“पटना में कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर अमित शाह, नितिन नबीन, जेपी नड्डा, सम्राट चौधरी और योगी आदित्यनाथ ने खोला मोर्चा; भाजपा ने इसे राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन बताया, बयान को लेकर गरमाई सियासत”
पटना। बिहार की राजधानी पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई कथित विवादित टिप्पणी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। बयान में प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का जिक्र सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक ने इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक विरोध के दौरान मर्यादा की सीमाएं लांघ रही है।
इस विवाद ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में भाषा, शिष्टाचार और व्यक्तिगत टिप्पणियों की सीमा को बहस के केंद्र में ला दिया है। लोकतंत्र में सरकार की नीतियों, प्रधानमंत्री के फैसलों और सत्तारूढ़ दल के कामकाज पर सवाल उठाना विपक्ष का अधिकार है। लेकिन जब राजनीतिक बयानबाजी में किसी नेता के दिवंगत परिजनों का उल्लेख विवाद का विषय बन जाए, तो राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत आक्षेप के बीच अंतर को लेकर सवाल उठने लगते हैं। भाजपा इसी आधार पर कांग्रेस को घेर रही है और इसे केवल एक नेता का बयान नहीं, बल्कि पार्टी की राजनीतिक शैली से जोड़कर पेश कर रही है।
#WATCH | A ruckus broke out during Congress national president Mallikarjun Kharge’s address at the 139th birth anniversary celebration of Dr. Shri Krishna Singh in Patna, Bihar
A person present at the event said that PM Modi would not go anywhere, Kharge responded, “Modi ka baap bhi jayega.”
— ANI (@ANI) October 25, 2026
अमित शाह का हमला: कांग्रेस के पास मुद्दे नहीं, केवल आरोपों की राजनीति
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि खरगे ने पटना में प्रधानमंत्री मोदी के पिता के बारे में अभद्र टिप्पणी कर राजनीतिक मर्यादा का उल्लंघन किया है। शाह ने कहा कि यह पहला अवसर नहीं है, जब कांग्रेस नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री या उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हों।
शाह ने अपने बयान में प्रधानमंत्री की माता के संदर्भ में पूर्व में हुई विवादित बयानबाजी और उन्हें ‘मौत का सौदागर’ तथा ‘चायवाला’ कहे जाने जैसे राजनीतिक प्रसंगों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार ऐसी भाषा का इस्तेमाल कर रही है, जो राजनीतिक संवाद की गरिमा के अनुरूप नहीं है।
गृह मंत्री ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति को भी इस विवाद से जोड़ते हुए कहा कि लगातार चुनावी हार से पार्टी में हताशा और निराशा बढ़ी है। उनके अनुसार, कांग्रेस के पास अब न कोई प्रभावी नीति बची है और न ही ठोस मुद्दे, इसलिए वह व्यक्तिगत टिप्पणियों के सहारे राजनीति कर रही है।
शाह ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार को लेकर की गई टिप्पणियों का जवाब जनता चुनावों में देती रही है। हालांकि, ये शाह और भाजपा के राजनीतिक आरोप हैं; इन दावों का मूल्यांकन संबंधित चुनावी परिणामों, राजनीतिक परिस्थितियों और सार्वजनिक तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आज पटना में मोदी जी के पिताजी के बारे में अभद्र टिप्पणी कर सारी मर्यादाएँ तार-तार कर दी हैं।
यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस पार्टी ने मोदी जी या उनके परिवार को अपशब्द कहे हों। कभी उनकी पूजनीय माताजी के विषय में अपशब्द कहे, कभी उन्हें ‘मौत का सौदागर’ कहा, तो कभी ‘चायवाला’ कहकर उनकी गरीबी का उपहास उड़ाया। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी हर रोज अभद्रता की सीमाएँ पार करती जा रही है।
बीते 12 वर्षों में लगातार मिल रही चुनावी हार से कांग्रेस पार्टी में हताशा व निराशा इतनी बढ़ चुकी है कि अब उसके पास न कोई नीति बची है, न कोई मुद्दा, बस गाली-गलौज की राजनीति बची है। जनता के बीच जनाधार खो चुकी कांग्रेस, अब अपने कार्यकर्ताओं में भी आधार खोती जा रही है।
जब-जब इन्होंने मोदी जी या उनके परिवार पर घृणित टिप्पणियाँ की हैं, तब-तब जनता ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।
— Amit Shah (@AmitShah) October 25, 2026
नितिन नबीन बोले—राजनीतिक विरोध की भी होती है एक सीमा
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने खरगे की टिप्पणी को कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक मंच से दिवंगत परिजनों को राजनीतिक भाषणों में घसीटना स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
नबीन के अनुसार, जब विपक्ष के पास सरकार के विकास कार्यों, नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर बहस करने के लिए ठोस मुद्दे नहीं होते, तब वह व्यक्तिगत आरोपों का सहारा लेता है। उन्होंने इस बयान को कांग्रेस की राजनीतिक सोच और शिष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि जनता इस तरह की राजनीति को देख रही है और समय आने पर इसका जवाब देगी।
भाजपा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया का राजनीतिक संदेश स्पष्ट है—पार्टी इस विवाद को केवल एक टिप्पणी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे कांग्रेस की व्यापक राजनीतिक रणनीति के सवाल के रूप में सामने रख रही है। इससे विवाद का दायरा बढ़ गया है और दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना भी बनी हुई है।
आज पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति जिस प्रकार की अमर्यादित और असंसदीय भाषा का प्रयोग किया गया है, वह कांग्रेस के वैचारिक दिवालियापन को दर्शाता है।
राजनीतिक विरोध की भी एक गरिमा होती है, लेकिन सार्वजनिक मंच से स्वर्गीय परिजनों को भाषणों में घसीटना ही अब राहुल गांधी और समूचे विपक्ष का असली ‘संस्कार’ बन चुका है। यह खड़गे जी का व्यक्तिगत बयान नहीं, बल्कि पूरी कांग्रेस की शिष्टाचार-विहीन सोच का प्रकटीकरण है।
जब विपक्ष के पास देश के विकास, नीति और जनकल्याणकारी योजनाओं पर बहस करने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचता, तो वे इसी प्रकार की हताशा और व्यक्तिगत आक्षेपों का सहारा लेते हैं।
देश की जनता इस अमर्यादित राजनीति को भली-भांति देख रही है और समय आने पर इसका करारा जवाब देगी।
— Nitin Nabin (@NitinNabin) October 25, 2026
जेपी नड्डा ने कहा—नाराजगी जताइए, लेकिन मर्यादा मत तोड़िए
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी खरगे के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की जितनी आलोचना की जाए, कम है। नड्डा ने आरोप लगाया कि चुनावी असफलताओं से परेशान कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी और उनके परिवार को निशाना बनाकर अपनी राजनीतिक नाराजगी जाहिर कर रही है।
नड्डा ने प्रधानमंत्री के प्रति जनता के समर्थन का उल्लेख करते हुए कहा कि विपक्ष की भाषा और व्यवहार में उसकी निराशा दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की नीतियों का विरोध किया जा सकता है, लेकिन विरोध की आड़ में व्यक्तिगत मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के स्वर्गीय पिता जी के प्रति कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी की जितनी कड़ी निंदा की जाए, कम है।
लगातार चुनावी हार से हताश कांग्रेस अपनी राजनीतिक खुन्नस प्रधानमंत्री मोदी जी और उनके परिवार पर अनर्गल टिप्पणियों के माध्यम से निकाल रही है। देश और दुनिया में मोदी जी की बढ़ती लोकप्रियता और जनता के अटूट विश्वास से उपजी विपक्ष की बौखलाहट अब उसकी भाषा और व्यवहार में स्पष्ट दिखाई दे रही है।
140 करोड़ देशवासियों के जनादेश से चुने गए प्रधानमंत्री और उनके परिवार के प्रति ऐसी अमर्यादित बयानबाज़ी न केवल राजनीतिक संस्कारों की कमी दर्शाती है, बल्कि देश की जनता का भी अपमान है।
लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध कीजिए, लेकिन मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं। कांग्रेस को समझना होगा कि नफरत और अपमान की राजनीति से जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। देश की जनता ऐसी ओछी राजनीति का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देगी।
— Jagat Prakash Nadda (@JPNadda) October 25, 2026
भाजपा की ओर से लगातार आ रही प्रतिक्रियाओं में एक समान संदेश दिखाई देता है। पार्टी इस प्रकरण को राजनीतिक शिष्टाचार, सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारी और विपक्ष की भाषा से जोड़ रही है। हालांकि, विवाद के सभी पहलुओं का निष्पक्ष आकलन करने के लिए खरगे की टिप्पणी का पूरा संदर्भ और कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
सम्राट चौधरी ने खरगे और राहुल गांधी से मांगी माफी
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष की टिप्पणी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीति में प्रधानमंत्री के परिवार को लेकर दुर्भावना दिखाई देती है।
चौधरी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं को अपनी भाषा और व्यवहार के प्रति अधिक जिम्मेदार होना चाहिए।
बिहार की राजधानी में हुई टिप्पणी पर राज्य के मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया विशेष राजनीतिक महत्व रखती है। पटना में उठे इस विवाद को लेकर भाजपा बिहार की राजनीति में भी कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह मामला केवल राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित न रहकर राज्य की राजनीतिक बहस को भी प्रभावित कर सकता है।
पटना में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के पूज्य पिताजी के प्रति की गई अमर्यादित टिप्पणी स्वीकार्य नहीं।
कांग्रेस देश से माफी माँगे!
#ShameOnCongress https://t.co/I68FRMWNL4
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) October 25, 2026
योगी आदित्यनाथ ने बताया लोकतांत्रिक मर्यादा के खिलाफ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खरगे की टिप्पणी की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के प्रति अमर्यादित टिप्पणी बताते हुए अक्षम्य और घोर निंदनीय करार दिया। योगी ने कहा कि इस तरह की बयानबाजी देशवासियों की भावनाओं को आहत करती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा को नुकसान पहुंचाती है।
उन्होंने कांग्रेस से अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान पर कार्रवाई करने और देश से माफी मांगने की मांग की। योगी ने इस विवाद को कांग्रेस की कथित हताशा और वैचारिक कमजोरी से जोड़ते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
भारतीय राजनीति में ‘अपशब्द’ का पर्याय बन चुकी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा विश्व के सबसे लोकप्रिय राजनेता और भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दिवंगत पिता के प्रति की गई अमर्यादित टिप्पणी अक्षम्य और घोर निंदनीय है।
यह 145 करोड़ भारत वासियों की भावनाओं का अपमान है। भारतीय लोकतंत्र को शर्मसार करता यह कृत्य कांग्रेस की हताशा, निराशा, कुंठा और वैचारिक दिवालियापन का प्रमाण है।
कांग्रेस को अविलंब अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष पर कठोर कार्रवाई करते हुए पूरे देश से क्षमा मांगनी चाहिए।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 25, 2026
भाजपा नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से प्रमुखता दे रही है। अलग-अलग राज्यों के वरिष्ठ नेताओं की एक के बाद एक आई टिप्पणियां बताती हैं कि भाजपा इस बयान को लेकर कांग्रेस पर दबाव बढ़ाना चाहती है।
रामेश्वर शर्मा का तीखा प्रहार, भाषा पर छिड़ी बहस
भाजपा नेता रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर और भी तीखा हमला बोला। उन्होंने पार्टी के व्यवहार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक दल की तरह संवाद करने के बजाय आक्रामक और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने खरगे के वरिष्ठ राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनसे अधिक संयम और संसदीय परंपराओं के सम्मान की अपेक्षा की जाती है।
हालांकि, इस विवाद में भाजपा नेताओं की ओर से इस्तेमाल की जा रही भाषा भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है। एक ओर भाजपा कांग्रेस पर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगा रही है, वहीं दूसरी ओर दोनों दलों के नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी लगातार राजनीतिक माहौल को गर्म कर रही है। ऐसे समय में यह जरूरी है कि आलोचना तथ्यों और स्पष्ट तर्कों पर आधारित हो, न कि केवल व्यक्तिगत आरोपों की प्रतिस्पर्धा बनकर रह जाए।
बड़ा सवाल: क्या राजनीति में विरोध की सीमा तय होगी?
खरगे की टिप्पणी पर उठा विवाद एक बुनियादी सवाल खड़ा करता है—क्या भारतीय राजनीति में वैचारिक और नीतिगत विरोध को व्यक्तिगत हमलों से अलग रखा जा सकेगा? प्रधानमंत्री देश की निर्वाचित सरकार का नेतृत्व करते हैं। उनकी नीतियों, फैसलों, चुनावी वादों और प्रशासनिक प्रदर्शन की कठोर आलोचना लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा है। विपक्ष को सवाल पूछने, जवाब मांगने और सरकार की जवाबदेही तय करने का पूरा अधिकार है।
लेकिन इसी लोकतांत्रिक अधिकार के साथ सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी भी जुड़ी है। यदि किसी बयान में दिवंगत परिजन को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और संदर्भ के आधार पर आलोचना होनी चाहिए। साथ ही, किसी राजनीतिक आरोप को स्वतः कानूनी अपराध घोषित करना भी उचित नहीं होगा। किसी बयान की राजनीतिक रूप से निंदा होना और उसका कानून की दृष्टि से अपराध साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। कानूनी निष्कर्ष के लिए संबंधित कानून, बयान के वास्तविक शब्दों, संदर्भ और अन्य आवश्यक तथ्यों को देखना जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की ओर से स्पष्टीकरण या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर विवाद के दूसरे पक्ष को समझने में मदद मिलेगी। किसी भी निष्पक्ष समाचार आकलन के लिए खरगे के बयान का पूरा संदर्भ, कांग्रेस का पक्ष और भाजपा नेताओं के आरोप—तीनों को अलग-अलग परखना आवश्यक है।
बयान से आगे, राजनीतिक संस्कृति की परीक्षा
पटना में खरगे की टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई का रूप लेता दिखाई दे रहा है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की भाषा और राजनीतिक संस्कृति का मुद्दा बनाया है, जबकि इस प्रकरण का व्यापक महत्व इससे भी बड़ा है। देश की राजनीति में जनता को रोजगार, महंगाई, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और शासन जैसे सवालों पर ठोस जवाब चाहिए।
राजनीतिक दलों के लिए चुनौती यह है कि वे व्यक्तिगत कटाक्षों और आरोपों से आगे बढ़कर नीतियों तथा जनहित के मुद्दों पर बहस करें। प्रधानमंत्री की आलोचना हो या विपक्ष के किसी नेता पर सवाल, लोकतंत्र में किसी को भी जवाबदेही से छूट नहीं मिलनी चाहिए। लेकिन आलोचना की धार तथ्यों से मजबूत होती है, अपमानजनक भाषा से नहीं।
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस इस विवाद पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और क्या दोनों पक्ष बयानबाजी से आगे बढ़कर सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा पर कोई स्पष्ट संदेश देते हैं। फिलहाल, पटना से उठा यह विवाद राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर राजनीतिक शिष्टाचार, जवाबदेही और विरोध की सीमाओं पर बहस छेड़ चुका है।















