कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई बीजेपी सरकार ने अपनी पहली ही कैबिनेट बैठक में कई बड़े और निर्णायक फैसले लेकर साफ संकेत दे दिया है कि राज्य में प्रशासनिक, सुरक्षा और कल्याणकारी नीतियों को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पांच मंत्रियों के साथ आयोजित पहली ऐतिहासिक कैबिनेट बैठक में कुल 6 अहम फैसलों पर मुहर लगाई। इनमें बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए जमीन हस्तांतरण, केंद्रीय योजनाओं को लागू करना, भारतीय न्याय संहिता (BNS) को लागू करना, सरकारी नौकरियों में आयु सीमा बढ़ाना और राजनीतिक हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को सम्मान एवं सहायता देने जैसे फैसले शामिल हैं।
निष्पक्ष चुनाव कराने वालों को कैबिनेट का धन्यवाद
कैबिनेट बैठक की शुरुआत राज्य में विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने वाले सभी संस्थानों और अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हुई। सरकार ने चुनाव आयोग, पर्यवेक्षकों, Kolkata Police और पश्चिम बंगाल पुलिस की भूमिका की सराहना की।
सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने में इन संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और निष्पक्ष चुनाव पश्चिम बंगाल के लोकतांत्रिक इतिहास का नया अध्याय साबित हुआ।
राजनीतिक हिंसा में मारे गए 321 BJP कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि
नई सरकार ने राजनीतिक हिंसा के दौरान जान गंवाने वाले 321 बीजेपी कार्यकर्ताओं को “लोकतंत्र के शहीद” बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। कैबिनेट ने फैसला किया कि राज्य सरकार अब इन सभी परिवारों के पुनर्वास और कल्याण की जिम्मेदारी उठाएगी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा,
“उन 321 लोगों को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि जिन्होंने असमय अपनी जान गंवाई। हमारी सरकार उनके परिवारों के साथ खड़ी रहेगी और उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।”
इस फैसले को बीजेपी कार्यकर्ताओं के मनोबल और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग को मिली रफ्तार
कैबिनेट की सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग परियोजना को तेजी से पूरा करने का फैसला रहा। सरकार ने सीमा सुरक्षा बल यानी Border Security Force (BSF) को आवश्यक जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह प्रक्रिया अगले 45 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इसके लिए भूमि एवं राजस्व सचिव तथा मुख्य सचिव को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार का मानना है कि सीमा सुरक्षा मजबूत होने से घुसपैठ, तस्करी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
आयुष्मान भारत समेत केंद्रीय योजनाओं का विस्तार
नई बीजेपी सरकार ने उन केंद्रीय योजनाओं को तत्काल लागू करने का फैसला किया है जिन्हें पिछली सरकार के दौरान राज्य में पूरी तरह लागू नहीं किया गया था।
इन योजनाओं में प्रमुख रूप से:
आयुष्मान भारत
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
उज्ज्वला योजना
शामिल हैं।
सरकार ने निर्देश दिया है कि इन योजनाओं के लिए नामांकन प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और लंबित स्वीकृतियों पर तेजी से कार्रवाई की जाए।
पश्चिम बंगाल में लागू होगी भारतीय न्याय संहिता (BNS)
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने भारतीय न्याय संहिता को लागू करने में देरी की थी, जबकि अब नई सरकार ने इसे राज्य में तत्काल लागू करने का फैसला किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने संविधान की भावना के अनुरूप कदम नहीं उठाए थे। अब राज्य में नए आपराधिक कानूनों को लागू कर प्रशासनिक व्यवस्था को केंद्र के साथ समन्वित किया जाएगा।
इसके अलावा IAS और IPS अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भेजने की मंजूरी भी दी गई है, ताकि प्रशासनिक क्षमता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके।
सरकारी नौकरियों में आयु सीमा 5 साल बढ़ी
राज्य के युवाओं को राहत देते हुए सरकार ने सभी सरकारी नौकरियों में आवेदन की अधिकतम आयु सीमा में 5 साल की वृद्धि करने का फैसला लिया है।
सरकार का कहना है कि वर्ष 2015 के बाद लंबे समय तक नियमित भर्तियां नहीं होने की वजह से लाखों युवा उम्र सीमा पार करने की कगार पर पहुंच गए थे। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर आश्वासन दिया था, जिसे अब नई सरकार ने लागू कर दिया है।
“बदलाव की शुरुआत” के तौर पर देखी जा रही पहली कैबिनेट
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, शुभेंदु अधिकारी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश थी।
सीमा सुरक्षा, केंद्रीय योजनाओं का विस्तार, प्रशासनिक सुधार और राजनीतिक हिंसा के पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता जैसे फैसलों के जरिए नई सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि पश्चिम बंगाल में शासन की प्राथमिकताएं अब बदल चुकी हैं।














