नोएडा। यमुना एक्सप्रेस-वे स्थित ज़ेवर टोल प्लाजा के मैनेजर द्वारा किसान संगठनों और उनके कार्यकर्ताओं को कथित रूप से “असामाजिक तत्व” बताए जाने के आरोप ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस टिप्पणी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) ने शनिवार को एसीपी-3 कार्यालय, थाना सेक्टर-49 पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
भाकियू लोकशक्ति के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने कहा कि किसान संगठनों की भूमिका लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण रही है। किसानों, मजदूरों और ग्रामीण समाज की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने वाले संगठनों को “असामाजिक तत्व” बताना न केवल उनकी प्रतिष्ठा पर हमला है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की भावना के भी विपरीत है।
उन्होंने कहा कि किसान संगठन वर्षों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस प्रकार की टिप्पणी करना गंभीर चिंता का विषय है। यदि इस तरह के बयान बिना किसी जवाबदेही के दिए जाते हैं, तो इससे समाज में कार्यरत संगठनों की छवि धूमिल होने के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
किसान संगठनों में बढ़ा आक्रोश
भाकियू नेताओं का कहना है कि इस टिप्पणी से किसान कार्यकर्ताओं की भावनाएं गहराई से आहत हुई हैं और संगठन के भीतर व्यापक रोष व्याप्त है। संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
चौधरी बीसी प्रधान ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन द्वारा समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो किसान संगठन लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर आगे की रणनीति तय करने को बाध्य होंगे।
किसानों की आवाज़ उठाने वालों का सम्मान जरूरी
उन्होंने कहा कि किसान यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बिना किसी वेतन या सरकारी सुविधा के किसानों, मजदूरों और आम ग्रामीणों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। ऐसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को अपमानित करने वाली भाषा का प्रयोग किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
प्रशासन को सौंपा गया मांगपत्र
इस संबंध में संगठन की ओर से एसीपी राकेश कुमार सिंह एवं इंस्पेक्टर सुनील शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मामले की जांच कर जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की गई है।
बड़ी संख्या में पहुंचे किसान नेता
ज्ञापन सौंपने के दौरान भाकियू लोकशक्ति के परिवहन मंत्री ओमप्रकाश गुर्जर, महानगर अध्यक्ष महेश तंवर, युवा अध्यक्ष राजकुमार मोनू, अजब सिंह भाटी, हरेन्द्र बैसोया, हरि अवाना, विजयपाल भाटी, कालू तंवर, अरुण गौतम, मनोज शर्मा, सुनील अंबावता, सुधीर ठाकुर, दीपक कुमार, नरेश शर्मा, अनुज नागर, धनंजय, अरुण सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रश्न भी खड़ा करता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक एवं किसान संगठनों के प्रति सार्वजनिक संस्थानों और अधिकारियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए। यदि किसी संगठन पर गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो उसके लिए ठोस आधार और वैधानिक प्रक्रिया आवश्यक होती है। यही कारण है कि यह मामला अब केवल किसान संगठन और टोल प्रबंधन के बीच का विवाद न रहकर सम्मान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय बनता जा रहा है।















