“धनराज परिमल नथवानी की पोस्ट से विपक्षी खेमे में सवालों का तूफान—AIMIM के शादाब चौहान ने अखिलेश यादव को घेरा, पूछा- ‘क्या सपा भी मोदी सरकार के कामकाज को सेवा का संकल्प मानती है?’
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक समीकरण तेजी से करवट लेने लगे हैं। बयानबाजी, गठबंधन की संभावनाओं और नेताओं की सोशल मीडिया पोस्ट के बीच समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई तारीफ ने एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। जिस समय विपक्षी दल केंद्र की भाजपा सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, उसी दौर में सपा के राज्यसभा उम्मीदवार की ओर से प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को लेकर प्रशंसात्मक पोस्ट सामने आना विपक्षी राजनीति के लिए असहज करने वाला सवाल बन गया है।
धनराज परिमल नथवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के संदर्भ में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। इस पोस्ट में उन्होंने मोदी के नेतृत्व, समर्पण, सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता की खुलकर प्रशंसा की। नथवानी ने लिखा कि “नेतृत्व के 25 साल, समर्पण के 25 साल, सेवा के संकल्प के 25 साल” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को परिभाषित करते हैं।
नथवानी ने अपनी पोस्ट में वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के शपथ लेने से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने तक की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय और नई-नई चुनौतियों के बावजूद मोदी का विश्वास, दृढ़ता और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण एक जैसा रहा है।
पोस्ट के दूसरे हिस्से में नथवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्र सेवा में निरंतर शक्ति और सफलता की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने इस यात्रा को सेवा के संकल्प, राष्ट्रीय कर्तव्य और आगे बढ़ते भारत के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री के कार्यकाल की प्रशंसा की।
यहीं से सवाल खड़ा होता है—क्या यह महज एक व्यक्तिगत राजनीतिक टिप्पणी है या इसके पीछे कोई व्यापक राजनीतिक संदेश भी छिपा है?
सपा उम्मीदवार की पोस्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल
समाजवादी पार्टी लंबे समय से भाजपा और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को लेकर मुखर राजनीतिक विपक्ष की भूमिका में रही है। ऐसे में सपा द्वारा राज्यसभा के लिए घोषित उम्मीदवार की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर की इस तरह प्रशंसा किए जाने ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
खास तौर पर उत्तर प्रदेश में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि 2027 विधानसभा चुनाव अब बहुत दूर नहीं है। सपा और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला प्रदेश की सत्ता की लड़ाई का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। ऐसे समय में सपा के उम्मीदवार की मोदी की तारीफ को विपक्षी दल अपने-अपने राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं।
हालांकि, नथवानी की पोस्ट को सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी की आधिकारिक नीति या पार्टी नेतृत्व का बयान मानना उचित नहीं होगा। यह उनकी व्यक्तिगत सोशल मीडिया पोस्ट है। लेकिन राज्यसभा उम्मीदवार होने के कारण उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों का राजनीतिक महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है।
और इसी बिंदु ने विरोधियों को सपा नेतृत्व से सवाल पूछने का मौका दे दिया है।
AIMIM के शादाब चौहान ने अखिलेश यादव को सीधे घेरा
धनराज नथवानी की पोस्ट सामने आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने इसे लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सवाल किया।
शादाब चौहान ने सोशल मीडिया पोस्ट में अखिलेश यादव को टैग करते हुए पूछा कि क्या समाजवादी पार्टी भी मोदी सरकार की उन नीतियों और कानूनों का समर्थन करती है, जिनका AIMIM और अन्य विपक्षी दल विरोध करते रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सपा के राज्यसभा उम्मीदवार प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर को “सेवा का संकल्प” मानते हैं, तो क्या पार्टी भी इसी दृष्टिकोण से सहमत है?
यही नहीं, शादाब चौहान ने अपनी पोस्ट में वक्फ, UCC और CAA जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए सपा नेतृत्व से राजनीतिक स्पष्टीकरण की मांग की।
उनका हमला सिर्फ धनराज नथवानी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सीधे अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश का मुसलमान यह जानना चाहता है कि समाजवादी पार्टी की राजनीति भाजपा के खिलाफ है या भविष्य में किसी तरह के राजनीतिक समीकरण की संभावना के लिए दरवाजे खुले रखे जा रहे हैं।
‘मोदी से प्रेरित होकर गुजरात मॉडल मुजफ्फरनगर में लागू कराया?’—शादाब का तीखा सवाल
शादाब चौहान ने अपने बयान में इससे भी ज्यादा तीखा राजनीतिक सवाल खड़ा किया। उन्होंने अखिलेश यादव को टैग करते हुए पूछा कि क्या मोदी से प्रेरित होकर ही “गुजरात मॉडल मुजफ्फरनगर में लागू कराया था?”
यह टिप्पणी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है और इसे शादाब चौहान के राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस सवाल के जरिए समाजवादी पार्टी की भाजपा विरोधी राजनीति और उसके चुनावी व्यवहार के बीच कथित विरोधाभास को मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुस्लिम मतदाताओं का हवाला देते हुए सपा नेतृत्व से जवाब मांगने की बात कही और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चेतावनी भरे राजनीतिक अंदाज में कहा कि यदि जवाब नहीं मिला तो आगामी चुनाव में मतदाता इसका जवाब दे सकते हैं।
यानी धनराज नथवानी की एक सोशल मीडिया पोस्ट अब सिर्फ मोदी की तारीफ तक सीमित नहीं रही। इसने सपा की राजनीति, मुस्लिम मतदाताओं के भरोसे, भाजपा विरोध की उसकी रणनीति और 2027 के चुनावी समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सवाल सिर्फ तारीफ का नहीं, सियासी संदेश का भी
राजनीति में नेताओं के बयान अक्सर सिर्फ बयान नहीं होते। खासकर चुनावी माहौल में सोशल मीडिया की एक पोस्ट भी राजनीतिक संकेतों के रूप में पढ़ी जाती है। धनराज नथवानी की पोस्ट के साथ भी यही हो रहा है।
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के राजनीतिक सफर की प्रशंसा है, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी भाजपा को उत्तर प्रदेश में मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानकर चुनावी लड़ाई लड़ रही है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या नथवानी की टिप्पणी केवल व्यक्तिगत सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार है, या इसमें व्यापक राजनीतिक सोच का संकेत भी देखा जाना चाहिए?
इसका स्पष्ट उत्तर फिलहाल सिर्फ संबंधित नेता या पार्टी नेतृत्व ही दे सकता है।
साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी नेता द्वारा दूसरे नेता की प्रशंसा कर देना अपने आप में राजनीतिक गठजोड़ या नीतिगत समर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अंतिम राजनीतिक अर्थ उसके आगे के बयानों, पार्टी के आधिकारिक रुख और चुनावी रणनीति से ही निकाला जा सकता है।
2027 से पहले विपक्षी राजनीति के लिए बड़ा सवाल
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाता लंबे समय से समाजवादी पार्टी के महत्वपूर्ण चुनावी आधारों में गिने जाते हैं। ऐसे में AIMIM जैसे दलों की कोशिश रहती है कि सपा के भाजपा विरोधी रुख पर सवाल उठाकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की जाए।
शादाब चौहान का हमला इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
उनका निशाना केवल धनराज नथवानी नहीं हैं। असली राजनीतिक निशाना अखिलेश यादव हैं। सवाल यह है कि क्या अखिलेश यादव अपने उम्मीदवार की प्रधानमंत्री मोदी पर की गई प्रशंसा को लेकर कोई सफाई देंगे?
क्या सपा नेतृत्व कहेगा कि यह नथवानी की व्यक्तिगत राय है?
क्या पार्टी यह स्पष्ट करेगी कि मोदी सरकार की नीतियों को लेकर उसका आधिकारिक रुख पहले जैसा ही है?
या फिर इस मुद्दे पर पार्टी चुप रहकर विवाद को शांत होने देगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा की दिशा तय कर सकते हैं।
25 years of leadership. 25 years of dedication. 25 years of Seva ka Sankalp.
Since taking oath as the Chief Minister of Gujarat in 2001, Shri Narendra Modi has travelled a remarkable journey—from serving Gujarat to leading India as Prime Minister.
Through changing times and evolving challenges, his unwavering conviction, perseverance, and commitment to nation-building have remained constant.
Today, as we mark 25 years of public service, we celebrate a journey driven by one enduring spirit — Seva ka Sankalp, Rashtriya Kartavya and an unwavering commitment to a rising India.
Wishing Shri Narendra Modi ji continued strength and success in the service of the nation.
@narendramodi @PMOIndia
#SevaKaSankalp #25YearsOfSeva #PMModi #NarendraModi— Dhanraj Nathwani (@DhanrajNathwani) October 7, 2026
नथवानी की पोस्ट बनाम सपा की वैचारिक राजनीति
धनराज परिमल नथवानी का राज्यसभा उम्मीदवार बनना भी अपने आप में राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। अब प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा वाली उनकी पोस्ट ने इस चर्चा में एक और परत जोड़ दी है।
एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की खुलकर प्रशंसा, दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की भाजपा विरोधी राजनीति—इन दोनों तस्वीरों के बीच का अंतर विपक्षी दलों को हमला करने का अवसर दे रहा है।
लेकिन यहां राजनीतिक बहस को तथ्यों और बयानों की सीमा में रखना भी जरूरी है। नथवानी की पोस्ट से यह निष्कर्ष निकालना कि समाजवादी पार्टी ने भाजपा के साथ कोई समझौता कर लिया है, बिना ठोस प्रमाण के दावा होगा। इसी तरह किसी व्यक्तिगत पोस्ट को पार्टी की आधिकारिक नीति मान लेना भी राजनीतिक रूप से जल्दबाजी होगी।
फिर भी सवाल उठना स्वाभाविक है, क्योंकि नथवानी कोई सामान्य सोशल मीडिया यूजर नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार हैं।
अखिलेश के सामने दोहरी चुनौती
इस पूरे विवाद ने अखिलेश यादव के सामने दोहरी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
पहली चुनौती भाजपा के खिलाफ अपनी राजनीतिक लाइन को स्पष्ट बनाए रखने की है।
दूसरी चुनौती उन विपक्षी दलों के हमलों का जवाब देने की है, जो सपा पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को अपना आधार मानती है, लेकिन चुनावी राजनीति में उनके मुद्दों पर अपेक्षित स्पष्टता नहीं दिखाती।
AIMIM इस मुद्दे को 2027 से पहले बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश कर सकती है।
यदि सपा नेतृत्व इस पर सफाई देता है तो बहस आगे बढ़ सकती है। यदि चुप रहता है तो विरोधी दल इसे अपने तरीके से राजनीतिक संदेश के रूप में पेश कर सकते हैं।
पर्दाफाश का सवाल: क्या यह सिर्फ प्रशंसा है या कोई बड़ा राजनीतिक संकेत?
धनराज परिमल नथवानी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई प्रशंसा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक असहज सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
क्या विपक्षी खेमे के भीतर मोदी के नेतृत्व को लेकर सोच बदल रही है?
या फिर यह सिर्फ एक नेता की व्यक्तिगत राजनीतिक प्रशंसा है?
क्या समाजवादी पार्टी इसे व्यक्तिगत टिप्पणी मानकर आगे बढ़ जाएगी?
क्या अखिलेश यादव अपने उम्मीदवार की पोस्ट पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया देंगे?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या 2027 के चुनाव से पहले ऐसे बयान विपक्षी वोट बैंक की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं?
फिलहाल इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं।
लेकिन इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में अब हर बयान का हिसाब रखा जाएगा और हर सोशल मीडिया पोस्ट को राजनीतिक संदेश की कसौटी पर परखा जाएगा।
धनराज नथवानी की पोस्ट ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ से शुरुआत की थी, लेकिन AIMIM के हमले के बाद यह मामला अब अखिलेश यादव की राजनीतिक जवाबदेही और सपा की भाजपा विरोधी रणनीति तक पहुंच गया है।
2027 की लड़ाई अभी दूर है, लेकिन उसके राजनीतिक संकेतों की पटकथा लिखी जाने लगी है।
और इस पटकथा में सबसे बड़ा सवाल यही है—















