“तकनीकी खामी ने उड़ान से पहले बढ़ाई मुश्किलें, यात्रियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल”
नई दिल्ली: देश की प्रमुख निजी एयरलाइनों में शामिल स्पाइसजेट एक बार फिर सुर्खियों में है। दिल्ली से पुणे जाने वाली स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-105 में टेकऑफ से पहले एयर कंडीशनिंग सिस्टम फेल हो जाने के कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान के अंदर करीब 40 से 45 मिनट तक घुटन भरा माहौल बना रहा, जिससे यात्री पसीने से तर-बतर हो गए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की हालत बिगड़ने लगी। स्थिति इतनी खराब हो गई कि यात्रियों ने विमान के अंदर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और गेट खोलने की मांग करने लगे।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद एयरलाइन की कार्यप्रणाली और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। मामले ने तूल पकड़ने के बाद स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने सफाई देते हुए कहा कि उड़ान से ठीक पहले विमान में तकनीकी समस्या आ गई थी, जिसके बाद तत्काल दूसरा विमान उपलब्ध कराया गया और यात्रियों को पुणे रवाना किया गया।
रात की उड़ान बनी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण
जानकारी के अनुसार, स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-105 को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से रात करीब 9:30 बजे पुणे के लिए रवाना होना था। हालांकि, उड़ान पहले से ही देरी का शिकार थी। यात्रियों का कहना है कि विमान में बोर्डिंग पूरी होने के बाद भी एयर कंडीशनिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा था।
शुरुआत में लोगों को लगा कि टेकऑफ के बाद स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, विमान के अंदर का तापमान बढ़ता चला गया। बंद केबिन में हवा का प्रवाह न होने के कारण घुटन बढ़ने लगी। यात्रियों के अनुसार, करीब 40 से 45 मिनट तक उन्हें इसी स्थिति में बैठाए रखा गया।
पसीने से तर-बतर हुए यात्री, बच्चों और बुजुर्गों की बिगड़ी हालत
विमान के अंदर मौजूद यात्रियों ने बताया कि गर्मी और उमस के कारण स्थिति बेहद असहज हो गई थी। कई यात्रियों के कपड़े पूरी तरह पसीने से भीग गए। छोटे बच्चों को सांस लेने में परेशानी होने लगी, जबकि कुछ बुजुर्ग यात्रियों ने चक्कर आने और बेचैनी की शिकायत की।
एक यात्री के अनुसार, “ऐसा लग रहा था जैसे हम किसी बंद कमरे में फंस गए हों। एयर कंडीशनर बंद था और लगातार गर्मी बढ़ती जा रही थी। कई बच्चे रोने लगे थे और महिलाएं परेशान हो गई थीं।”
कुछ यात्रियों का दावा है कि गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत हुई। गर्मी और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। यात्रियों ने इसे बेहद खतरनाक स्थिति बताया।
शिकायतों के बावजूद नहीं मिला तत्काल समाधान
यात्रियों का आरोप है कि उन्होंने बार-बार क्रू मेंबर्स को AC बंद होने की जानकारी दी, लेकिन लंबे समय तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस दौरान विमान रनवे की ओर बढ़ता रहा।
यात्रियों का कहना है कि जब उन्हें लगा कि उनकी परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तब उन्होंने सामूहिक रूप से विरोध शुरू कर दिया। कई यात्री अपनी सीटों से खड़े हो गए और विमान का दरवाजा खोलने की मांग करने लगे।
कुछ यात्रियों ने मोबाइल फोन से वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया, जिसमें लोग हाथों से हवा करते और गर्मी की शिकायत करते दिखाई दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें यात्री विमान के अंदर की स्थिति दिखाते नजर आए। वीडियो में लोग पसीने से लथपथ दिखाई दे रहे हैं। कुछ यात्री एयरलाइन के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग बच्चों की परेशानी को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर एयरलाइन की आलोचना शुरू हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि यदि विमान में तकनीकी समस्या थी तो यात्रियों को इतनी देर तक अंदर क्यों बैठाए रखा गया। कुछ यूजर्स ने इसे यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बताया।
एयरलाइन ने जारी किया आधिकारिक बयान
मामले ने सुर्खियां बटोरने के बाद स्पाइसजेट के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी किया। प्रवक्ता ने कहा कि 11 अगस्त 2026 को दिल्ली से पुणे जाने वाली फ्लाइट SG-105 में उड़ान से ठीक पहले तकनीकी समस्या सामने आई थी।
उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा एयरलाइन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जैसे ही तकनीकी खामी की जानकारी मिली, इंजीनियरिंग टीम ने विमान का निरीक्षण किया। समस्या को देखते हुए तुरंत दूसरा विमान उपलब्ध कराया गया, ताकि यात्रियों को सुरक्षित तरीके से उनके गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा के लिए खेद भी व्यक्त किया और कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
विमानन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश में विमानन सुरक्षा और तकनीकी रखरखाव को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। हाल के वर्षों में कई एयरलाइनों की उड़ानों में तकनीकी खराबी, देरी और आपातकालीन लैंडिंग जैसी घटनाएं सामने आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विमान में एयर कंडीशनिंग सिस्टम केवल यात्रियों की सुविधा के लिए ही नहीं बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होता है। यदि लंबे समय तक केबिन में वेंटिलेशन प्रभावित रहे तो यात्रियों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में एयरलाइन को यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो उन्हें विमान से बाहर निकालना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति से बचा जा सके।
यात्रियों ने मांगी जवाबदेही
घटना के बाद कई यात्रियों ने एयरलाइन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि तकनीकी खामी होना अलग बात है, लेकिन यात्रियों को लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियों में रखना स्वीकार्य नहीं है।
यात्रियों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इतनी परेशानी नहीं होती। कई लोगों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से भी मामले की जांच कराने की मांग की है।
भरोसे और सुरक्षा की परीक्षा
दिल्ली से पुणे जा रही स्पाइसजेट फ्लाइट SG-105 की यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि विमानन क्षेत्र में तकनीकी दक्षता के साथ-साथ यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता भी उतनी ही जरूरी है। एयरलाइन ने भले ही दूसरा विमान उपलब्ध कराकर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचा दिया हो, लेकिन विमान के अंदर बिताए गए वे 45 मिनट यात्रियों के लिए बेहद तनावपूर्ण और असहज रहे।
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि एयरलाइन इस घटना से क्या सबक लेती है और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए कौन से ठोस कदम उठाती है। क्योंकि हवाई यात्रा में यात्रियों का भरोसा ही सबसे बड़ी पूंजी होता है और उसकी रक्षा करना हर एयरलाइन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।














