देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब चार वर्षों से कार्यवाहक नेतृत्व में चल रही यूपी पुलिस को अब स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली में आज संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अहम बैठक आयोजित होगी, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुख्य सचिव एस.पी. गोयल शामिल होंगे।
इस बैठक में यूपी कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों में से तीन नामों का पैनल अंतिम रूप दिया जाएगा। यही पैनल राज्य सरकार को भेजा जाएगा, जिसमें से एक अधिकारी को उत्तर प्रदेश का स्थायी DGP नियुक्त किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह नियुक्ति?
मई 2022 में तत्कालीन डीजीपी मणीलाल गोयल के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस स्थायी प्रमुख के बिना कार्य कर रही है। इतने लंबे समय तक कार्यवाहक व्यवस्था में पुलिस तंत्र का संचालन होना प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य माना जाता है।
उत्तर प्रदेश जैसे संवेदनशील और विशाल राज्य में पुलिस नेतृत्व केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें शामिल हैं—
संगठित अपराध और माफिया नियंत्रण
महिला सुरक्षा और साइबर अपराध
धार्मिक एवं सामाजिक संवेदनशीलता वाले मामलों का प्रबंधन
बड़े आयोजनों और चुनावों की सुरक्षा व्यवस्था
पुलिस सुधार और आधुनिक तकनीकी ढांचे का विस्तार
ऐसे में स्थायी DGP की नियुक्ति को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा रणनीति और शासन प्रणाली के लिए निर्णायक कदम माना जा रहा है।
DGP पद की दौड़ में शामिल प्रमुख चेहरे
1.रेणुका मिश्रा
सीनियरिटी के आधार पर सबसे वरिष्ठ दावेदारों में शामिल हैं।
उन्होंने बीकॉम, एमए (इकोनॉमिक्स) और पुलिस प्रशासन में एमए की पढ़ाई की है।
वे पहले यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। मई 2021 में उन्हें डीजी पद पर पदोन्नति मिली थी। हालांकि सिपाही भर्ती पेपर लीक विवाद के बाद जुलाई 2024 से उन्हें कोई नियमित तैनाती नहीं मिली।
उनकी प्रशासनिक क्षमता और अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाते हैं, लेकिन हालिया विवादों का असर चयन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
2.पीयूष आनंद
वर्तमान में केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिदेशक हैं।
उन्होंने Indian Institute of Technology Delhi से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक तथा Management Development Institute Gurgaon से पब्लिक पॉलिसी में पोस्ट ग्रेजुएट किया है।
उनका अनुभव बेहद व्यापक माना जाता है—
यूपी के 11 जिलों में SP/SSP
करीब 7 वर्षों तक CBI में सेवाएं
CISF में ADG और Special DG जैसे महत्वपूर्ण पद
राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता उन्हें प्रशासनिक रूप से मजबूत उम्मीदवार बनाती है।
3.राजीव कृष्ण
वर्तमान में कार्यवाहक DGP के रूप में उत्तर प्रदेश पुलिस का नेतृत्व कर रहे हैं और सूत्रों के अनुसार स्थायी नियुक्ति की दौड़ में सबसे आगे बताए जा रहे हैं।
उनके कार्यकाल के दौरान अपराध नियंत्रण, पुलिस समन्वय और प्रशासनिक संतुलन को लेकर सरकार का भरोसा मजबूत माना जा रहा है। यही कारण है कि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उनके नाम की सबसे अधिक चर्चा है।
क्या होगा आगे?
UPSC तीन वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद—
राज्य सरकार एक नाम का चयन करेगी
अंतिम अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी होगी
चयनित अधिकारी को स्थायी DGP का कार्यभार सौंपा जाएगा
यह नियुक्ति आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश की पुलिसिंग शैली, अपराध नियंत्रण नीति और प्रशासनिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां की कानून-व्यवस्था राष्ट्रीय राजनीति पर भी सीधा प्रभाव डालती है। आगामी चुनावी और सामाजिक चुनौतियों के बीच स्थायी DGP की नियुक्ति को सरकार की दीर्घकालिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए स्थायी पुलिस प्रमुख के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां होंगी—
साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड
महिला एवं बाल सुरक्षा
पुलिस बल का आधुनिकीकरण
संवेदनशील जिलों में खुफिया समन्वय
पुलिस की जवाबदेही और जनविश्वास बढ़ाना
ऐसे में आज की UPSC बैठक केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के भविष्य का निर्णायक मोड़ मानी जा रही है।














