लखनऊ। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव की अचानक हुई मौत ने राजनीतिक और कारोबारी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) पहुंचे अखिलेश यादव के भावुक बयान के बाद अब इस मामले में कारोबारी नुकसान, आर्थिक तनाव और साझेदारों के साथ विवादों की चर्चा तेज हो गई है।
पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी प्रतीक से करीब दो महीने पहले मुलाकात हुई थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रतीक को स्वास्थ्य का ध्यान रखने और कारोबार पर फोकस करने की सलाह दी थी। अखिलेश ने कहा, “कभी-कभी कारोबार में नुकसान आदमी को अंदर से तोड़ देता है।”
अखिलेश के इस बयान के बाद यह माना जा रहा है कि प्रतीक यादव लंबे समय से भारी आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव से गुजर रहे थे।
रियल एस्टेट और फिटनेस इंडस्ट्री में सक्रिय थे प्रतीक
प्रतीक यादव दो प्रमुख क्षेत्रों—रियल एस्टेट और फिटनेस इंडस्ट्री—में सक्रिय थे। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित मनोज पांडेय चौराहे पर उनकी चर्चित जिम Iron Core Fit काफी लोकप्रिय मानी जाती थी।
रियल एस्टेट कारोबार में उन्हें पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन सिंह बिष्ट का सहयोग प्राप्त था। सूत्रों के मुताबिक, 2012 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद अमन बिष्ट ने 17 कंपनियां रजिस्टर कराईं।
2012 से 2016 के बीच 16 कंपनियों में उन्हें डायरेक्टर या नामित निदेशक बनाया गया, जबकि एक अन्य कंपनी में 2018 में नियुक्ति हुई। अधिकांश कंपनियां रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी थीं। हालांकि, करीबी सूत्रों का दावा है कि कंपनियों की औपचारिक जिम्मेदारी भले अमन बिष्ट के पास थी, लेकिन असली नियंत्रण प्रतीक यादव ही संभालते थे।
निवेश में नुकसान और रिश्तों में बढ़ती दरार
बताया जा रहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान कई निवेशों में भारी नुकसान हुआ, जिससे प्रतीक यादव और अमन बिष्ट के रिश्तों में तनाव बढ़ने लगा।
सूत्रों के अनुसार, प्रतीक इतने नाराज़ हो गए थे कि उन्होंने अमन बिष्ट को अपनी जिम Iron Core Fit का ऑफिस खाली करने तक के लिए कह दिया था। हालांकि, परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि तमाम मतभेदों के बावजूद दोनों के बीच संपर्क बना हुआ था।
प्रतीक यादव की तबीयत बिगड़ने के दौरान अमन बिष्ट एंबुलेंस में उनके साथ मौजूद थे और पोस्टमॉर्टम हाउस तक पहुंचे।
कृष्णानंद पांडे के साथ करोड़ों का विवाद
प्रतीक यादव का एक बड़ा कारोबारी विवाद रियल एस्टेट पार्टनर कृष्णानंद पांडे के साथ भी सामने आया। जानकारी के मुताबिक, प्रतीक ने उनके साथ करोड़ों रुपये का निवेश किया था।
जब निवेश की रकम वापस मांगी गई, तो कथित तौर पर फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई। विवाद इतना बढ़ गया कि वर्ष 2025 में कृष्णानंद पांडे, उनकी पत्नी वंदना पांडे और पिता अशोक पांडे के खिलाफ लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में FIR दर्ज कराई गई।
FIR में 4-5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और करीब 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस इस मामले की जांच अभी भी कर रही है।
अमन बिष्ट पर भी धोखाधड़ी के आरोप
अमन सिंह बिष्ट खुद भी एक अलग धोखाधड़ी मामले में जांच के दायरे में हैं।
20 सितंबर 2025 को ठाकुर सिंह नामक व्यक्ति ने कोर्ट के आदेश पर अमन बिष्ट के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। आरोप है कि अमन ने 2019 में सरोजनीनगर के सरसावा और अहमऊ गांव में लगभग 22 बीघा जमीन बेचने का दावा कर करोड़ों रुपये लिए, लेकिन सौदा पूरा नहीं किया।
शिकायत के मुताबिक, यह रकम अमन की कंपनी Monal Infra Heights के खाते में ट्रांसफर हुई थी। पुलिस इस मामले की भी जांच कर रही है।
डिप्रेशन में चले गए थे प्रतीक?
सूत्रों का कहना है कि नोएडा के एक कारोबारी के साथ भी प्रतीक यादव का करोड़ों रुपये का निवेश फंसा हुआ था। जब पैसे वापस मिलने की उम्मीद कम हुई, तो वे गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन में चले गए।
करीबी लोगों के मुताबिक, इसी तनाव के चलते प्रतीक अपनी दोनों बेटियों के साथ इंग्लैंड शिफ्ट होने की योजना बना रहे थे। हालांकि, फंसी हुई रकम निकालने की कोशिश और लगातार बढ़ते दबाव के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता गया।
परिवार में शोक, राजनीति में चर्चा तेज
प्रतीक यादव की अचानक मौत से यादव परिवार और समाजवादी पार्टी में शोक की लहर है। राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, परिवार के करीबी लोग इसे स्वास्थ्य संबंधी समस्या बता रहे हैं और कारोबारी विवादों को मौत का प्रत्यक्ष कारण मानने से बच रहे हैं।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां प्रतीक यादव की मौत के कारणों के साथ-साथ उनके कारोबारी साझेदारों के खिलाफ दर्ज मामलों की भी बारीकी से जांच कर रही हैं।














