नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल सप्लाई पर साफ दिखाई देने लगा है। एक तरफ होर्मुज स्ट्रेट में तेल की आवाजाही पर संकट गहराता जा रहा है, तो दूसरी तरफ ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने अपनी बेहद अहम ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। यही पाइपलाइन सऊदी अरब को होर्मुज स्ट्रेट से बचते हुए लाल सागर के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कच्चा तेल पहुंचाने का विकल्प देती है।
मामला यहीं नहीं रुकता। यमन के हूती लड़ाकों के मायून यानी पेरिम द्वीप पर कब्जे की खबर ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के समुद्री रास्ते को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में दुनिया के दो महत्वपूर्ण तेल और शिपिंग मार्गों पर एक साथ दबाव बनने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है।
ड्रोन हमले के बाद सऊदी ने बंद की पाइपलाइन
गुरुवार को कई ड्रोन ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन को निशाना बनाया। हमले के बाद सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला किया।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में पाइपलाइन से जुड़े कुछ पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में एक स्टेशन पर आग और दूसरे स्थान से काला धुआं दिखाई देने की बात सामने आई है।
सऊदी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन इराक से आए थे और हमले में कुछ लोग घायल हुए हैं। नुकसान की मरम्मत का काम किया जा रहा है।
सऊदी के लिए क्यों इतनी अहम है ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन?
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को सऊदी अरब के लिए होर्मुज का वैकल्पिक रास्ता माना जाता है। यह देश के पूर्वी हिस्से के तेल उत्पादक क्षेत्रों से कच्चे तेल को लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है।
इसका रणनीतिक महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में संकट की स्थिति में सऊदी अरब इस पाइपलाइन के जरिए तेल को वैकल्पिक समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेज सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून की शुरुआत तक इस पाइपलाइन के जरिए यानबू तक तेल की आवाजाही 50 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गई थी।
यानी अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो ऐसे समय में सऊदी अरब की वैकल्पिक तेल सप्लाई क्षमता पर भी दबाव पड़ सकता है।
लाल सागर में भी बढ़ा खतरा
उधर यमन के हूती लड़ाकों के मायून द्वीप पर कब्जे की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। यह छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण द्वीप बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के बीच स्थित है।
बाब-अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। यहां अस्थिरता बढ़ने का सीधा असर तेल और अन्य सामान ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही पर पड़ सकता है।
हूतियों के हमलों के बाद पहले ही इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही में बड़ी गिरावट देखी जा चुकी है।
तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
होर्मुज और लाल सागर दोनों मोर्चों पर बढ़ते जोखिम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। इस सप्ताह तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
अगर तेल की सप्लाई में लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो कीमतों में और तेजी की आशंका बढ़ सकती है। इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पेट्रोल-डीजल, परिवहन, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
सऊदी ने दिखाई संयम की नीति
ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब ने तत्काल जवाबी हमला नहीं करने का फैसला किया है। सऊदी के मुताबिक, इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध पर उसे अपनी जमीन से होने वाले हमलों को रोकने का मौका दिया जा रहा है।
इराक ने भी हमले की निंदा करते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
इस बीच ईरान की ओर से सऊदी अरब से हूती नियंत्रित इलाकों की नाकाबंदी खत्म करने और बातचीत शुरू करने की अपील की गई है। सऊदी अरब ने बातचीत के लिए तैयार होने की बात कही है, लेकिन साथ ही अपने बचाव के अधिकार को भी स्पष्ट रखा है।
एक साथ दो समुद्री रास्तों पर संकट
मौजूदा हालात में सबसे बड़ी चिंता यही है कि होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब—दोनों महत्वपूर्ण रास्तों पर दबाव बढ़ रहा है। ऊपर से सऊदी अरब की उस पाइपलाइन को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है, जिसे होर्मुज के विकल्प के तौर पर देखा जाता है।
अगर यह स्थिति लंबी खिंचती है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल सप्लाई चेन और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव वैश्विक तेल संकट में बदलने जा रहा है?














