कश्मीर में हाल ही में हुई मुठभेड़ को लेकर Mirwaiz Umar Farooq ने गहरी चिंता और दुख जताया है। श्रीनगर की Jamia Masjid Srinagar में नमाज के दौरान उन्होंने गांदरबल के निवासी राशिद अहमद मुगल की मुठभेड़ में हुई मौत का जिक्र करते हुए इसे बेहद पीड़ादायक बताया और कहा कि इस घटना ने पुराने दर्दनाक दौर की यादें ताजा कर दी हैं।
रमजान के बाद मस्जिद में नमाज की इजाजत मिलने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए मीरवाइज ने कहा कि मृतक के परिवार का दावा है कि राशिद अहमद मुगल एक पार्ट-टाइम कंप्यूटर ऑपरेटर थे और उनका आतंकवाद से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि परिवार का आरोप है कि राशिद को बैठाकर बेरहमी से मार दिया गया।
निष्पक्ष जांच की उठी मांग
मीरवाइज ने कहा कि राशिद के परिवार ने उनकी मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिल सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मामले में सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि खबर मिली है कि Manoj Sinha ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि इस बार जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को सजा मिलेगी।
शव परिवार को न सौंपने पर जताई आपत्ति
मीरवाइज उमर फारूक ने यह भी कहा कि मृतक का शव परिवार को दफनाने के लिए वापस न देना बेहद अमानवीय है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।
जामिया मस्जिद में पाबंदियों पर भी उठाए सवाल
अपने संबोधन में उन्होंने जामिया मस्जिद को बार-बार बंद किए जाने को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि कश्मीर के मुसलमानों को इस प्रमुख इबादतगाह तक पहुंचने से कई बार रोका जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईद की नमाज की इजाजत नहीं दी गई और रमजान के दौरान भी कई जुमे की नमाज नहीं हो सकी।
मीरवाइज ने कहा कि ऐसी पाबंदियां सिर्फ मस्जिद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हालात बताते हैं कि प्रतिबंधों और सेंसरशिप के जरिए लोगों के मौलिक अधिकारों को दबाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में विभिन्न एजेंसियां लगातार कश्मीरियों के खिलाफ मामले दर्ज कर रही हैं और गिरफ्तारियां कर रही हैं।
इस बयान के बाद गांदरबल मुठभेड़ और उससे जुड़े आरोप-प्रत्यारोप को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।














