पटना: बिहार की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के नेता सम्राट चौधरी ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पटना स्थित लोक भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला। यह बिहार के राजनीतिक इतिहास में पहली बार है, जब भाजपा से कोई नेता राज्य की कमान संभाल रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बने इस नए सत्ता समीकरण को राज्य की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक उत्साह और भारी जनसमर्थन का माहौल देखने को मिला। राज्य के कई वरिष्ठ नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और NDA घटक दलों के प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने इस अवसर को और खास बना दिया। मंच पर भाजपा, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के कई शीर्ष नेता मौजूद रहे। नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी ने शपथ लेकर राज्य में एक नई प्रशासनिक और राजनीतिक शुरुआत का संकेत दिया।
इस मौके पर जनता दल यूनाइटेड कोटे से विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। दोनों नेताओं को सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम NDA के भीतर संतुलन और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नई सरकार से अब विकास, सुशासन और स्थिर प्रशासन की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
सोमवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी। इसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुना गया। शपथ ग्रहण से पहले पटना की सड़कों पर उनके समर्थन में बैनर और पोस्टर भी दिखाई दिए, जिससे साफ था कि कार्यकर्ता और समर्थक इस बदलाव को लेकर उत्साहित हैं।
सम्राट चौधरी के राजनीतिक सफर की बात करें तो उन्होंने अपनी यात्रा RJD से शुरू की थी और बाद में हम पार्टी तथा जदयू से होते हुए भाजपा तक पहुंचे। वहीं विजय चौधरी ने कांग्रेस से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और बाद में जदयू में आकर नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में शामिल हो गए। विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी 1990 में जनता दल के टिकट पर राजनीति में कदम रखा था और बाद में जदयू के साथ अपनी मजबूत पहचान बनाई। तीनों नेताओं का अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आकर एक साथ सत्ता की जिम्मेदारी संभालना बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है।
नीतीश कुमार के लिए भी यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा का रुख किया है। राजनीतिक गलियारों में इसे एक युग के अंत और नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। अब वे राज्य के मार्गदर्शन की भूमिका में रहेंगे। उनके इस कदम के साथ ही बिहार की राजनीति ने एक नया अध्याय शुरू किया है।
सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह बिहार में विकास कार्यों को तेज करेगी, कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाएगी तथा प्रशासन को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगी। जनता की निगाहें अब इस नई सरकार के पहले फैसलों और प्राथमिकताओं पर टिक गई हैं।














