Saturday, May 23, 2026
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“आजम खान-अब्दुल्ला आजम को बड़ा कानूनी झटका” — दो PAN कार्ड मामले में सजा 7 साल से बढ़कर 10 साल

“रामपुर MP-MLA सेशन कोर्ट का बड़ा फैसला, अलग-अलग जन्मतिथि के आधार पर दो PAN कार्ड बनवाने के मामले में बढ़ी सजा; राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज”

रामपुर/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो PAN कार्ड से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। रामपुर की MP-MLA सेशन कोर्ट ने पहले सुनाई गई 7-7 वर्ष की सजा को बढ़ाकर 10-10 वर्ष कर दिया है। यह मामला कथित तौर पर अलग-अलग जन्मतिथियों के आधार पर दो PAN कार्ड बनवाने और दस्तावेजों के उपयोग से जुड़ा हुआ है।

इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति और कानूनी हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है, क्योंकि यह मामला केवल दस्तावेजी अनियमितता तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे चुनावी प्रक्रिया, आधिकारिक रिकॉर्ड और सार्वजनिक पदों से जुड़े जवाबदेही के प्रश्नों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

मामला वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोप था कि अलग-अलग जन्मतिथि के आधार पर दो अलग PAN कार्ड तैयार कराए गए और संबंधित दस्तावेजों का उपयोग चुनावी हलफनामों तथा अन्य आधिकारिक कार्यों में किया गया।

जांच के दौरान आयकर विभाग के रिकॉर्ड, चुनावी दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। नवंबर 2025 में विशेष MP-MLA कोर्ट ने दोनों को 7-7 वर्ष की सजा और 50-50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

सजा क्यों बढ़ाई गई?

अदालत में अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि दोनों पहले भी जन्म प्रमाणपत्र विवाद से जुड़े मामले में दोषी ठहराए जा चुके हैं। इसी आधार पर अभियोजन ने इसे “आदतन अपराध (Habitual Offence)” की श्रेणी में रखने की मांग की।

भाजपा विधायक आकाश सक्सेना की ओर से भी सजा बढ़ाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद अदालत ने सजा बढ़ाने का फैसला सुनाया।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं आजम खान

आजम खान पहले से कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। हाल के समय में वर्ष 2019 चुनाव प्रचार के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में भी उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है।

वहीं अब्दुल्ला आजम पहले भी जन्मतिथि विवाद के चलते राजनीतिक झटका झेल चुके हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द किए जाने का मामला भी काफी चर्चा में रहा था।

राजनीतिक असर भी महत्वपूर्ण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का प्रभाव केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और विपक्षी दलों के भीतर भी इसकी चर्चा देखने को मिल सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तियों के मामलों में दस्तावेजों की विश्वसनीयता और कानूनी पारदर्शिता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पहलू माने जाते हैं।

हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च अदालतों में अपील का विकल्प उपलब्ध रहता है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर भी सभी की नजर बनी हुई है।

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VIKAS TRIPATHI
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