इस्लामाबाद/नई दिल्ली: जमीन का मालिकाना सिर्फ संपत्ति रखने का अधिकार नहीं है। यह किसी व्यक्ति की आर्थिक सुरक्षा, कर्ज तक पहुंच और परिवार में फैसले लेने की क्षमता से भी जुड़ा होता है। लेकिन पाकिस्तान में महिलाओं की जमीन पर हिस्सेदारी बेहद कम है। एक हालिया अध्ययन के मुताबिक, 15 से 49 साल की कभी शादीशुदा पाकिस्तानी महिलाओं में सिर्फ करीब 2% महिलाएं अकेले या संयुक्त रूप से जमीन की मालिक हैं।
इसके उलट भारत में महिलाओं की स्थिति पाकिस्तान से काफी बेहतर दिखाई देती है, हालांकि यहां भी पुरुषों और महिलाओं के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।
पाकिस्तान में खेतों में महिलाएं, लेकिन जमीन पर अधिकार बेहद कम
पाकिस्तान की स्थिति का सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं कृषि क्षेत्र में काम करती हैं, लेकिन जमीन के मालिकाना हक में उनकी भागीदारी बेहद सीमित है।
SDPI की स्टडी के अनुसार, पाकिस्तान में रोजगार करने वाली महिलाओं में करीब 67% कृषि क्षेत्र में काम करती हैं, लेकिन सिर्फ लगभग 2% महिलाओं के पास जमीन अकेले या संयुक्त रूप से है। वहीं, 97.2% महिलाओं ने बताया कि उन्हें जमीन या घर विरासत में नहीं मिला।
सिंध प्रांत में स्थिति और भी गंभीर बताई गई है, जहां 99.1% महिलाओं के पास अकेले या संयुक्त रूप से जमीन नहीं है।
बैंकिंग में भी महिलाओं की हिस्सेदारी कम
सिर्फ जमीन ही नहीं, पाकिस्तान में महिलाओं की वित्तीय पहुंच भी पुरुषों के मुकाबले काफी कम है।
आंकड़ों के मुताबिक, जहां 56% पुरुषों के पास फुल-सर्विस बैंकिंग अकाउंट है, वहीं महिलाओं में यह आंकड़ा सिर्फ 14% है। मोबाइल वॉलेट के मामले में भी पुरुषों की हिस्सेदारी करीब 48%, जबकि महिलाओं की सिर्फ 11% है।
यानी कृषि और घरेलू अर्थव्यवस्था में महिलाओं की बड़ी भूमिका होने के बावजूद संपत्ति और वित्तीय संसाधनों पर उनका नियंत्रण सीमित है।
भारत में महिलाओं की स्थिति पाकिस्तान से बेहतर
भारत में महिलाओं के जमीन मालिकाने की तस्वीर पाकिस्तान से बेहतर है, लेकिन यहां भी लैंगिक अंतर काफी बड़ा है।
World Bank Gender Data Portal के मुताबिक, 2021 में भारत में 15 से 49 साल की करीब 9.5% महिलाओं के पास जमीन अकेले उनके नाम थी, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 29.7% था।
वहीं, NFHS-5 (2019-21) के अनुसार भारत में 31.7% महिलाओं के पास जमीन अकेले या संयुक्त रूप से थी। पुरुषों में यह आंकड़ा 42.3% था।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—World Bank और NFHS के आंकड़ों की परिभाषा और मापने का तरीका अलग है। इसलिए पाकिस्तान के 2% आंकड़े की तुलना भारत के 31.7% आंकड़े से सीधे करना पूरी तरह उचित नहीं होगा। समान स्रोत और समान इंडिकेटर से तुलना ज्यादा सटीक रहती है।
दुनिया के दूसरे देशों में महिलाओं का जमीन मालिकाना
World Bank के समान इंडिकेटर के आंकड़ों को देखें तो कई देशों में महिलाओं का जमीन पर अकेला मालिकाना बेहद कम है।
– पाकिस्तान: 1.2% (2018)
– भारत: 9.5% (2021)
– इंडोनेशिया: 12.7% (2017)
– नेपाल: 9.7% (2022)
– इथियोपिया: 15.2% (2016)
– फिलीपींस: 1.4% (2022)
– आर्मेनिया: 1.6% (2016)
– मॉरिटानिया: 1.8% (2021)
– जॉर्डन: 3% (2023)
– मलावी: 36.6% (2016)
– तिमोर-लेस्ते: 29.8% (2016)
इन आंकड़ों से पता चलता है कि महिलाओं के जमीन मालिकाने की स्थिति दुनिया भर में एक जैसी नहीं है। कुछ देशों में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी कम है, जबकि कुछ देशों में यह अपेक्षाकृत ज्यादा है।
भारत में महिलाओं की संपत्ति बढ़ाने के लिए क्या कदम?
भारत में महिलाओं के संपत्ति अधिकार और मालिकाने को बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से कई कदम उठाए गए हैं।
PMAY-Gramin में घर का आवंटन महिला के नाम या पति-पत्नी के संयुक्त नाम पर करने का प्रावधान है। वहीं PMAY-Urban में भी महिला परिवार प्रमुख को मालिक या सह-मालिक बनाने की व्यवस्था है।
इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड में जेंडर कॉलम शामिल करने की दिशा में भी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कदम उठाने को कहा गया है। इससे महिला जमीन मालिकों की पहचान और रिकॉर्डिंग बेहतर हो सकती है।
क्यों जरूरी है महिलाओं का जमीन पर अधिकार?
जमीन का मालिकाना महिलाओं को सिर्फ संपत्ति नहीं देता, बल्कि उन्हें आर्थिक सुरक्षा और परिवार में अधिक निर्णय लेने की ताकत भी देता है। संकट, बेरोजगारी या आर्थिक झटकों के समय जमीन और घर जैसी संपत्ति महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकती है।
पाकिस्तान के आंकड़े यह सवाल जरूर उठाते हैं कि जब महिलाएं कृषि में बड़ी भूमिका निभाती हैं, तो जमीन के मालिकाना हक में उनकी हिस्सेदारी इतनी कम क्यों है?
वहीं भारत की स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर होने के बावजूद आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं को संपत्ति के मामले में पुरुषों के बराबर लाने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।














