नोएडा/ग्रेटर नोएडा: गौतम बुद्ध नगर में पिछले 24 घंटे से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। सड़कें पानी में डूब गईं, कई इलाकों में जलभराव हो गया और सुबह स्कूल खुलने के समय हजारों अभिभावकों तथा स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पूरी रात से लगातार बारिश हो रही थी और सुबह तक हालात सामान्य नहीं थे, तब जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने स्कूलों को लेकर समय रहते कोई निर्णय क्यों नहीं लिया?
सुबह का हर रास्ता बना मुसीबत, स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं
सुबह छह बजे के बाद जैसे ही स्कूलों का समय शुरू हुआ, नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अधिकांश सड़कों पर लंबा जाम लग गया। कई प्रमुख मार्गों पर वाहन रेंगते नजर आए। स्कूल बसें, वैन और निजी वाहन घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहे। कई जगह बच्चों को पानी से भरी सड़कों से होकर गुजरना पड़ा।
सबसे अधिक चिंता छोटे बच्चों को लेकर रही। जगह-जगह इतना पानी भरा था कि सड़क, गड्ढे और खुली नालियों में फर्क करना मुश्किल हो गया। अभिभावकों का कहना था कि हर कदम पर दुर्घटना का खतरा महसूस हो रहा था।
क्या प्रशासन पूरी रात सोता रहा?
लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन को पूरी रात हो रही बारिश दिखाई नहीं दी? क्या अधिकारियों ने सुबह होने से पहले शहर की स्थिति की समीक्षा नहीं की? यदि मौसम और जलभराव की जानकारी पहले से थी, तो फिर स्कूलों के संबंध में कोई स्पष्ट आदेश क्यों जारी नहीं किया गया?
अभिभावकों का कहना है कि यदि सुबह छह बजे से पहले अवकाश की घोषणा कर दी जाती, तो हजारों बच्चों और परिवारों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता था।
एक दिन की पढ़ाई ज्यादा जरूरी या बच्चों की सुरक्षा?
शिक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण बच्चों की सुरक्षा है। एक दिन की पढ़ाई दोबारा कराई जा सकती है, लेकिन किसी दुर्घटना या हादसे की भरपाई कभी संभव नहीं होती।
बारिश में भीगने से वायरल बुखार, डेंगू, सर्दी-जुकाम और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। वहीं जलभराव के कारण फिसलन, खुले मैनहोल और गहरे गड्ढे बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
स्कूलों के बाहर घंटों जाम, अभिभावकों में दिखी नाराजगी
सुबह शहर के कई निजी और सरकारी स्कूलों के बाहर लंबी वाहनों की कतारें देखने को मिलीं। अभिभावकों को बच्चों को छोड़ने और वापस लौटने में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक समय लगा।
कई अभिभावकों का कहना था कि यदि जिला प्रशासन का कोई अधिकारी सुबह कुछ देर स्कूलों के बाहर खड़ा होकर हालात देख लेता, तो शायद निर्णय लेने में इतनी देर नहीं होती।
हाई-टेक जिले में धीमा फैसला क्यों?
गौतम बुद्ध नगर को उत्तर प्रदेश का सबसे आधुनिक और हाई-टेक जिला कहा जाता है। यहां डिजिटल संचार के लगभग सभी माध्यम उपलब्ध हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर स्कूलों के संबंध में समय रहते निर्णय लेने में देरी क्यों हुई?
आज मोबाइल अलर्ट, सोशल मीडिया, जिला प्रशासन के आधिकारिक प्लेटफॉर्म और स्कूलों के डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक सूचना पहुंचाई जा सकती है। इसके बावजूद सुबह तक कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
हादसे के बाद नहीं, पहले जागना होगा प्रशासन को
अक्सर देखा गया है कि किसी बड़ी घटना के बाद प्रशासन सक्रिय होता है। लेकिन संवेदनशील प्रशासन वही होता है जो संभावित खतरे को पहले पहचानकर समय रहते निर्णय ले।
यदि पूरी रात से लगातार बारिश हो रही थी, जलभराव की सूचना मिल रही थी और ट्रैफिक प्रभावित था, तो स्कूलों को लेकर एहतियाती निर्णय लेना असंभव नहीं था।
जिम्मेदारी केवल मौसम की नहीं, व्यवस्था की भी है
बारिश प्राकृतिक आपदा हो सकती है, लेकिन उसके प्रभाव को कम करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त रखना, खुले मैनहोल को सुरक्षित करना, जलभराव वाले क्षेत्रों में पंप लगाना और स्कूल मार्गों पर विशेष निगरानी रखना प्रशासनिक दायित्व का हिस्सा है।
यदि इन व्यवस्थाओं में कमी रहती है, तो सबसे अधिक परेशानी आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है।
भविष्य के लिए क्या हो व्यवस्था?
विशेषज्ञों का मानना है कि जिला प्रशासन को मानसून के दौरान एक स्पष्ट ‘रेन इमरजेंसी स्कूल प्रोटोकॉल’ तैयार करना चाहिए। यदि लगातार भारी बारिश, जलभराव और मौसम विभाग की चेतावनी एक साथ मौजूद हों, तो सुबह होने से पहले समीक्षा कर स्कूलों पर निर्णय लिया जाए।
साथ ही स्कूल प्रबंधन, ट्रैफिक पुलिस और नगर निकाय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।
अब जवाब का इंतजार
फिलहाल स्कूलों में अवकाश को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई, लेकिन आज सुबह की अव्यवस्था ने हजारों परिवारों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या प्रशासन हालात का सही आकलन कर पाया था?
गौतम बुद्ध नगर के अभिभावकों की मांग स्पष्ट है—बच्चों की सुरक्षा किसी भी प्रशासनिक औपचारिकता से बड़ी है। यदि मौसम लगातार खराब हो, सड़कें जलमग्न हों और दुर्घटना का खतरा बना हो, तो समय रहते निर्णय लेना प्रशासन की जिम्मेदारी है, न कि हादसे का इंतजार करना।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—क्या अगली बार भी अभिभावकों और बच्चों को ऐसी ही परीक्षा से गुजरना पड़ेगा, या प्रशासन समय रहते जागेगा?














