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हरिद्वार से मुरादाबाद तक फैला नशे का ‘काला कारोबार’! 2,000 बोतलों के साथ सरगना फहीम गिरफ्तार, पर्दे के पीछे कौन-कौन है शामिल?

“तीन लाख की कोडीन सिरप बरामद, दो साथी फरार; किराए के मकान में चलता था नशे की खेप का गोदाम, अब पुलिस खंगाल रही है पूरे सिंडिकेट की सप्लाई चेन।”

मुरादाबाद। नशे का कारोबार अब गलियों में चोरी-छिपे पुड़िया बेचने तक सीमित नहीं रह गया है। इस अवैध धंधे ने बाकायदा सप्लाई नेटवर्क, सुरक्षित ठिकानों, बिचौलियों और अंतरजनपदीय संपर्कों का ऐसा ढांचा खड़ा कर लिया है, जिसमें नशे का सामान एक जिले से दूसरे जिले तक ऐसे पहुंचाया जाता है, मानो कोई वैध व्यापारिक खेप हो। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां माल की गुणवत्ता नहीं, बल्कि कानून की पकड़ से बच निकलने की कीमत लगाई जाती है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सक्रिय इसी कथित नशा नेटवर्क पर मुरादाबाद पुलिस ने बड़ी चोट करने का दावा किया है।

कटघर थाना पुलिस ने कल्याणपुर अंडरपास के पास घेराबंदी कर एक कार से कोडीन सिरप की करीब 2,000 अवैध बोतलें बरामद की हैं। बरामद खेप की अनुमानित बाजार कीमत लगभग तीन लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने मौके से कार चला रहे फहीम को गिरफ्तार किया है, जिसे इस गिरोह का मुख्य सरगना बताया जा रहा है। हालांकि, उसके दो कथित सहयोगी नवाज और आसिफ पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर उस सवाल को सामने ला खड़ा किया है कि आखिर नशे के अवैध कारोबार की जड़ें कितनी गहरी हैं? जब प्रतिबंधित या दुरुपयोग की आशंका वाली दवाओं की हजारों बोतलें एक जिले से दूसरे जिले तक पहुंच रही हों, तो यह केवल एक कार, एक चालक और कुछ बोतलों की कहानी नहीं रह जाती। इसके पीछे खरीद, भंडारण, परिवहन और बिक्री का पूरा तंत्र होने की आशंका पैदा होती है।

अंडरपास पर पुलिस का जाल, कार के भीतर मिला नशे का खजाना

मुरादाबाद के एसपी सिटी रणविजय सिंह के मुताबिक, सीओ कटघर और एसएचओ कटघर के नेतृत्व में पुलिस की संयुक्त टीमों को सूचना मिली थी कि उत्तराखंड के हरिद्वार से कोडीन सिरप की बड़ी खेप मुरादाबाद लाई जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने कल्याणपुर अंडरपास के पास निगरानी और घेराबंदी शुरू कर दी।

कुछ देर बाद संदिग्ध कार दिखाई दी। पुलिस ने उसे रोककर तलाशी ली तो अंदर रखी कोडीन सिरप की करीब 2,000 बोतलें देखकर मामला महज सामान्य वाहन चेकिंग का नहीं रहा। कार में मौजूद फहीम को गिरफ्तार कर लिया गया।

कार्रवाई भले ही अंडरपास के पास हुई, लेकिन पुलिस के सामने खुलती कहानी कई जिलों और दो राज्यों के बीच फैले कथित नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। सवाल यह भी है कि इतनी बड़ी खेप बिना किसी व्यवस्थित खरीद और परिवहन व्यवस्था के आखिर कैसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रही थी?

हरिद्वार का ‘राणा’ कौन? सप्लाई के पीछे असली चेहरे की तलाश

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी फहीम ने कथित तौर पर बताया कि गिरोह हरिद्वार निवासी ‘राणा’ नाम के व्यक्ति से कोडीन सिरप की खेप खरीदता था। इसके बाद माल मुरादाबाद लाकर अलग-अलग स्थानों पर जमा किया जाता था और फिर स्थानीय सप्लायर्स के माध्यम से आगे भेजा जाता था।

अब इस कहानी में सबसे महत्वपूर्ण किरदार वह कथित सप्लायर ‘राणा’ है, जिसका नाम पूछताछ में सामने आया है। आखिर यह व्यक्ति कौन है? क्या वह केवल माल उपलब्ध कराने वाला बिचौलिया है या उसके पीछे भी कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? क्या हरिद्वार से आने वाली खेपों का अंतिम गंतव्य केवल मुरादाबाद था या आसपास के अन्य जिलों में भी इसकी सप्लाई होती थी?

इन सवालों के जवाब पुलिस की आगे की जांच से ही सामने आ सकेंगे। फिलहाल किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि यदि पूछताछ में बताए गए संपर्कों की पुष्टि होती है, तो गिरफ्तारी की यह कार्रवाई एक बड़े नेटवर्क तक पहुंचने का रास्ता खोल सकती है।

अकबरपुर का किराए का मकान बना था कथित गोदाम!

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू भोजपुर थाना क्षेत्र के अकबरपुर गांव में किराए पर लिया गया मकान है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने इस मकान का इस्तेमाल कोडीन सिरप की बोतलों को सुरक्षित रखने के लिए किया था।

यानी कथित तौर पर नशे की खेप केवल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम नहीं हो रहा था, बल्कि उसके लिए भंडारण की अलग व्यवस्था भी बनाई गई थी। माल पहले ठिकाने पर जमा किया जाता और फिर जरूरत तथा मांग के हिसाब से आसपास के इलाकों में भेजा जाता था।

यहां सवाल सिर्फ एक किराए के मकान का नहीं है। सवाल यह है कि किसी गांव में किराए पर मकान लेकर यदि इस तरह का अवैध भंडारण किया जा रहा था, तो क्या स्थानीय स्तर पर किसी को इसकी भनक नहीं लगी? क्या मकान मालिक को किराएदार की गतिविधियों की जानकारी थी? क्या इस ठिकाने से पहले भी खेपों की आवाजाही हुई थी?

इन तमाम पहलुओं की जांच जरूरी है। हालांकि, मकान मालिक या किसी अन्य स्थानीय व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर अभी कोई प्रमाणित जानकारी सामने नहीं आई है।

फहीम के साथ नवाज और आसिफ के नाम, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में फहीम ने अपने दो कथित साथियों नवाज और आसिफ के नाम भी बताए हैं। दोनों सट्टू नगला, मूंढापांडे के निवासी बताए गए हैं। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

दो आरोपियों का फरार होना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी से खरीद-फरोख्त, परिवहन और वितरण से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। यह भी पता चल सकता है कि गिरोह में किसकी क्या जिम्मेदारी थी और माल को किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाता था।

लेकिन पुलिस की चुनौती केवल तीन नामों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि यह वास्तव में संगठित सिंडिकेट है, तो उसके वित्तीय लेन-देन, संपर्क सूत्रों, भंडारण स्थलों और अंतिम खरीदारों तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है।

पुराना आपराधिक रिकॉर्ड, फिर भी कथित नेटवर्क में सक्रियता?

पुलिस की शुरुआती जांच में फहीम का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। बताया गया है कि वर्ष 2021-22 में वह सिविल लाइंस थाने में एनडीपीएस एक्ट के मामले में जेल जा चुका है।

यह जानकारी कानून-व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। यदि कोई व्यक्ति पहले भी नशे से जुड़े मामले में जेल जा चुका है और अब दोबारा कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसके संपर्कों और गतिविधियों की निगरानी कितनी प्रभावी रही? क्या पुराने मामले के बाद उसके नेटवर्क पर पर्याप्त नजर रखी गई थी? या फिर जेल से बाहर आने के बाद उसने दोबारा अपना कथित कारोबार खड़ा कर लिया?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा। किसी व्यक्ति के पुराने मामले को वर्तमान अपराध का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन पुलिस के लिए यह उसके संभावित संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल का महत्वपूर्ण आधार जरूर हो सकता है।

तीन लाख की खेप बरामद, अब असली परीक्षा करोड़ों के नेटवर्क तक पहुंचने की

एसपी सिटी रणविजय सिंह ने बताया कि पुलिस इस सिंडिकेट के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज की जांच कर रही है। यानी यह पता लगाया जाएगा कि माल कहां से खरीदा गया, किसने उपलब्ध कराया, किन रास्तों से पहुंचाया गया और आगे किन लोगों को बेचा जाना था।

यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्योंकि 2,000 बोतलों की बरामदगी पुलिस की एक बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन किसी कथित सिंडिकेट को खत्म करने के लिए केवल माल पकड़ना पर्याप्त नहीं होता। उसके आर्थिक स्रोत, सप्लायर, बिचौलिये और वितरण व्यवस्था तक पहुंचना जरूरी है।

जांच में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कोडीन सिरप की खरीद के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ, क्या कोई फर्जी बिल या कागजी लेन-देन किया गया और क्या किसी लाइसेंसधारी मेडिकल प्रतिष्ठान की भूमिका सामने आती है। फिलहाल पुलिस ने किसी मेडिकल स्टोर संचालक की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की है, लेकिन जांच का दायरा इस दिशा में भी बढ़ाया जा रहा है।

पर्दे के पीछे के चेहरे सामने आएंगे या मामला गिरफ्तारी तक सिमट जाएगा?

नशे के अवैध कारोबार की सबसे बड़ी ताकत उसका बिखरा हुआ नेटवर्क होता है। एक व्यक्ति माल लाता है, दूसरा उसे सुरक्षित रखता है, तीसरा स्थानीय स्तर पर सप्लाई करता है और चौथा उसे अंतिम खरीदार तक पहुंचाता है। ऐसे में गिरफ्तारी के बाद भी पूरा नेटवर्क सक्रिय रहने का खतरा बना रहता है।

मुरादाबाद पुलिस की इस कार्रवाई में फहीम की गिरफ्तारी, दो हजार बोतलों की बरामदगी और हरिद्वार के कथित सप्लायर का नाम सामने आना महत्वपूर्ण घटनाक्रम हैं। लेकिन असली सफलता तब मानी जाएगी, जब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर उसके वित्तीय और आपराधिक ढांचे तक पहुंचेगी।

आखिरकार सवाल तीन लाख रुपये की बरामद खेप का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो ऐसी खेपों को लगातार बाजार तक पहुंचाने की कोशिश करती है। यदि हरिद्वार से मुरादाबाद तक फैले इस कथित नेटवर्क के पीछे और लोग हैं, तो उन्हें भी कानून के दायरे में लाना होगा।

फिलहाल पुलिस के हाथ एक आरोपी और नशे की बड़ी खेप लगी है। दो आरोपी फरार हैं और कथित सप्लायर की तलाश बाकी है। अब देखना यह है कि जांच की आंच केवल फहीम, नवाज और आसिफ तक पहुंचती है या फिर उन चेहरों को भी बेनकाब करती है, जो पर्दे के पीछे बैठकर इस काले कारोबार की कथित सप्लाई चेन चला रहे थे।

क्योंकि नशे का कारोबार केवल बोतलों से नहीं चलता, उसके पीछे पैसों, पहुंच और संरक्षण की पूरी कहानी भी हो सकती है। और इस कहानी का सबसे अहम अध्याय अभी खुलना बाकी है।

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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