नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून (भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए) से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए कहा है कि यदि आरोपी को कोई आपत्ति नहीं है, तो ऐसे मामलों में सुनवाई, अपील या अन्य न्यायिक कार्यवाही जारी रखी जा सकती है। अदालत ने साफ किया कि मई 2022 में दिए गए अंतरिम आदेश का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह रोकना नहीं था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने यह आदेश एक ऐसे आरोपी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया, जो करीब 17 वर्षों से जेल में बंद है और जिसकी आपराधिक अपील मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 11 मई 2022 को एसजी वोम्बटकेरे मामले में दिए गए अंतरिम आदेश के तहत राजद्रोह कानून (IPC धारा 124ए) पर रोक का अर्थ यह नहीं है कि हर परिस्थिति में सभी मामलों की सुनवाई पूरी तरह बंद रहेगी। यदि आरोपी स्वयं कार्यवाही जारी रखने के पक्ष में है, तो अदालतें कानून और मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता कामरान को सत्र न्यायालय ने 27 फरवरी 2017 के फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 122, 124ए (राजद्रोह), 153ए के साथ यूएपीए और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। उसे सह-आरोपियों सहित आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
इसके बाद उसने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में आपराधिक अपील दायर की। हालांकि राजद्रोह कानून से जुड़े मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के 2022 के अंतरिम आदेश के कारण हाई कोर्ट में उसकी अपील लंबित रही।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यदि उसकी आपराधिक अपील पर पूरी सुनवाई की जाती है, जिसमें IPC की धारा 124ए के आरोप भी शामिल हों, तो उसे इस पर कोई आपत्ति नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां आरोपी को मुकदमे, अपील या अन्य न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई आपत्ति नहीं है, वहां अदालतों के समक्ष मामले की सुनवाई करने और कानून के अनुसार फैसला देने में कोई बाधा नहीं होगी।
कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से भी अनुरोध किया कि वह याचिकाकर्ता की लंबित अपील और उससे जुड़े मामलों पर विचार कर गुण-दोष के आधार पर निर्णय ले।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के तथ्यों या दोषसिद्धि पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
लंबित मामलों को मिल सकती है राहत
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस स्पष्टीकरण से देशभर में लंबित उन मामलों को राहत मिल सकती है, जिनमें राजद्रोह की धारा के कारण सुनवाई प्रभावित हो रही थी।
यह फैसला विशेष रूप से उन आरोपियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं।














