्रतिस्थापन न होना और सुरक्षा परीक्षण में लापरवाही होती है।
उनके अनुसार आधुनिक लिफ्टों में कई सुरक्षा प्रणालियां होती हैं, लेकिन यदि उनका नियमित परीक्षण न किया जाए तो आपात स्थिति में वे अपेक्षित ढंग से काम नहीं कर पातीं। इसलिए केवल नई लिफ्ट लगाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसका निरंतर रखरखाव अधिक महत्वपूर्ण है।
बच्चों की बहादुरी बनी चर्चा का विषय
इस घटना का सबसे भावुक पक्ष यह रहा कि भय और अंधेरे के बीच चारों बच्चों ने एक-दूसरे का मनोबल बनाए रखा। हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ करते हुए उन्होंने घबराहट पर काबू पाने की कोशिश की। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों ने बच्चों की हिम्मत की सराहना की, वहीं कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा ही क्यों हुई।
सबसे बड़ा सवाल—क्या अगली घटना का इंतजार?
गैलेक्सी वेगा की यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि हाईराइज शहरों में लिफ्ट अब सुविधा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में इसकी सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।
सरकार ने कानूनी व्यवस्था बनाई है और प्रशासन समय-समय पर निर्देश भी जारी करता है, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं बताती हैं कि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित निरीक्षण, पारदर्शी जवाबदेही और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई अभी भी सबसे बड़ी जरूरत है। जब तक हर सोसायटी में लिफ्ट सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, तब तक हर नई घटना के बाद यही सवाल गूंजता रहेगा—क्या अगली बार भी किसी परिवार को अपने बच्चों के 30 मिनट के डर का इंतजार करना पड़ेगा?














