लंदन। ब्रिटेन की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसी के साथ एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है—एंडी बर्नहम। ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर, लंबे समय तक सांसद रहे बर्नहम को अब ब्रिटेन का अगला प्रधानमंत्री बनने का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी के अधिकांश सांसदों का समर्थन मिलने के बाद उनकी दावेदारी लगभग निर्विरोध नजर आ रही है।
राजनीतिक गलियारों में उन्हें “किंग ऑफ द नॉर्थ” के नाम से जाना जाता है। कोविड महामारी के दौरान उत्तरी इंग्लैंड के लोगों के हितों के लिए उनकी मुखर आवाज ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई थी। लेकिन बर्नहम का सफर केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहा। फुटबॉल, क्रिकेट, पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए उन्होंने ब्रिटेन की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।
साधारण परिवार से राष्ट्रीय राजनीति तक
एंडी बर्नहम का जन्म 1970 में इंग्लैंड के लिवरपूल में हुआ था। उनका परिवार मध्यमवर्गीय था। उनके पिता दूरसंचार कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि उनकी मां एक मेडिकल क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। परिवार का राजनीतिक झुकाव लेबर पार्टी की ओर था और यही वजह रही कि बर्नहम को बचपन से ही सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में रुचि पैदा हो गई।
बताया जाता है कि किशोरावस्था में ही उन्होंने राजनीति को गंभीरता से समझना शुरू कर दिया था। स्कूल के दिनों में आयोजित एक मॉक इलेक्शन में उन्होंने लेबर पार्टी के उम्मीदवार के रूप में हिस्सा लिया और जीत हासिल की। यही वह दौर था जब उन्होंने सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने का सपना देखना शुरू किया।
फुटबॉल और क्रिकेट के जुनूनी
राजनीति के अलावा खेलों से भी उनका गहरा लगाव रहा है। बर्नहम इंग्लैंड के प्रसिद्ध फुटबॉल क्लब एवर्टन के कट्टर समर्थक रहे हैं। फुटबॉल के प्रति उनका प्रेम अक्सर सार्वजनिक मंचों पर भी दिखाई देता है।
कम ही लोग जानते हैं कि उन्होंने क्रिकेट भी खेला है। स्कूल के दिनों में वह लंकाशायर स्कूलबॉयज क्रिकेट टीम के लिए तेज गेंदबाज के रूप में खेलते थे। खेलों ने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, टीमवर्क और नेतृत्व की भावना विकसित की, जिसका फायदा उन्हें बाद में राजनीतिक जीवन में भी मिला।
कैम्ब्रिज से पढ़ाई, फिर पत्रकारिता में शुरुआत
एंडी बर्नहम अपने परिवार के उन पहले सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने प्रतिष्ठित कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने कई ट्रेड मैगजीन और प्रकाशनों के लिए काम किया। इस दौरान उन्होंने लेखन, शोध और जनसंपर्क जैसे कौशल विकसित किए।
हालांकि पत्रकारिता उनके करियर का अंतिम लक्ष्य नहीं थी। राजनीति के प्रति उनका झुकाव लगातार बढ़ रहा था और जल्द ही उन्हें सक्रिय राजनीति में प्रवेश का अवसर मिल गया।
राजनीति में एंट्री और तेज उभार
1990 के दशक में उन्होंने लेबर पार्टी के साथ काम करना शुरू किया। शुरुआत में वे सांसद टेसा जोवेल के शोध सहायक बने। यह अनुभव उनके राजनीतिक करियर की मजबूत नींव साबित हुआ।
साल 2001 में उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली जब वे ग्रेटर मैनचेस्टर के लेigh निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और बाद में गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वह संस्कृति मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और ट्रेजरी से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे। इन भूमिकाओं ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और उन्हें लेबर पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल कर दिया।
दो बार हार, लेकिन नहीं छोड़ी उम्मीद
लेबर पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में एंडी बर्नहम पहले भी दो बार उतर चुके हैं। 2010 में गॉर्डन ब्राउन के इस्तीफे के बाद उन्होंने पहली बार पार्टी नेतृत्व के लिए चुनाव लड़ा। हालांकि उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इसके बाद 2015 में उन्होंने फिर कोशिश की, लेकिन इस बार भी सफलता नहीं मिली। बावजूद इसके उन्होंने पार्टी के भीतर अपनी सक्रियता बनाए रखी और लगातार जमीनी राजनीति से जुड़े रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों हारों ने उन्हें और अधिक परिपक्व नेता बनाया। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन में अपनी क्षमता साबित करने पर ध्यान केंद्रित किया।
ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले मेयर
साल 2017 में एंडी बर्नहम ने सांसद पद से इस्तीफा देकर ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले निर्वाचित मेयर का चुनाव लड़ने का फैसला किया। यह उनके करियर का एक बड़ा जोखिम था, लेकिन यह फैसला सही साबित हुआ।
उन्होंने भारी बहुमत से चुनाव जीता और ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले मेयर बने। बाद में 2021 में वह और भी बड़े अंतर से दोबारा चुने गए।
मेयर के रूप में उन्होंने सार्वजनिक परिवहन, आवास, रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई कार्यक्रम शुरू किए। स्थानीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।














