नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने आध्यात्मिक और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए स्थापित Spiritual Regeneration Movement Foundation of India (महर्षि महेश योगी संस्थान) की संपत्तियों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त पर कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने संस्थान से जुड़े श्रीकांत ओझा द्वारा दायर अपील स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया है। यह SIT संस्थान की जमीनों के अनधिकृत हस्तांतरण, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और विवादित बिक्री सौदों की गहन जांच करेगी।
मुख्य सचिव की निगरानी में होगी जांच
जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की पीठ ने निर्देश दिया कि जांच टीम में Registrar of Societies को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि संस्थागत रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके।
अदालत ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय निगरानी आवश्यक है, क्योंकि कई राज्यों में इससे जुड़े आपराधिक मुकदमे पहले से लंबित हैं।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने Allahabad High Court के उस अंतरिम आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193(3) के तहत जांच रिपोर्ट दाखिल करने से रोका गया था।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आपराधिक जांच में इस तरह की रोक न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
कोर्ट ने जांच अधिकारी को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, साथ ही आरोपी पक्षों को जांच में पूर्ण सहयोग देने को कहा।
तीन महीने में फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने SIT को तीन महीने के भीतर अपनी विस्तृत फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में संस्थान की जमीनों से जुड़े आपराधिक मामले दर्ज हैं, इसके बावजूद संपत्तियों की कथित बिक्री और हस्तांतरण जारी हैं, जो बेहद गंभीर चिंता का विषय है।
कोर्ट ने साफ कहा कि यदि जांच में धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा या आपराधिक मंशा (Mens Rea) सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
“महर्षि महेश योगी ने ऐसा कभी नहीं चाहा होगा”
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि Maharishi Mahesh Yogi ने अपने संस्थान की स्थापना आध्यात्मिक उत्थान और सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से की थी।
अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज वही संपत्तियां विवादों, अवैध कब्जों और कथित फर्जीवाड़े के आरोपों में घिर गई हैं।
कई राज्यों में फैला है मामला
जानकारी के मुताबिक, संस्थान की संपत्तियां उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में फैली हुई हैं। आरोप है कि वर्षों से इन जमीनों की अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त की जा रही थी और कई मामलों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट के सीधे हस्तक्षेप और SIT जांच के आदेश के बाद इस पूरे मामले में बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।














