विदेश मंत्री एस. जयशंकर की घाना यात्रा के दौरान भारत और घाना के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। जयशंकर ने घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अब्लाक्वा से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दोनों देशों की साझेदारी को नए क्षेत्रों तक ले जाने और मौजूदा सहयोग को और गहरा करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घाना यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच बनी व्यापक साझेदारी को आगे बढ़ाना रहा। जयशंकर ने कहा कि भारत और घाना विकासशील देशों के रूप में कई समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दोनों देश अपने अनुभव साझा करके एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं और विकास की गति को तेज कर सकते हैं।
कृषि और जैव विविधता पर समझौते
भारत और घाना के बीच कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण तथा जैव विविधता के क्षेत्र में दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। कृषि के क्षेत्र में सहयोग को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। घाना की Feed Ghana जैसी पहल और भारत की कृषि से जुड़ी योजनाओं के बीच अनुभव साझा करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
जयशंकर ने भारत की मिलेट्स और किसानों की समृद्धि से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया। दोनों देशों के बीच कृषि अनुसंधान, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
स्वास्थ्य और डिजिटल क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग
बैठक में स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं तथा स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अनुभव घाना के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
इसके अलावा डिजिटल क्षेत्र और स्टार्टअप को लेकर भी दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई। जयशंकर ने भारत के डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकासशील देश डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर आर्थिक और सामाजिक बदलाव ला सकते हैं।
घाना की 10 लाख कोडर्स की पहल का भी उल्लेख किया गया। भारत के डिजिटल अनुभव से घाना को तकनीकी शिक्षा और डिजिटल कौशल बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
रक्षा, रेलवे और खनन पर भी बातचीत
भारत और घाना के बीच सहयोग का दायरा केवल कृषि और डिजिटल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। दोनों पक्षों ने खनन, रक्षा, रेलवे और स्वास्थ्य सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया।
रक्षा क्षेत्र में अनुभव साझा करने और क्षमता निर्माण की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हैं। वहीं रेलवे और खनन जैसे क्षेत्रों में भारत का तकनीकी अनुभव घाना के लिए उपयोगी हो सकता है।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
जयशंकर ने कहा कि भारत और घाना दोनों विकासशील देशों की साझा चुनौतियों को समझते हैं। ऐसे में दोनों देशों को ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार के मुद्दे पर भारत और घाना की सोच काफी समान बताई गई।
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग करता रहा है। घाना की भूमिका भी अफ्रीकी और वैश्विक मंचों पर महत्वपूर्ण है।
अफ्रीकी संगठनों में घाना की अहम भूमिका
जयशंकर ने अफ्रीकी यूनियन और ECOWAS में घाना की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। घाना आने वाले समय में अफ्रीकी यूनियन की अध्यक्षता संभालने वाला है। भारत के अफ्रीकी देशों और अफ्रीकी यूनियन के साथ लंबे समय से मजबूत संबंध रहे हैं।
भारत ने घाना द्वारा रिपेरेटरी जस्टिस और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी से जुड़े मुद्दों पर किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
बहुध्रुवीय दुनिया में भारत-घाना साझेदारी
जयशंकर ने कहा कि दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत और घाना जैसे देशों के लिए अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ऐसी आवाजों को मजबूत करना चाहिए जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर स्वतंत्र फैसले लेने में विश्वास रखती हैं। भारत-घाना की बढ़ती साझेदारी केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
भारत और घाना के बीच हुए नए समझौते और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की चर्चा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। कृषि से लेकर डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, रक्षा और वैश्विक कूटनीति तक सहयोग का बढ़ता दायरा आने वाले समय में भारत-घाना संबंधों को और मजबूत कर सकता है।















