“अवैध निर्माण घोषित मस्जिद को प्रशासन ने ढहाना शुरू किया, जिले में हाई अलर्ट; अखिलेश बोले—‘सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और उपलब्धि”
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर स्थित एक मस्जिद के खिलाफ प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने इस निर्माण को अवैध घोषित किए जाने के बाद इसे हटाने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के साथ ही इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल के साथ PAC और RRF की तैनाती की गई है। दमकल की गाड़ियों को भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है।
मस्जिद के खिलाफ हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और उपलब्धि भी।” वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कार्रवाई को संविधान और न्यायिक प्रक्रिया से जोड़ते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के बाद कार्रवाई
प्रशासन के मुताबिक, सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर बनी मस्जिद को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने पिछले महीने अवैध घोषित किया था। अदालत के आदेश के बाद इसे हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान SDM, सिटी मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।
कार्रवाई शुरू होते ही आसपास के इलाकों में भी पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई। प्रशासन ने भीड़ एकत्र होने और किसी भी तरह के तनाव की स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी की है।
#WATCH | Uttar Pradesh: An illegal mosque, constructed within the Collectorate premises in Saharanpur, being demolished in the presence of SDM, City Magistrate and Police Force. The Court of City Magistrate had declared the mosque illegal last month and issued an order for its… pic.twitter.com/rFTnPxzWoe
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) September 5, 2026
इमरान मसूद ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे संविधान और न्यायिक प्रक्रिया से जोड़कर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद 1911 से पहले की है और कार्रवाई के समय अभी 22 दिन का समय बाकी था।
मसूद ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान इलाके को चारों तरफ से घेर लिया गया और लोगों को उनके घरों में रहने के लिए मजबूर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि “संविधान की धज्जियां उड़ाई गईं।”
कांग्रेस सांसद ने यह भी दावा किया कि मस्जिद का मालिकाना हक अभी भी वाहिद खान और याकूब खान के नाम दर्ज है। उनका आरोप है कि हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं को नजरअंदाज किया गया।
इमरान मसूद ने वक्फ बोर्ड को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर वक्फ बोर्ड को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया और न ही उसे कार्यवाही में शामिल किया गया।
‘मस्जिद गिराकर बड़ा काम नहीं किया’
इमरान मसूद ने सरकार की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी धार्मिक स्थल को गिराना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आज किसी एक समुदाय के साथ ऐसा किया जा रहा है तो भविष्य में इसका असर किसी दूसरे समुदाय पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से किसी हिंदू को भी खुशी नहीं होगी और इसे राज्य सरकार का राजनीतिक एजेंडा बताया। मसूद ने सहारनपुर के लोगों से कार्रवाई के विरोध में काली पट्टी बांधने की अपील भी की।
उनके बयान के बाद राजनीतिक विवाद और तेज होने के आसार हैं। कांग्रेस सांसद ने कार्रवाई को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे हैं और इसे संविधान तथा नागरिक अधिकारों के संदर्भ में गंभीर मामला बताया है।
अखिलेश यादव बोले—सौहार्द बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी
मस्जिद पर प्रशासन की कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि “सौहार्द बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है और उपलब्धि भी।”
#WATCH | Saharanpur: Demolition of illegal mosque in DM office complex begins after court upholds order.
On this, Congress MP Imran Masood says, “Our people stayed awake all night long. We kept making continuous efforts to contact the officials. Despite providing all the… pic.twitter.com/prP1UdITiY
— ANI (@ANI) September 5, 2026
अखिलेश यादव के इस बयान को कार्रवाई के बाद पैदा हुए राजनीतिक और सामाजिक माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर विस्तृत टिप्पणी किए बिना सरकार की जिम्मेदारी के रूप में सामाजिक सौहार्द को रेखांकित किया।
सपा प्रमुख के बयान के बाद विपक्षी दलों की ओर से भी सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए जाने की संभावना बढ़ गई है।
पूरे जिले में हाई अलर्ट
मस्जिद को गिराने की कार्रवाई के मद्देनजर सहारनपुर जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को बेहद सख्त कर दिया है। पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। संवेदनशील स्थानों पर PAC और RRF के जवानों को तैनात किया गया है।
इसके अलावा दमकल की गाड़ियों को भी रणनीतिक स्थानों पर खड़ा किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी बढ़ा दी है।
प्रशासन की कोशिश है कि कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की भीड़ एकत्र न हो और कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब न होने पाए। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त भी बढ़ाई गई है।
कार्रवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा, इलाके की निगरानी
मस्जिद को हटाने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा। मौके पर SDM, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। सुरक्षा बलों की तैनाती का उद्देश्य कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध, तनाव या अप्रिय घटना को रोकना बताया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई के बीच इलाके में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की जा रही है।
मामला धार्मिक स्थल से जुड़ा होने के कारण प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। जिले के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की मौजूदगी इसी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
कानूनी आदेश बनाम राजनीतिक विरोध, बढ़ा विवाद
सहारनपुर की इस कार्रवाई ने एक ओर जहां प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया को चर्चा में ला दिया है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।
प्रशासन की कार्रवाई का आधार सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत द्वारा मस्जिद को अवैध घोषित किए जाने और उसे हटाने के आदेश को बताया जा रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस कार्रवाई की प्रक्रिया, समय और संबंधित पक्षों की भागीदारी को लेकर सवाल उठाए हैं।
अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि प्रशासन की कार्रवाई को लेकर उठाए जा रहे राजनीतिक और कानूनी सवालों का आगे क्या जवाब मिलता है। साथ ही, यह भी अहम होगा कि कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक माहौल किस दिशा में जाता है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। हाई अलर्ट और भारी सुरक्षा तैनाती के बीच कार्रवाई जारी है। दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।
सहारनपुर पर सबकी नजर
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद सहारनपुर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। प्रशासन जहां इसे कानूनी आदेश के अनुपालन की कार्रवाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे सामाजिक सौहार्द, संवैधानिक प्रक्रिया और राजनीतिक एजेंडे से जोड़कर सवाल उठा रहा है।
अब आने वाले दिनों में इस मामले की कानूनी और राजनीतिक दिशा क्या होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और जिले में शांति बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।














