नोएडा। निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर सेक्टर-70 स्थित फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन द्वारा सेक्टर-73 स्थित महादेव अपार्टमेंट के निकट जूस, लस्सी एवं जलजीरा वितरण शिविर का आयोजन केवल धार्मिक परंपरा निभाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह कार्यक्रम समावेशी समाज, सामाजिक जिम्मेदारी, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास को सशक्त बनाने का एक प्रेरणादायक अभियान बनकर सामने आया।
इस सेवा अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें फाउंडेशन के विशेष (दिव्यांग) बच्चों ने स्वयं अपने अभिभावकों के साथ मिलकर हजारों राहगीरों को शीतल पेय वितरित किए। यह दृश्य इस बात का प्रतीक था कि दिव्यांगजन केवल सहायता प्राप्त करने वाले नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने वाले सक्रिय नागरिक भी हैं।
सेवा केवल दान नहीं, समाज को जोड़ने का माध्यम
फाउंडेशन के निदेशक डॉ. महिपाल सिंह ने कहा कि यह आयोजन केवल जूस, लस्सी या जलजीरा बांटने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज में बढ़ती सामाजिक दूरी को कम करने, आपसी विश्वास को मजबूत करने और मानवीय रिश्तों को पुनर्जीवित करने का प्रयास था।
उन्होंने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि डिजिटल युग में लोगों के बीच प्रत्यक्ष संवाद और सामाजिक सहभागिता लगातार कम होती जा रही है। इसका प्रभाव केवल सामाजिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है।

उन्होंने बताया कि सामाजिक अलगाव के कारण मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी प्रभावित होती है तथा डोपामिन जैसे महत्वपूर्ण न्यूरोकेमिकल्स का स्तर भी कम होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप तनाव, चिड़चिड़ापन, अवसाद और विभिन्न न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। उनके अनुसार सेवा, सहयोग और सामाजिक सहभागिता जैसे कार्य मस्तिष्क के लिए “ब्रेन जिम” की तरह कार्य करते हैं, जो मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दिव्यांग बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास
फाउंडेशन की सेंटर मैनेजर सुर्भी जैन ने कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य विशेष बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा उन्हें यह अनुभव कराना है कि वे समाज के समान रूप से महत्वपूर्ण और सक्षम सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज दिव्यांग बच्चों को स्वीकार करता है और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करता है, तभी वास्तविक समावेशी विकास संभव होता है।
लगभग 5000 लोगों तक पहुंची सेवा
कार्यक्रम के दौरान लगभग 5000 लोगों को जूस, लस्सी एवं जलजीरा वितरित किया गया। सेवा कार्य सम्पन्न होने के बाद विशेष बच्चों, अभिभावकों एवं स्वयंसेवकों ने पूरे परिसर में स्वच्छता अभियान भी चलाया। इस अभियान में महादेव अपार्टमेंट के निवासी, विशेषकर महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर यह संदेश दिया कि स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे के पूरक हैं।
विशेष बच्चों के हाथों हुआ सम्मान
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सेक्टर-122 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष शिव कुमार का विशेष बच्चों द्वारा निर्मित हैंडवॉश एवं शॉल भेंट कर सम्मान किया गया। यह सम्मान केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि विशेष बच्चों की प्रतिभा, आत्मनिर्भरता और रचनात्मक क्षमता का भी परिचायक था।

समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश
आज जब समाज में अकेलापन, मानसिक तनाव, सामाजिक दूरी और संवेदनहीनता बढ़ती जा रही है, ऐसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि सेवा, सहभागिता और सामाजिक समरसता ही स्वस्थ समाज की सबसे मजबूत नींव हैं।
फर्स्टवन रिहैब फाउंडेशन का यह प्रयास यह भी दर्शाता है कि यदि दिव्यांग बच्चों को उचित अवसर, सम्मान और मंच दिया जाए तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन के प्रभावी वाहक बन सकते हैं।
निर्जला एकादशी के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं था, बल्कि मानवता, समावेशी विकास, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और स्वच्छता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा। यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची सेवा वही है, जो लोगों को जोड़ने, सम्मान देने और एक बेहतर, संवेदनशील तथा समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में ठोस योगदान दे।














