लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें आग और धुएं से घिरे बच्चे अपनी जान बचाने के लिए इमारत से बाहर निकलने हेतु बिजली के केबलों का सहारा लेते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य न केवल हादसे की भयावहता को दर्शाता है, बल्कि शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जान बचाने के लिए बच्चों ने दिखाया साहस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद इमारत के भीतर अफरा-तफरी मच गई। कई छात्र-छात्राएं धुएं और लपटों के बीच फंस गए। कुछ बच्चों ने साहस दिखाते हुए बिजली के केबलों का सहारा लेकर नीचे उतरने का प्रयास किया और सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।
हालांकि, घबराहट और अव्यवस्था के बीच कुछ बच्चों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बंद स्थान में धुएं के तेजी से भर जाने और ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई।
पहली मंजिल से कूदने को मजबूर हुए छात्र
हादसे के दौरान दो छात्रों ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका उपचार किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में जारी है।
हेड हॉपर 3डी आर्ट स्टूडियो में लगी थी आग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आग हेड हॉपर 3डी आर्ट स्टूडियो में लगी थी। इमारत के निचले हिस्से में संचालित एक पेट शॉप में मौजूद पालतू जानवरों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। आग तेजी से फैलने के कारण कई लोगों को इमारत से कूदकर अपनी जान बचाने का प्रयास करना पड़ा।
राहत एवं बचाव अभियान में कई एजेंसियां जुटीं
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की लगभग दो दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), फायर सर्विस, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने बड़े स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
रेस्क्यू टीमों ने गीले कंबलों, ऑक्सीजन उपकरणों और स्ट्रेचर की सहायता से इमारत के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। मौके पर डीजी फायर, संयुक्त पुलिस आयुक्त (जेसीपी), लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने लिया घटनास्थल का जायजा
हादसे की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। इससे पहले उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस हादसे में 15 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की थी।
प्रशासन ने मृतकों के परिजनों और घायलों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। साथ ही, आग लगने के कारणों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
उठ रहे हैं कई महत्वपूर्ण सवाल
यह हादसा कई गंभीर प्रश्न छोड़ गया है—
क्या इमारत में अग्निशमन सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था?
क्या कोचिंग सेंटर के पास वैध फायर सेफ्टी एनओसी उपलब्ध थी?
क्या भवन में आपातकालीन निकास मार्ग और धुआं निकासी की पर्याप्त व्यवस्था थी?
क्या छात्रों और कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया था?
क्या व्यावसायिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने के लिए भवन की संरचना सुरक्षित और अनुमोदित थी?
भविष्य के लिए सबक
लखनऊ अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों, कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक परिसरों में नियमित अग्नि सुरक्षा ऑडिट, आपातकालीन निकास व्यवस्था, मॉक ड्रिल और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मासूम जिंदगियों की कीमत पर मिली यह चेतावनी भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और जवाबदेह कार्रवाई की मांग करती है।














