“किसानों की जमीन और जनता के पैसे से बना करोड़ों का नोएडा प्राधिकरण कार्यालय, गमले बने ‘पानदान’; आखिर नागरिक जिम्मेदारी कब निभाएंगे?”
नोएडा: यह केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि गौतमबुद्ध नगर के किसानों के त्याग, आम नागरिकों के योगदान और विकास की नई सोच का प्रतीक है। किसानों ने अपनी पुश्तैनी जमीनें विकास के लिए दीं, वहीं लाखों नागरिकों और उद्यमियों ने विभिन्न शुल्क, विकास प्रभार, संपत्ति कर और अन्य राजस्व के माध्यम से इस व्यवस्था को आर्थिक आधार दिया। इन्हीं संसाधनों से नोएडा प्राधिकरण का अत्याधुनिक और भव्य प्रशासनिक कार्यालय अस्तित्व में आया।
लेकिन इस आधुनिक भवन के भीतर और आसपास का एक दृश्य हर संवेदनशील नागरिक को सोचने पर मजबूर कर देता है। सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाए गए गमले पान और गुटखे की पीक से लाल हो रहे हैं। दीवारें, कोने और सार्वजनिक स्थान कुछ लोगों की लापरवाही के कारण बदरंग हो रहे हैं। सवाल केवल गंदगी का नहीं है, बल्कि उस सोच का है जो सार्वजनिक संपत्ति को अपनी नहीं मानती।
“सरकारी संपत्ति सरकार की नहीं, जनता की होती है। जिस भवन के निर्माण में किसानों की जमीन और नागरिकों का पैसा लगा हो, उसे गंदा करना अपने ही सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।”
गांव की चौपाल से शहर की सड़कों तक… आखिर सोच क्यों बदल जाती है?
गांवों में आज भी अधिकांश परिवार सुबह अपने घर के सामने झाड़ू लगाते हैं। गलियों की सफाई को अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। लेकिन यही व्यक्ति जब शहर में आता है तो सार्वजनिक स्थानों को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानता।
बस स्टैंड हो, अस्पताल हो, सरकारी कार्यालय हो या पार्क—कहीं भी पान की पीक थूक देना, कूड़ा फेंक देना या गंदगी फैलाना सामान्य व्यवहार बनता जा रहा है।
क्या शहर हमारा नहीं है?
क्या सरकारी भवन किसी अधिकारी की निजी संपत्ति हैं?
यदि नहीं, तो फिर हम इनके साथ अपने घर जैसा व्यवहार क्यों नहीं करते?
यह भवन केवल ईंट-पत्थर नहीं, किसानों के विश्वास की नींव पर खड़ा है
गौतमबुद्ध नगर के हजारों किसानों ने विकास की कीमत अपनी जमीन देकर चुकाई। वर्षों पुरानी खेती की जमीनें औद्योगिक और शहरी विकास के लिए अधिग्रहित हुईं। दूसरी ओर, शहर के नागरिकों ने विभिन्न शुल्कों के माध्यम से विकास की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया।
यही कारण है कि नोएडा प्राधिकरण का प्रत्येक भवन, प्रत्येक सड़क, प्रत्येक पार्क और प्रत्येक सार्वजनिक सुविधा सीधे-सीधे जनता की भागीदारी का परिणाम है।
ऐसे में यदि कोई व्यक्ति इन परिसरों को गंदा करता है तो वह केवल सफाई व्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि किसानों के त्याग और नागरिकों के योगदान का भी अनादर करता है।
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फैक्ट बॉक्स
नोएडा प्राधिकरण कार्यालय क्यों है खास?
- आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाओं से लैस प्रशासनिक भवन।
- किसानों की जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के आधार पर विकसित।
- नागरिक सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से निर्मित।
- हर दिन बड़ी संख्या में आम नागरिक, उद्योगपति, किसान और अधिकारी यहां आते हैं।
- परिसर को आकर्षक बनाने के लिए हरियाली और सजावटी गमलों की विशेष व्यवस्था।
जब गमले ‘पानदान’ बन जाएं…
भवन की सुंदरता बढ़ाने के लिए लगाए गए गमलों पर जमी पान की पीक केवल गंदगी नहीं, बल्कि नागरिक चेतना की कमी का प्रतीक है।
सफाई कर्मचारी बार-बार साफ करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की आदतें फिर वही स्थिति पैदा कर देती हैं।
आखिर कब तक सरकारी धन केवल सफाई में खर्च होता रहेगा?
क्या कहते हैं नागरिक?
अशोक चौहान, सामाजिक कार्यकर्ता
“नोएडा का यह कार्यालय किसानों की जमीन और जनता के पैसे से बना है। इसे साफ रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। केवल प्राधिकरण या सफाई कर्मचारियों पर जिम्मेदारी डालना उचित नहीं है।”
आर.के. शर्मा, सेक्टर-62 निवासी
“हम अपने घर में कभी पान की पीक नहीं थूकते, फिर सरकारी भवनों को गंदा क्यों करते हैं? सोच बदलनी होगी।”
सविता त्यागी, गृहिणी
“स्वच्छता केवल अभियान नहीं, संस्कार है। बच्चों को भी सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान करना सिखाना होगा।”
अनिल नागर, किसान प्रतिनिधि
“हमारी जमीन विकास के लिए गई है। हमें खुशी है कि शहर आगे बढ़ रहा है, लेकिन दुख तब होता है जब लोग उसी विकास को गंदा करते हैं।”
क्या केवल जुर्माना समाधान है?
सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने के खिलाफ नियम मौजूद हैं। कई शहरों में जुर्माना भी लगाया जाता है।
लेकिन केवल दंड से समस्या का समाधान नहीं होगा।
जब तक नागरिक स्वयं यह महसूस नहीं करेंगे कि सरकारी संपत्ति भी उनकी अपनी संपत्ति है, तब तक स्वच्छता अभियान अधूरा रहेगा।
@narendramodi स्वच्छता का संदेश देते नहीं थकते, कुछ लोग पान-गुटखे की पीक के लिए जगह नहीं,बस मौका देखते हैं@noida_authority का भव्य नया कार्यालय भी इससे अछूता नहीं खूबसूरत गमले अब पान की पीक से ‘पानदान’ बनते जा रहे हैं
प्राधिकरण की भव्यता आदतें हमारी वही पुरानी “हम कब सुधरेंगे” pic.twitter.com/07S2NT5CCP
— PARDAPHAAS NEWS (@pardaphaas) August 7, 2026
नोएडा आज अंतरराष्ट्रीय पहचान वाला शहर बनने की ओर अग्रसर है। आधुनिक सड़कें, मेट्रो, एक्सप्रेसवे और विश्वस्तरीय प्रशासनिक भवन इसकी पहचान हैं।
लेकिन किसी भी शहर की असली पहचान उसकी इमारतों से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले नागरिकों की आदतों से होती है।
यदि नागरिक सार्वजनिक संपत्ति का सम्मान नहीं करेंगे, तो करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई सबसे सुंदर इमारत भी अपनी चमक खो देगी।
जनता से अपील
आइए, एक छोटा-सा संकल्प लें—
- सार्वजनिक स्थानों पर कभी पान या गुटखे की पीक नहीं थूकेंगे।
- कूड़ा केवल डस्टबिन में डालेंगे।
- सरकारी भवनों, अस्पतालों, पार्कों और सड़कों को अपना समझेंगे।
- दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करेंगे।
“स्वच्छ शहर केवल सरकार नहीं बनाती, उसे वहां रहने वाले नागरिक बनाते हैं। जिस दिन हम सरकारी भवन को भी अपना घर समझने लगेंगे, उस दिन किसी गमले को ‘पानदान’ बनने की नौबत नहीं आएगी।”














