“BAP से लौटे महेंद्रजीत सिंह मालवीय, 300 से अधिक समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल; जॉइनिंग की जगह बनी विवाद की वजह”
जयपुर। राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस एक बार फिर अंदरूनी गुटबाजी के कारण सुर्खियों में आ गई है। पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय की भारत आदिवासी पार्टी (BAP) छोड़कर कांग्रेस में वापसी ने जहां कांग्रेस को आदिवासी क्षेत्र में नई ऊर्जा देने का संकेत दिया है, वहीं इस वापसी के तरीके ने पार्टी के भीतर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मालवीय ने अपने 300 से अधिक समर्थकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सिविल लाइंस स्थित आवास पर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, जिस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने खुलकर नाराजगी जाहिर की।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को केवल एक नेता की घर वापसी नहीं, बल्कि कांग्रेस के दो प्रमुख शक्ति केंद्रों—गहलोत और डोटासरा—के बीच बढ़ती दूरी के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी तैयारियों के बीच सामने आई यह खींचतान कांग्रेस के लिए चुनौती भी बन सकती है।
गहलोत के घर हुई जॉइनिंग, बढ़ा राजनीतिक तापमान
गुरुवार को बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र के प्रभावशाली आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ जयपुर पहुंचे। यहां उन्होंने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। गहलोत ने स्वयं सभी कार्यकर्ताओं को कांग्रेस का दुपट्टा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया।
इस पूरे कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई। आमतौर पर कांग्रेस में किसी भी बड़े नेता या कार्यकर्ताओं की औपचारिक सदस्यता प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय (पीसीसी) में कराई जाती है, लेकिन इस बार यह प्रक्रिया गहलोत के निजी आवास पर हुई, जिसने विवाद को जन्म दे दिया।
गहलोत बोले—‘गलतफहमी दूर हुई, कांग्रेस परिवार में लौटे मालवीय’
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर महेंद्रजीत सिंह मालवीय की वापसी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मालवीय कुछ गलतफहमियों के कारण कांग्रेस छोड़कर चले गए थे, लेकिन अब उन्होंने पुनः कांग्रेस परिवार में लौटने का निर्णय लिया है।
गहलोत ने कहा कि उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल में बांसवाड़ा और डूंगरपुर सहित आदिवासी अंचल में सिंचाई, सड़क, शिक्षा और एनीकट निर्माण जैसे अनेक विकास कार्य किए गए। कांग्रेस ने हमेशा आदिवासी समाज के विकास को प्राथमिकता दी और इसी कारण आज भी क्षेत्र के लोगों का भरोसा पार्टी पर कायम है।
उन्होंने कहा कि मालवीय और उनके समर्थकों ने जीवनभर कांग्रेस की विचारधारा के साथ काम किया है। कठिन समय में कांग्रेस ने हमेशा आदिवासी समाज का साथ दिया है और यही भरोसा उन्हें दोबारा पार्टी में वापस लेकर आया है।
मनरेगा का हवाला देकर साधा आदिवासी वर्ग
गहलोत ने अपने संबोधन में मनरेगा योजना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दूरदर्शिता के कारण शुरू हुई इस योजना ने आदिवासी इलाकों में लाखों परिवारों को राहत पहुंचाई।
उन्होंने कहा कि अकाल और सूखे के समय डूंगरपुर और बांसवाड़ा जैसे जिलों में एक-एक समय तीन लाख तक मजदूरों को मनरेगा के तहत रोजगार मिला। इससे आदिवासी परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिली और पलायन पर भी रोक लगी।
गहलोत ने दावा किया कि आदिवासी समाज आज भी कांग्रेस की नीतियों और योजनाओं को याद करता है और यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग वापस कांग्रेस का दामन थाम रहे हैं।
BAP पर साधा निशाना, कहा—‘फायदा बीजेपी को मिला’
अशोक गहलोत ने भारत आदिवासी पार्टी (BAP) की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि BAP के गठन से आदिवासी राजनीति में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आया। इसके उलट कांग्रेस का वोट बैंक बंटा और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिला।
गहलोत ने कहा कि जब कांग्रेस, भाजपा और BAP के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बनता है तो विपक्षी वोट विभाजित हो जाते हैं और भाजपा को जीत का रास्ता आसान हो जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में BAP से जुड़े और भी नेता एवं कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल होंगे।
डोटासरा का तीखा हमला, बोले—‘व्यक्तिवाद ने कांग्रेस को हराया’
मालवीय की जॉइनिंग को लेकर सबसे तीखी प्रतिक्रिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से आई। उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के कहा कि कांग्रेस को सबसे अधिक नुकसान व्यक्तिवाद ने पहुंचाया है।
डोटासरा ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय को यह तय करना चाहिए था कि कांग्रेस बड़ी है या कोई नेता। पार्टी में शामिल होने की औपचारिक प्रक्रिया का एक तय ढांचा है और उसे संगठन के माध्यम से पूरा किया जाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि यदि मालवीय कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस मुख्यालय आते तो उनका भी उतना ही सम्मान और स्वागत किया जाता। लेकिन सवाल यह है कि जॉइनिंग के लिए पहले कहां जाना चाहिए था।
डोटासरा की यह टिप्पणी सीधे तौर पर अशोक गहलोत की ओर इशारा मानी जा रही है, जिसने पार्टी के भीतर चल रहे शक्ति संघर्ष को फिर से सार्वजनिक कर दिया।
‘मैंने पहले ही कहा था, मालवीय चुनाव हारेंगे’
डोटासरा यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय चुनाव हार जाएंगे और वही हुआ।
उन्होंने कहा कि मालवीय उनसे वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन व्यक्तिवाद और व्यक्तिगत राजनीति उन्हें जीत नहीं दिला सकी। कांग्रेस संगठन और कार्यकर्ताओं के बल पर चलती है, किसी एक व्यक्ति के बल पर नहीं।
हालांकि बाद में डोटासरा ने अपने बयान को संतुलित करने की कोशिश करते हुए कहा कि गहलोत के यहां केवल स्वागत कार्यक्रम हुआ था और औपचारिक प्रक्रिया आगे भी पूरी की जा सकती है।
मालवीय ने कहा—‘इसमें कोई बड़ी बात नहीं’
विवाद बढ़ने के बीच महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने पूरे मामले को सामान्य बताते हुए कहा कि उन्होंने सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की और वहीं कांग्रेस में शामिल हुए।
जब उनसे पूछा गया कि परंपरा के अनुसार पीसीसी में सदस्यता ग्रहण की जाती है, तो उन्होंने कहा कि इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। उनके अनुसार कांग्रेस परिवार के वरिष्ठ नेता के रूप में गहलोत से मिलना स्वाभाविक था और इसे विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
मालवीय ने कहा कि उनका उद्देश्य आदिवासी समाज और क्षेत्र के विकास के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर काम करना है। व्यक्तिगत विवादों से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
आदिवासी राजनीति में बड़ा संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार महेंद्रजीत सिंह मालवीय की वापसी आदिवासी बहुल बांसवाड़ा-डूंगरपुर क्षेत्र में कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। मालवीय लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत चेहरा रहे हैं और क्षेत्र में उनका व्यापक प्रभाव माना जाता है।
ऐसे समय में जब BAP आदिवासी राजनीति में तेजी से अपनी जगह बना रही है, मालवीय की वापसी कांग्रेस के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखी जा रही है। हालांकि जिस तरह यह वापसी हुई, उसने कांग्रेस की अंदरूनी एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए चेतावनी
राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव नजदीक हैं। कांग्रेस भाजपा के खिलाफ मजबूत रणनीति बनाने में जुटी है, लेकिन पार्टी के भीतर सामने आई यह ताजा खींचतान नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
एक तरफ कांग्रेस आदिवासी क्षेत्रों में अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद संगठनात्मक कमजोरी का संदेश दे रहे हैं। यदि समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया, तो विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना सकता है।
महेंद्रजीत सिंह मालवीय की कांग्रेस में वापसी ने राजस्थान की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह कदम कांग्रेस के लिए आदिवासी क्षेत्रों में मजबूती का अवसर बन सकता है, लेकिन जॉइनिंग को लेकर गहलोत और डोटासरा के बीच सामने आया विवाद यह भी दिखाता है कि पार्टी के भीतर गुटबाजी अभी खत्म नहीं हुई है। पंचायत और निकाय चुनावों से पहले कांग्रेस को न केवल विपक्ष से बल्कि अपनी आंतरिक चुनौतियों से भी मुकाबला करना होगा।














