जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम जो हुआ, उसने पूरे देश को भीतर तक झकझोर दिया। खुशियों से भरी एक पर्यटन यात्रा कुछ ही मिनटों में मातम में बदल गई, जब अचानक बदले मौसम, 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं और ऊंची उठती लहरों ने पर्यटकों से भरी क्रूज बोट को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते बोट अनियंत्रित हुई, पलटी और गहरे पानी में समा गई। इस भयावह हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य को रेस्क्यू टीमों ने बाहर निकाला। राहत और बचाव अभियान पूरी रात चला।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, असावधानी और सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलने वाला दर्दनाक सच बनकर सामने आया है। जानकारी के मुताबिक क्रूज में लगभग 30 से अधिक पर्यटक सवार थे, जो बरगी डैम की खूबसूरती का आनंद ले रहे थे। मौसम अचानक बिगड़ा, हवाओं ने विकराल रूप लिया, पानी में तेज उफान आया और यात्रियों ने बोट वापस किनारे ले जाने की गुहार लगाई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चालक तक यात्रियों की चीखें साफ नहीं पहुंच सकीं और बोट लहरों के थपेड़ों में बहकर पलट गई।
मां की आखिरी पकड़ ने रुला दिया पूरा देश
राहत अभियान के दौरान जो दृश्य सामने आया, उसने पत्थर दिल लोगों की आंखें भी नम कर दीं। गोताखोरों ने पानी से एक महिला और उसके मासूम बच्चे का शव बरामद किया—दोनों एक-दूसरे से कसकर लिपटे हुए थे। मां ने अपने बच्चे को सीने से इस तरह भींच रखा था मानो वह मौत से भी उसे बचाने की आखिरी कोशिश कर रही हो। यह दृश्य वहां मौजूद जवानों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों को सुन्न कर गया। सोशल मीडिया पर भी इस अंतिम आलिंगन की चर्चा ने लोगों को भावुक कर दिया है।
बरगी क्रूज त्रासदी का खौफनाक वीडियो: पानी भरता रहा, लोग चीखते रहे, लाइफ जैकेट तब खुलीं जब मौत सामने खड़ी थी…#Jabalpur #bargi #madhyapradesh pic.twitter.com/7Q9FvXA3bJ
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क्या हादसा टल सकता था? उठ रहे कई बड़े सवाल
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह त्रासदी रोकी जा सकती थी? प्रारंभिक रिपोर्टों में सामने आया है कि अधिकांश पर्यटकों ने पहले से लाइफ जैकेट नहीं पहन रखी थी। कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब बोट डूबने लगी, तब यात्रियों को लाइफ जैकेट थमाई गई। यदि यह सच है तो यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि सीधी आपराधिक लापरवाही मानी जाएगी। मौसम विभाग के अलर्ट, तेज हवा की आशंका और डैम में उठती लहरों के बावजूद क्रूज को संचालन की अनुमति क्यों दी गई—यह सवाल अब प्रशासन और पर्यटन विभाग के सामने खड़ा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन में रातभर जूझती रहीं टीमें
हादसे के बाद SDRF, NDRF, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और गोताखोरों की संयुक्त टीमों ने मोर्चा संभाला। अंधेरा, तेज हवा और कम दृश्यता के बीच घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कई यात्रियों को स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से बाहर निकाला, जबकि कई लोग लंबे समय तक पानी में फंसे रहे। कुछ शव क्रूज के भीतर फंसे होने की भी आशंका जताई गई, जिसके चलते क्रेन की मदद से डूबी बोट को बाहर निकालने की कोशिश की गई। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में शुक्रवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 9 तक पहुंच गई है, जबकि राहत और बचाव कार्य के दौरान 22 पर्यटकों को जिंदा बचा लिया गया है. दावा किया जा रहा है कि पानी में डूबते लोगों को बचाने में इजरायल मूल की एक महिला… pic.twitter.com/QpbTOAzKBL
— NDTV MP Chhattisgarh (@NDTVMPCG) May 1, 2026
खुशियों का सफर कैसे बना चीखों का मंजर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे से कुछ मिनट पहले तक पर्यटक हंसी-मजाक, फोटो और वीडियो बनाने में व्यस्त थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल सबकुछ खत्म हो जाएगा। हवा पहले सुहानी लगी, फिर अचानक तूफानी हो गई। बोट झूलने लगी, बच्चे रोने लगे, महिलाएं चीखने लगीं, लोग एक-दूसरे को पकड़कर बचने की कोशिश करने लगे—लेकिन पानी का कहर सब पर भारी पड़ गया। कुछ यात्रियों ने तैरकर जान बचाई, तो कई लोग बोट के नीचे या गहरे पानी में फंस गए।
शोक से ज्यादा जवाबदेही की मांग
बरगी डैम हादसा सिर्फ संवेदना व्यक्त कर भूल जाने वाली खबर नहीं है। यह देश में पर्यटन सुरक्षा मानकों की भयावह सच्चाई को उजागर करता है। क्या हर क्रूज पर अनिवार्य सुरक्षा जांच होती है? क्या मौसम की निगरानी के बाद ही बोट को रवाना किया जाता है? क्या लाइफ जैकेट पहनाना सिर्फ औपचारिकता है? इन सवालों का जवाब अब प्रशासन को देना होगा। क्योंकि जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक समाचार नहीं—जीवनभर का न भरने वाला घाव है।
बरगी डैम आज भी पूछ रहा है—कौन जिम्मेदार?
मध्य प्रदेश सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन बरगी डैम की लहरों में समाई उन मासूम चीखों का हिसाब क्या सिर्फ जांच से पूरा हो जाएगा? एक मां की अंतिम ममता, बच्चों की डरी आंखें और मदद के लिए उठते हाथ यह याद दिलाते रहेंगे कि लापरवाही जब व्यवस्था बन जाती है, तब हादसे नियति नहीं—हत्या बन जाते हैं।














