गाजीपुर। अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर विकास खंड सदर के ब्लॉक सभागार में सहायक श्रम आयुक्त के तत्वावधान में बाल श्रम उन्मूलन, बच्चों के शिक्षा एवं संरक्षण के अधिकार तथा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम विषयक जन-जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सहायक श्रम आयुक्त अभिषेक सिंह ने अधिकारियों, उद्योग प्रतिनिधियों, व्यापारिक एवं श्रमिक संगठनों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का स्वागत कर किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि बाल श्रम समाज के विकास में बड़ी बाधा है और प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा तथा सम्मानजनक बचपन उपलब्ध कराना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बाल श्रम कानून, किशोर न्याय अधिनियम और शिक्षा के अधिकार से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए विभिन्न विभागों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यशाला में विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान, उनके पुनर्वास, बाल श्रमिकों के बचाव एवं पुनर्स्थापन तथा जन-जागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया।
सहायक श्रम आयुक्त ने बताया कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी व्यवसाय, दुकान या फैक्ट्री में कार्य कराना प्रतिबंधित है, जबकि 14 से 18 वर्ष के किशोरों को जोखिमपूर्ण कार्यों में लगाना दंडनीय अपराध है। इसके लिए 6 माह से 2 वर्ष तक की सजा तथा 20 हजार से 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
कार्यक्रम के बाद श्रम विभाग और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की संयुक्त टीम ने हॉट-स्पॉट क्षेत्रों में जांच अभियान चलाया। इस दौरान दो प्रतिष्ठानों पर चार किशोर श्रमिक चिन्हित किए गए और संबंधित प्रतिष्ठानों को निरीक्षण टिप्पणी जारी की गई। साथ ही बाजारों में जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया।














