भोपाल में शिक्षा जगत को हिलाकर रख देने वाला एक सनसनीखेज आपराधिक मामला सामने आया है। राजधानी के बागसेवनिया इलाके में देश की चर्चित यूपीएससी कोचिंग संचालिका शुभ्रा रंजन का अपहरण कर उन्हें बंधक बनाकर 1 करोड़ 89 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाने की वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हाई-प्रोफाइल केस में पुलिस ने अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता प्रियंक शर्मा सहित पूरे गिरोह की परतें खुल रही हैं।
पूर्व छात्र ने रचा गुरु को फंसाने का जाल
पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे कांड का मास्टरमाइंड प्रियंक शर्मा वही शख्स है, जो कभी शुभ्रा रंजन के कोचिंग संस्थान में छात्र रह चुका था और बाद में भोपाल में संस्थान की फ्रेंचाइजी चला रहा था। लंबे समय से आर्थिक लेन-देन और कारोबारी हिस्सेदारी को लेकर दोनों के बीच तनाव बना हुआ था। इसी विवाद को खत्म करने के लिए प्रियंक ने अपराध का खतरनाक रास्ता चुना। उसने नई ब्रांच खोलने, बड़े सेमिनार और निवेश विस्तार का झांसा देकर शुभ्रा रंजन को दिल्ली से भोपाल बुलाया।
फाइव स्टार होटल से फ्लैट तक… और फिर शुरू हुआ खौफनाक खेल
बताया गया है कि शुभ्रा रंजन भोपाल पहुंचने के बाद शहर के एक पांच सितारा होटल में ठहरी थीं। बुधवार दोपहर प्रियंक शर्मा स्वयं उन्हें लेने पहुंचा और बिजनेस मीटिंग का हवाला देकर बागसेवनिया स्थित किराए के फ्लैट में ले गया। लेकिन जैसे ही वे फ्लैट में दाखिल हुईं, वहां पहले से मौजूद नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। हथियारों से लैस आरोपियों ने शुभ्रा रंजन और उनके साथ मौजूद सहयोगियों को जान से मारने की धमकी दी और मोबाइल, दस्तावेज व बैंकिंग एक्सेस अपने कब्जे में ले लिया।
दो दिन तक बंधक, पिस्टल कनपटी पर रखकर कराए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन
क्राइम ब्रांच के अनुसार आरोपियों ने शुभ्रा रंजन को लगभग दो दिन तक फ्लैट में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उन पर लगातार मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया गया। पिस्टल की नोक पर उनसे अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.89 करोड़ रुपये ट्रांसफर कराए गए। रकम ‘जनकशिला सोसायटी’ और ‘आरएस एंटरप्राइजेज’ जैसे खातों में भेजी गई। इतना ही नहीं, बदमाशों ने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया ताकि बाद में शिकायत करने पर उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके।
चीख दबाने के लिए फ्लैट में कराया सुंदरकांड पाठ
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपियों ने फ्लैट में सुंदरकांड पाठ का आयोजन कराया ताकि अगर पीड़िता मदद के लिए चीखे-चिल्लाए भी तो आवाज बाहर न जाए और आसपास के लोगों को किसी वारदात की भनक न लगे। पुलिस का मानना है कि यह पूरी योजना बेहद सुनियोजित थी और कई दिन पहले से इसकी तैयारी की गई थी। किराए का फ्लैट, फर्जी खाते, हथियार और सहयोगियों की तैनाती—सबकुछ पहले से तय था।
शिकायत मिलते ही हरकत में आई क्राइम ब्रांच, रकम कराई होल्ड
बंधक से छूटने के बाद शुभ्रा रंजन ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने तकनीकी साक्ष्यों, बैंक ट्रेल और मोबाइल लोकेशन के आधार पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। मुख्य आरोपी प्रियंक शर्मा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अस्पताल में भर्ती होकर बीमारी का बहाना भी बनाया, लेकिन पुलिस ने उसे वहीं से दबोच लिया। कुल 6 आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और ट्रांसफर की गई पूरी रकम बैंकिंग सिस्टम के जरिए होल्ड करवा दी गई है। पुलिस का दावा है कि राशि पीड़िता को वापस दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
फरार आरोपियों की तलाश, लेन-देन विवाद की भी जांच
जांच एजेंसियों को शक है कि यह केवल फिरौती या लूट की वारदात नहीं, बल्कि पुराने कारोबारी विवाद का हिंसक रूप है। पुलिस अब प्रियंक शर्मा और शुभ्रा रंजन के बीच हुए वित्तीय समझौतों, फ्रेंचाइजी निवेश, कमीशन और देनदारी के दस्तावेज खंगाल रही है। साथ ही दो अन्य संदिग्धों की तलाश में दबिश जारी है। बरामद पिस्टल, बैंक खातों का नेटवर्क और रिकॉर्ड किए गए वीडियो से पूरे षड्यंत्र की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
शिक्षा जगत में दहशत, सोशल मीडिया पर भी उबाल
देशभर के यूपीएससी अभ्यर्थियों के बीच यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर छात्र इस घटना को लेकर हैरानी, आक्रोश और अविश्वास जता रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे “गुरु-शिष्य विश्वासघात” और “कोचिंग इंडस्ट्री का सबसे सनसनीखेज क्राइम” बताया।
भोपाल का यह मामला सिर्फ अपहरण और वसूली का नहीं, बल्कि विश्वास, व्यवसाय और अपराध के खतरनाक गठजोड़ का उदाहरण बन गया है। जिस छात्र को कभी करियर बनाने की राह दिखाई गई, उसी ने अपने पूर्व संस्थान की संचालिका को बंदूक की नोक पर करोड़ों रुपये लूट लिए। अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि पुलिस इस साजिश की आखिरी कड़ी तक कब पहुंचती है।














