Sunday, April 5, 2026
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ईस्टर पर मोदी और पोप लियो XIV का शांति-संदेश: आशा, एकता और भय-मनमुटाव से मुक्ति की अपील

ईस्टर के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पोप लियो XIV ने अलग-अलग संदेशों में शांति, आशा, करुणा और सामाजिक एकता का आह्वान किया। दोनों नेताओं की बातों में एक साझा भाव स्पष्ट दिखा—मनुष्य को डर, अविश्वास, स्वार्थ और मनमुटाव जैसे बोझों से ऊपर उठकर बेहतर, शांतिपूर्ण और एकजुट समाज की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईस्टर के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व आशा और नवजीवन का उत्सव है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में शांति, आनंद और एकता की कामना की। पीएम मोदी ने इस अवसर पर ईसा मसीह की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उनके उपदेश दया-भाव को प्रेरित करें और समाजिक एकता को मजबूत बनाएं। उनके संदेश का स्वर सकारात्मक, समावेशी और सद्भावना से भरा रहा।

दूसरी ओर, वेटिकन में सेंट पीटर बेसिलिका में आयोजित ईस्टर विजिल मास की अध्यक्षता करते हुए पोप लियो XIV ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि डर, अविश्वास और मनमुटाव जैसे बोझ इंसानी दिल पर भारी पड़ते हैं और ये न केवल व्यक्तियों को, बल्कि लोगों और देशों को भी बांट सकते हैं। पोप ने अपील की कि लोग इन आंतरिक और बाहरी बोझों से पंगु न बनें।

अपने संदेश में पोप लियो ने कहा कि आज भी दुनिया में ऐसी “कब्रें” मौजूद हैं जिन्हें खोलना बाकी है। उन्होंने प्रतीकात्मक भाषा में यह भी कहा कि कई बार उन कब्रों को ढकने वाले पत्थर इतने भारी और निगरानी में होते हैं कि वे अपनी जगह से हिलते नहीं लगते। उनका आशय था कि युद्ध, अन्याय, अलगाव और भय जैसी स्थितियाँ मानवता की प्रगति में बाधा बनती हैं।

पोप ने विशेष रूप से यह बताया कि अविश्वास, डर, स्वार्थ और मनमुटाव जैसे भाव न केवल व्यक्ति के भीतर तनाव पैदा करते हैं, बल्कि उनसे उपजे संघर्ष सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को भी कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध और अन्याय के कारण लोग और देश एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं, इसलिए इन बाधाओं से उबरना समय की जरूरत है।

ईस्टर, जो ईसाई धर्म के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक माना जाता है, दुनिया भर में यीशु मसीह के पुनरुत्थान की स्मृति में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं, धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक आराधनाएं आयोजित की जा रही हैं। ईसाई विश्वास के अनुसार, यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाए जाने के बाद तीसरे दिन पुनर्जीवित हुए थे, और ईस्टर उसी विजय, आशा और नए जीवन का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी और पोप लियो XIV के संदेश इस बात को रेखांकित करते हैं कि धार्मिक पर्व केवल आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, करुणा, एकता और शांति को मजबूत करने का अवसर भी हैं।

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