लखनऊ/उन्नाव: देश के सबसे महत्वपूर्ण सड़क संपर्क परियोजनाओं में शामिल लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन से ठीक पहले उस पर सियासी घमासान छिड़ गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि लगभग 4,700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार एक्सप्रेसवे उद्घाटन से पहले ही धंस गया है। उन्होंने इसे भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण का उदाहरण बताते हुए तीखा हमला बोला। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि एक्सप्रेसवे का कोई हिस्सा नहीं धंसा है और सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही तस्वीरें सड़क के किनारे की मिट्टी की हैं, जिनका मुख्य मार्ग की संरचनात्मक मजबूती से कोई संबंध नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने उद्घाटन से पहले ही बहुचर्चित परियोजना को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
उद्घाटन से पहले अखिलेश का बड़ा हमला
रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने लिखा कि “एक्सप्रेसवे इसलिए बनाए जाते हैं कि लोग बेफिक्र होकर तेज गति से सफर कर सकें, न कि पूरे रास्ते भगवान का नाम जपते रहें।”
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में हजारों करोड़ रुपये की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन होने से पहले ही उसका हिस्सा धंस गया। उन्होंने महाराष्ट्र की एक अन्य सड़क परियोजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकारों में करोड़ों की परियोजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं।
‘भ्रष्टाचार की प्रतियोगिता चल रही है क्या?’
सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कई सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि क्या भाजपा शासित राज्यों में महाभ्रष्टाचार की प्रतियोगिता चल रही है? क्या परियोजनाओं का डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता के बजाय ठेकेदारों के हितों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है?
अखिलेश ने दावा किया कि दो शहरों के बीच यात्रा में जितना समय लगेगा, उससे अधिक समय तो एक्सप्रेसवे से शहर में प्रवेश करने में लग जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की सुविधा से अधिक ठेकेदारों के लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे तो लोग तेज रफ्तार यात्रा से पहले कई बार सोचने को मजबूर होंगे। उनका कहना था कि “यदि गति सुरक्षित नहीं है तो उसका कोई अर्थ नहीं है।”
आज होना था भव्य उद्घाटन
सरकारी कार्यक्रम के अनुसार रविवार दोपहर उन्नाव में आयोजित समारोह में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया जाना था।
यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इसके शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने का दावा किया गया है। औद्योगिक, व्यावसायिक और यातायात की दृष्टि से भी इसे अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाजपा ने कहा— विकास से घबराया विपक्ष
अखिलेश यादव के आरोपों पर भाजपा ने भी कड़ा जवाब दिया।
भाजपा की उन्नाव जिला इकाई के अध्यक्ष अनुराग अवस्थी ने कहा कि विपक्ष विकास कार्यों को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए विपक्ष इस प्रकार के बयान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं किसी निर्माण कार्य में मामूली तकनीकी कमी भी होगी तो संबंधित एजेंसी तत्काल उसका समाधान करेगी। लेकिन उद्घाटन से पहले पूरे एक्सप्रेसवे को धंसा हुआ बताना दुर्भावनापूर्ण राजनीति है।
अवस्थी ने कहा कि जनता विकास कार्य देख रही है और विपक्ष के आरोपों से भ्रमित नहीं होगी।
एनएचएआई ने धंसने के दावे को किया खारिज
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने भी स्थिति स्पष्ट की।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने साफ कहा कि एक्सप्रेसवे का कोई हिस्सा नहीं धंसा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें मुख्य कैरिजवे की नहीं बल्कि सड़क किनारे की मिट्टी की हैं, जहां सामान्य रखरखाव का कार्य किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इससे एक्सप्रेसवे की संरचनात्मक मजबूती, गुणवत्ता अथवा यातायात सुरक्षा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
‘दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा’
परियोजना निदेशक ने कहा कि एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए 14 जुलाई सुबह आठ बजे से खोल दिया जाएगा। इसके बाद लोग स्वयं इसकी गुणवत्ता और स्थिति का आकलन कर सकेंगे।
उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि यदि उनके दावे गलत साबित होते हैं तो जनता स्वयं फैसला कर देगी। उनके अनुसार संबंधित हिस्से की मरम्मत पूरी कर दी गई है और उद्घाटन से पहले सभी आवश्यक तकनीकी कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं।
सुरक्षा और गुणवत्ता पर एनएचएआई का भरोसा
एनएचएआई ने दावा किया कि एक्सप्रेसवे पूरी तरह सुरक्षित है और निर्धारित सभी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नियमित निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण के बाद ही इसे यातायात के लिए खोला जा रहा है।
प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्माण के दौरान या बाद में यदि कहीं मिट्टी बैठने जैसी सामान्य तकनीकी स्थिति सामने आती है तो उसे तत्काल दुरुस्त किया जाता है और इसका मुख्य सड़क की मजबूती से सीधा संबंध नहीं होता।
सियासत बनाम विकास का नया मोर्चा
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन केवल एक आधारभूत संरचना परियोजना का शुभारंभ नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति का नया मुद्दा भी बन गया है। एक ओर समाजवादी पार्टी इसे भ्रष्टाचार और निर्माण गुणवत्ता का सवाल बना रही है, वहीं भाजपा इसे विकास विरोधी राजनीति करार दे रही है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि जनता के लिए एक्सप्रेसवे खुलने के बाद वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है। यदि यात्रा सुगम और सुरक्षित रहती है तो भाजपा अपने विकास मॉडल को मजबूती से पेश करेगी, जबकि किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी विपक्ष को सरकार पर हमले का नया अवसर दे सकती है।
फिलहाल उद्घाटन से पहले शुरू हुआ यह विवाद स्पष्ट संकेत दे रहा है कि उत्तर प्रदेश में विकास परियोजनाएं अब केवल निर्माण का विषय नहीं, बल्कि आगामी राजनीतिक संघर्ष का भी प्रमुख आधार बन चुकी हैं।














