अदालत ने कहा — आरोप पहली नज़र में संज्ञेय हैं; पुलिस को पूरी जांच करने का अधिकार।
लखनऊ, 6 दिसंबर 2025 — भोजपुरी लोकगायिका और यूट्यूबर नेहा सिंह राठौर की अग्रिम जमानत याचिका को आज इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया। एकल न्यायाधीश न्यायमूर्ति बृज राज सिंह ने आदेश में कहा कि नेहा के खिलाफ जो आरोप हैं वे पहली नजर में संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं और पुलिस को निष्पक्ष, पूरी तरह से जांच करने का अधिकार है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि विवादित पोस्ट पहलगाम आतंकी हमले के तुरंत बाद आई थी, जो समय की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
कोर्ट के तर्क और पुलिस रिपोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में यह भी तात्कालिक रूप से नोट किया कि अभियुक्त ने जांच में पर्याप्त सहयोग नहीं किया तथा पहले से जारी निर्देशों का पालन नहीं किया गया — यही कारण बताया गया कि अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा। सरकारी वकील डॉ. वी.के. सिंह ने अदालत को बताया कि समन देने के बावजूद नेहा जांच में सहयोग नहीं कर रही हैं।
कौन-सा पोस्ट विवाद बन गया?
प्रकरण का आधार 23 अप्रैल 2025 का एक सोशल-मीडिया पोस्ट है, जिसमें नेहा ने कहा था कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिहार दौरा पाकिस्तान को संदेश देने और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट बटोरने के उद्देश्य से था, और आरोप लगाया कि सरकार युद्ध की ओर देश को धकेल रही है। इन टिप्पणीओं को प्रधानमंत्री का अपमान और देश में नफरत फैलाने वाला बताया गया और हजरतगंज पुलिस स्टेशन, लखनऊ में 27 अप्रैल 2025 को FIR दर्ज की गई।
कानूनी पृष्ठभूमि और पहले के कदम
नेहा पहले भी इसी FIR को रद्द कराए जाने का प्रयास कर चुकी हैं; 19 सितंबर 2025 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उनका वह अनुरोध खारिज कर दिया था और कहा था कि आरोप गंभीर हैं तथा जाँच की आवश्यकता है — याचिकाकर्ता को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था। अब अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद गिरफ्तारी का जोखिम बढ़ गया है और उनका बचाव यह है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला है। उनकी ओर से कहा जा रहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही हैं।
प्रभाव और बहस
यह मामला आज फिर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा/मान-सम्मान के बीच चलती संवेदनशील बहस को उजागर करता है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील समय में की गई टिप्पणियाँ सामूहिक शांति और सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकती हैं, जबकि समर्थक यह तर्क देते हैं कि आलोचना को दंडित करने से लोकतांत्रिक बहस दबेगी। अदालत ने फिलहाल जांच को प्राथमिकता दी है और कहा गया है कि मुकदमे की प्रकृति गंभीर है — इसलिए पुलिस को तथ्यों की गहन जाँच करने दिया जाएगा।
आगे क्या होने की संभावना है
अगला मुक़ाम सुप्रीम कोर्ट हो सकता है, जहाँ नेहा के वकील आजीवन निर्देशों और जमानत की वैधानिक सीमा पर पुनर्विचार कराने की कोशिश कर सकते हैं। वहीं पुलिस आगे की जांच जारी रखेगी और यदि आवश्यक समझा गया तो गिरफ्तारी की कार्यवाही की जा सकती है।














