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ईरान के खतरे से ब्रिटेन से हटाए गए अमेरिकी B-1 बॉम्बर! ट्रंप बोले- खतरा था तो वहां क्यों रखते?

RAF Fairford से अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों की वापसी पर डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार खुलकर दी सफाई, बोले- खतरे का अंदाजा था, इसलिए विमानों को सुरक्षित स्थान पर भेजा

लंदन/वॉशिंगटन:

ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस से अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों को अचानक हटाए जाने को लेकर चल रही अटकलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने सोमवार को पुष्टि की कि अमेरिकी बमवर्षक विमानों को ब्रिटेन से वापस बुलाया गया था। उन्होंने इसकी वजह संभावित सुरक्षा खतरे को बताया और कहा कि जब किसी ठिकाने पर खतरे की आशंका हो तो वहां रणनीतिक विमानों को रखना उचित नहीं है।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिका को वहां संभावित खतरे का अंदाजा था। ऐसे में विमानों को दूसरे सुरक्षित स्थान पर भेजना ज्यादा समझदारी थी। उन्होंने यह भी कहा कि विमानों को स्थानांतरित करने में बहुत ज्यादा खर्च नहीं आता।

‘जब खतरा हो तो विमान वहां क्यों रखें?’

RAF Fairford से B-1 बॉम्बर्स हटाए जाने को लेकर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को संभावित खतरे की जानकारी थी। उनका तर्क था कि यदि किसी सैन्य ठिकाने को धमकी मिल रही हो तो वहां महंगे और महत्वपूर्ण युद्धक विमानों को तैनात रखने का कोई कारण नहीं है।

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी अधिकारियों को धमकी देने वाले लोगों के बारे में जानकारी है। जब उनसे पूछा गया कि क्या इन लोगों का ईरान से संबंध है, तो उन्होंने कहा कि उनका ईरान से संबंध हो सकता है।

RAF Fairford क्यों है इतना अहम?

ब्रिटेन का RAF Fairford अमेरिकी वायुसेना के लिए एक महत्वपूर्ण एयरबेस माना जाता है। यहां से अमेरिकी रणनीतिक बमवर्षक विमानों का संचालन किया जाता रहा है। हाल के समय में मध्य पूर्व में बढ़े सैन्य तनाव के बीच इस एयरबेस की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार, हाल ही में यहां तैनात अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों को वापस अमेरिका स्थित सैन्य ठिकानों पर भेज दिया गया। इन विमानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में भी किया गया था।

ऐसे में विमानों को अचानक हटाए जाने से यह सवाल उठने लगा था कि क्या अमेरिका को किसी बड़े हमले या सुरक्षा खतरे की आशंका है।

एयरबेस पर संदिग्ध घटना के बाद बढ़ी चिंता

अमेरिकी विमानों की वापसी ऐसे समय हुई जब RAF Fairford से जुड़ी एक सुरक्षा घटना की जांच चल रही थी। इसी बीच ब्रिटेन में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को कथित आतंकी साजिश के संदेह में गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई।

सितंबर में RAF Fairford से जुड़ी सुरक्षा घटना के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इन घटनाओं ने एयरबेस की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी।

जेडी वेंस ने भी बताया एहतियाती कदम

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी B-1 बॉम्बर्स को हटाए जाने के फैसले को एहतियाती कदम बताया। उन्होंने ईरान पर अमेरिका और दूसरे देशों के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।

वेंस के मुताबिक अमेरिका स्थिति पर बेहद सतर्क नजर रख रहा है। उनका बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा पश्चिमी देशों में संभावित ईरानी गतिविधियों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरत रही हैं।

मार्को रुबियो ने सीधे संबंध से किया इनकार

हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस पूरे मामले को लेकर एक अलग तस्वीर पेश की। उन्होंने B-1 बॉम्बर विमानों की वापसी और कथित ईरानी साजिश के बीच सीधे संबंध से इनकार किया।

रुबियो के मुताबिक अमेरिकी रक्षा विभाग अपनी सैन्य जरूरतों के हिसाब से लगातार अलग-अलग स्थानों पर संसाधनों को स्थानांतरित करता रहता है। इसलिए केवल विमानों की वापसी के आधार पर किसी एक कारण को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।

ईरान ने आरोपों पर उठाए सवाल

दूसरी ओर ईरान ने ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे संकेतों और आरोपों पर सवाल उठाए हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया के जरिए ब्रिटेन के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विदेशी राज्यों के लिए काम करने वाले कथित आतंकवादियों की रिहाई से कई सवाल खड़े होते हैं।

ईरान की ओर से लगातार यह संकेत दिया जा रहा है कि उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को राजनीतिक और सुरक्षा दबाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

क्या B-1 बॉम्बर हटाना बड़े खतरे का संकेत है?

अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों की RAF Fairford से वापसी ने निश्चित रूप से सुरक्षा को लेकर सवाल बढ़ा दिए हैं। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों के बयानों में इसे मुख्य रूप से एहतियाती कदम बताया गया है।

एक तरफ ट्रंप ने संभावित खतरे की बात स्वीकार की है, वहीं रुबियो ने विमानों की वापसी को किसी कथित ईरानी साजिश से सीधे जोड़ने से इनकार किया है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विमानों की वापसी केवल सामान्य सैन्य पुनर्तैनाती थी या इसके पीछे कोई विशिष्ट सुरक्षा खुफिया इनपुट भी था।

फिलहाल इतना जरूर है कि RAF Fairford से अमेरिकी B-1 बॉम्बर विमानों की वापसी ने अमेरिका-ब्रिटेन और ईरान के बीच बढ़ते सुरक्षा तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में जांच और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट से इस फैसले की वास्तविक वजह और अधिक स्पष्ट हो सकती है।

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