यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की खुफिया गतिविधियों को लेकर नई रिपोर्ट सामने आई है। दावा किया गया है कि पश्चिमी देशों से निकाले गए रूसी एजेंट अब जापान में सक्रिय हैं और सैन्य उपयोग की तकनीक हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
जापान क्यों बना रूस के लिए अहम?
रिपोर्ट के अनुसार, जापान उन्नत इलेक्ट्रॉनिक और औद्योगिक तकनीक का बड़ा केंद्र है। रूस पर आरोप है कि वह इन्हीं तकनीकों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है, जिनका उपयोग सैन्य उपकरणों में किया जा सकता है।
पश्चिमी देशों से निकासी के बाद बदली रणनीति
यूक्रेन पर हमले के बाद यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कई देशों ने रूसी राजनयिकों और कथित खुफिया अधिकारियों को निष्कासित कर दिया था। इसके बाद रूस ने एशिया में अपने नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश शुरू की।
टोक्यो में सक्रिय होने का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी सैन्य खुफिया एजेंसी से जुड़े कुछ अधिकारी टोक्यो में कारोबारी या राजनयिक पहचान के जरिए काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य संवेदनशील तकनीक और उपकरणों तक पहुंच बनाना बताया गया है।
जापानी पुर्जों पर यूक्रेन का दावा
यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि रूस के कई मिसाइलों और ड्रोन में जापान में निर्मित पुर्जे पाए गए हैं। हालांकि ये पुर्जे आमतौर पर नागरिक उपयोग के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन उनका सैन्य इस्तेमाल भी संभव है।
जापान सरकार की प्रतिक्रिया
जापान सरकार का कहना है कि वह विदेशी जासूसी और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को गंभीरता से ले रही है। इसके लिए खुफिया तंत्र को मजबूत करने और नए सुरक्षा कानून लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्धों में तकनीक की भूमिका बढ़ने के साथ उन्नत तकनीकों की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में जापान समेत कई देशों को अपनी आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी निर्यात पर अधिक निगरानी रखनी पड़ सकती है।
रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा और खुफिया गतिविधियां किस स्तर तक पहुंच चुकी हैं।














