नोएडा के सेक्टर-145 स्थित अस्थायी डंपिंग ग्राउंड में लगी आग अब भी पूरी तरह काबू में नहीं आ सकी है। करीब पांच दिनों से अधिक समय से सुलग रही इस आग को बुझाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं, लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इस बीच यह मामला प्रशासनिक लापरवाही, कचरा प्रबंधन में खामियों और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते और भी गंभीर हो गया है।
आग पर अब तक पूरी तरह काबू नहीं
ताज़ा जानकारी के अनुसार, दमकल विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और आग बुझाने का काम लगातार जारी है। हालांकि, डंपिंग ग्राउंड में जमा कचरे की गहराई और गैसों के कारण आग बार-बार सुलग उठ रही है, जिससे इसे पूरी तरह बुझाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआत में ही प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
टेंडर प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, कचरा निस्तारण का ठेका ‘अल्फा थर्म’ कंपनी को जनवरी में दिया गया था।
नियमों के मुताबिक, कंपनी को:
1.कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण शुरू करना था
2.सेग्रिगेशन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था करनी थी
लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद मौके पर कोई ठोस काम नजर नहीं आया। अब जब आग जैसी गंभीर घटना सामने आई है, तो यह सवाल और भी तेज हो गया है कि निगरानी क्यों नहीं हुई।
‘बंदरबांट’ और अवैध वसूली के आरोप बरकरार
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि:
यहां 100–150 कूड़ा बीनने वाले मजदूर अनौपचारिक रूप से काम कर रहे थे
उनसे हर महीने ₹4000–₹5000 तक की कथित वसूली होती थी
और प्रशासनिक स्तर पर इस पर ध्यान नहीं दिया गया
इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि ये सही पाए जाते हैं तो यह मामला भ्रष्टाचार के साथ-साथ श्रमिक शोषण का भी गंभीर उदाहरण बन सकता है।
स्वच्छता दावों पर भी उठे सवाल
सूत्रों का दावा है कि पिछले वर्षों में शहर को “गार्बेज फ्री” दिखाने के लिए वास्तविक स्थिति को छिपाया गया।
अब जब डंपिंग ग्राउंड में आग और कचरे का वास्तविक स्वरूप सामने आया है, तो उन दावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों के बयानों में अब भी असमंजस
अधिकारियों के अलग-अलग बयान
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के बयान इस मामले में अलग-अलग सामने आए हैं।
OSD क्रांति शेखर सिंह के अनुसार, पांच दिन तक आग लगी रहने के मामले में संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं।
वहीं OSD इंदु प्रकाश सिंह का कहना है कि आग की सूचना पहले ही दे दी गई थी, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर लगातार खतरा
जब तक आग पूरी तरह बुझ नहीं जाती, तब तक आसपास के इलाकों में जहरीला धुआं फैलने का खतरा बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की आग से निकलने वाली गैसें:
सांस की बीमारियों को बढ़ा सकती हैं
आंखों और त्वचा में जलन पैदा कर सकती हैं
लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकती हैं
स्थानीय लोगों ने लगातार प्रदूषण और दुर्गंध की शिकायतें की हैं।
सरकार पर बढ़ा दबाव
मामला तूल पकड़ने के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों पर दबाव बढ़ गया है कि वे:
पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराएं
*जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करें
कचरा प्रबंधन प्रणाली में सुधार करें
अब भी अनुत्तरित सवाल
आग अब तक पूरी तरह क्यों नहीं बुझ पाई?
ठेका मिलने के बाद काम शुरू क्यों नहीं हुआ?
क्या कथित अवैध वसूली की जांच होगी?
क्या इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच बैठाई जाएगी?
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
तकनीकी सहायता से आग को पूरी तरह नियंत्रित करना जरूरी है
साथ ही, घटना के कारणों की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए
और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीति लागू की जानी चाहिए
नोएडा सेक्टर-145 का यह मामला अब केवल एक आग तक सीमित नहीं रह गया है। यह एक ऐसे सिस्टम की कहानी बन गया है, जहां लापरवाही और कथित अनियमितताओं ने मिलकर एक बड़ी समस्या को जन्म दिया।
जब तक आग पूरी तरह बुझ नहीं जाती और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक यह मामला प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा बना रहेगा।














