काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और तबाही के 12 दिन बाद भी करीब 5,000 लोगों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। कई परिवार अब भी अपनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दूसरी ओर, एक बड़ा कानूनी सवाल सामने है—अगर किसी व्यक्ति का लंबे समय तक पता न चले और उसका शव भी बरामद न हो, तो उसे कानूनी तौर पर मृत कब माना जाता है?
नेपाल के कानून में ऐसी परिस्थितियों के लिए न्यायिक प्रक्रिया का प्रावधान है।
आपदा में लापता व्यक्ति को लेकर क्या कहता है नेपाल का कानून?
नेपाल की National Civil Code की धारा 40(4) के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी दुर्घटना या आपदा के दौरान लापता हो जाता है और परिस्थितियां उसकी मृत्यु की ओर इशारा करती हैं, तो संबंधित व्यक्ति के परिजन या इच्छुक पक्ष अदालत में उसकी मृत्यु की न्यायिक घोषणा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
खास बात यह है कि इस प्रावधान के तहत कोई निश्चित न्यूनतम दिन या महीने की प्रतीक्षा अवधि निर्धारित नहीं है। आवेदन में व्यक्ति के लापता होने की परिस्थितियों के साथ उसकी संभावित मृत्यु की तारीख, स्थान और कारण से जुड़ी जानकारी देनी होती है।
इसके बाद अदालत उपलब्ध सबूतों और परिस्थितियों की जांच के आधार पर फैसला करती है कि व्यक्ति को कानूनी तौर पर मृत घोषित किया जाए या नहीं।
शव नहीं मिला तो क्या मृत्यु की घोषणा हो सकती है?
हां, कुछ परिस्थितियों में शव बरामद न होने के बावजूद अदालत मृत्यु की न्यायिक घोषणा कर सकती है। हालांकि, यह अपने-आप नहीं होता। अदालत को उपलब्ध परिस्थितियों और सबूतों के आधार पर संतुष्ट होना पड़ता है।
यानी किसी व्यक्ति के सिर्फ लंबे समय तक गायब रहने से उसकी मृत्यु स्वतः कानूनी रूप से साबित नहीं हो जाती।
अगर लापता व्यक्ति जिंदा लौट आए तो?
मान लीजिए अदालत किसी लापता व्यक्ति को मृत घोषित कर देती है और बाद में वह व्यक्ति जीवित वापस आ जाता है। ऐसी स्थिति में न्यायिक मृत्यु घोषणा को रद्द कराने के लिए कानूनी रास्ता मौजूद है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नेपाल की Civil Code की धारा 41(b) के तहत संबंधित पक्ष को व्यक्ति के जीवित होने की जानकारी मिलने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर अदालत का रुख करना होता है।
इसका मतलब है कि कानून ऐसी स्थिति में भी सुधार का रास्ता देता है, जहां बाद में पता चले कि मृत घोषित किया गया व्यक्ति वास्तव में जीवित है।
नेपाल बाढ़ में हजारों लोग अब भी लापता
26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। अचानक बढ़े जलस्तर, मलबे और बाढ़ के तेज बहाव ने घरों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।
बचाव एजेंसियां लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। कुछ लोगों को सुरक्षित भी निकाला गया है, लेकिन हजारों परिवारों को अब भी अपने परिजनों की कोई खबर नहीं मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लापता लोगों में करीब 600 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
शवों की पहचान बनी बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं, जिनमें कई की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। नेपाल पुलिस ने अज्ञात शवों से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक की है, ताकि परिवार अपने लापता सदस्यों की पहचान कर सकें।
राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ शवों की पहचान और उनके सुरक्षित प्रबंधन का काम भी जारी है।
परिवारों के सामने उम्मीद और कानून, दोनों की चुनौती
किसी प्राकृतिक आपदा के बाद लापता व्यक्ति के परिवार के लिए सबसे मुश्किल स्थिति वह होती है, जब न तो उसके जीवित होने की खबर मिले और न ही शव बरामद हो।
ऐसे मामलों में कानून परिवारों को एक कानूनी रास्ता देता है, लेकिन किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने का फैसला सबूत और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होता है।
फिलहाल नेपाल में हजारों परिवार अपने अपनों की वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं और राहत-बचाव दल लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।बेहतर हेडलाइन:
“नेपाल में 5000 लोग लापता! शव नहीं मिला तो कब मृत मानेगा कानून?”














