Wednesday, September 2, 2026
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सिकंदराबाद छावनी में सेना के हथियारों की चोरी से हड़कंप, 4 AK-203 समेत राइफल-पिस्तौल और भारी मात्रा में गोला-बारूद गायब

“मद्रास रेजिमेंट के स्टोरेज बैरक के ताले तोड़कर हथियार ले जाने का आरोप; सेना ने शुरू की आंतरिक जांच, पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच तेज की”

सिकंदराबाद/हैदराबाद: तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित सेना की छावनी से हथियारों और गोला-बारूद के गायब होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मद्रास रेजिमेंट की 20वीं बटालियन के परिसर में बने हथियार स्टोरेज बैरक से असॉल्ट राइफल, पिस्तौल, मैगजीन और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद गायब होने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही सेना के अधिकारियों में हड़कंप मच गया और पूरे स्टॉक तथा संबंधित दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया गया।

सेना की ओर से मामले की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस ने हथियार और गोला-बारूद चोरी होने का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं, सेना ने भी अपने स्तर पर आंतरिक जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षित माने जाने वाले स्टोरेज क्षेत्र से हथियार आखिर किस तरह गायब हुए और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चोरी गए हथियारों में 4 AK-203 असॉल्ट राइफल, एक INSAS राइफल और 6 नौ एमएम पिस्तौल शामिल होने की बात सामने आई है। इसके अलावा बड़ी संख्या में मैगजीन और गोला-बारूद भी गायब मिला। दूसरी ओर, पुलिस में दर्ज FIR में हथियारों की संख्या अलग बताई गई है, जिसमें 5 असॉल्ट राइफल, 7 पिस्तौल, 21 मैगजीन, हथियारों का गोला-बारूद और एक पैसिव नाइट विजन दूरबीन के गायब होने का उल्लेख है। हथियारों की अंतिम संख्या की पुष्टि जांच और स्टॉक के पुनः सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

ताले टूटे मिले, बैरक के अंदर से गायब थे हथियार

जानकारी के मुताबिक, हथियारों का स्टोरेज बैरक सेना के परिसर के भीतर स्थित है। यहां सैन्य हथियारों और गोला-बारूद को सुरक्षित रखा जाता है। चोरी का पता तब चला जब सेना के जवान और अधिकारी नियमित प्रक्रिया के तहत ‘कोट और बटालियन मैगजीन’ यानी हथियार एवं गोला-बारूद के स्टोरेज क्षेत्र को खोलने पहुंचे।

इस दौरान स्टोरेज सुविधा के दरवाजे के ताले टूटे मिले। अंदर जाकर जांच करने पर हथियारों, मैगजीन और गोला-बारूद के स्टॉक में कमी सामने आई। इसके बाद तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई और पूरे क्षेत्र की जांच शुरू कर दी गई।

घटना सामने आने के बाद सेना ने स्टोरेज क्षेत्र तथा आसपास के परिसरों की तलाशी ली। हथियारों और गोला-बारूद के रिकॉर्ड का मिलान किया गया और यह पता लगाने की कोशिश की गई कि स्टॉक में कमी कब और किस चरण में हुई।

आखिरी बार 30 अगस्त की शाम हुई थी हथियारों की गिनती

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, संबंधित हथियारों और अन्य सैन्य सामग्री की आखिरी बार गिनती 30 अगस्त को शाम करीब छह बजे की गई थी। इसके बाद अगली जांच के दौरान हथियारों के गायब होने की बात सामने आई।

हालांकि, हथियारों के गायब होने का सटीक समय अभी तक निर्धारित नहीं किया जा सका है। पुलिस के अनुसार, यह भी स्पष्ट नहीं है कि चोरी कब हुई और स्टोरेज बैरक में संदिग्ध लोग किस तरह प्रवेश करने में सफल रहे।

शिकायत में सेना की ओर से पुलिस से तत्काल कार्रवाई करते हुए गायब हथियारों और गोला-बारूद को बरामद करने तथा घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने का अनुरोध किया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

सेना की छावनी में हथियारों और गोला-बारूद के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था बेहद संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में स्टोरेज बैरक के ताले टूटे मिलने और हथियारों के गायब होने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र में मुख्य रूप से सेना के जवानों और अधिकृत कर्मचारियों की आवाजाही होती है। ऐसे में जांच एजेंसियां इस बात पर भी ध्यान दे रही हैं कि स्टोरेज क्षेत्र तक पहुंच किस-किस व्यक्ति की थी और वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम मौजूद थे।

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि स्टोरेज बैरक में प्रवेश करने के लिए इस्तेमाल किए गए रास्ते, ताले और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई कमी तो नहीं थी। पुलिस और सेना यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह वारदात किसी बाहरी व्यक्ति ने की या इसमें अंदर के किसी व्यक्ति की भूमिका हो सकती है।

सेना ने पूरे स्टॉक का दोबारा किया सत्यापन

हथियारों के गायब होने की जानकारी मिलते ही सेना ने पूरे स्टॉक और रिकॉर्ड का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया। केवल गायब हथियारों की तलाश ही नहीं की गई, बल्कि संबंधित स्टोरेज क्षेत्रों, दस्तावेजों और आसपास के परिसरों की भी जांच की गई।

सेना के अधिकारियों ने चेन ऑफ कमांड और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। जरूरत पड़ने पर इलाके को सुरक्षित अथवा सील करने जैसे कदम भी उठाए गए, ताकि किसी तरह के साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।

आंतरिक जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि हथियारों की सुरक्षा और रिकॉर्ड-रखरखाव की प्रक्रिया में कहां चूक हुई। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि निर्धारित समय पर हथियारों की गिनती और स्टोरेज की निगरानी सही तरीके से हुई थी या नहीं।

पुलिस की जांच में कई पहलुओं पर फोकस

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है। पुलिस अधिकारी फिलहाल चोरी के सही समय, स्टोरेज बैरक में प्रवेश, ताले टूटने की परिस्थितियों और गायब हथियारों की वास्तविक संख्या की जांच कर रहे हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस घटना में दो से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े संभावित साक्ष्यों को जुटाने और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। स्टोरेज क्षेत्र में आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित जानकारियों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

मामला बोलारम पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है, जो हैदराबाद के मलकजगिरी पुलिस कमिश्नरेट जोन का हिस्सा है। सेना की ओर से 20वीं मद्रास रेजिमेंट के एक लेफ्टिनेंट कर्नल ने शिकायत दर्ज कराई है।

चार लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर

घटना के बाद जांच एजेंसियों ने पूछताछ के लिए कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में चार लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उनकी भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्टों में चोरी गए हथियारों के बरामद होने का भी दावा किया गया है। पुलिस की जांच के साथ इस दावे की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। हथियारों की बरामदगी, यदि हुई है, तो जांच में एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जाएगी और इससे चोरी की पूरी कड़ी का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

हथियारों की चोरी ने बढ़ाई चिंता

सेना के किसी सुरक्षित परिसर से सर्विस हथियारों और गोला-बारूद के गायब होने की घटना सामान्य चोरी के मामलों से कहीं अधिक गंभीर मानी जाती है। ऐसे हथियारों के गलत हाथों में पहुंचने की आशंका सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय होती है। यही वजह है कि घटना सामने आते ही सेना और पुलिस दोनों ने जांच को प्राथमिकता दी है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हथियारों को स्टोरेज से बाहर निकालने में कितना समय लगा होगा, चोरी में कितने लोग शामिल थे और क्या आरोपियों को हथियारों तथा स्टोरेज व्यवस्था की पहले से जानकारी थी।

इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि चोरी के बाद हथियारों को कहां ले जाया गया और क्या उन्हें छावनी परिसर से बाहर ले जाने के लिए किसी विशेष रास्ते का इस्तेमाल किया गया।

‘जांच चल रही है’, बोले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी

घटना को लेकर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है। पुलिस फिलहाल उपलब्ध तथ्यों और शिकायत के आधार पर आगे बढ़ रही है। हथियारों की वास्तविक संख्या, चोरी का समय और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सेना की ओर से भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। आंतरिक जांच के जरिए सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों की पहचान की जा रही है। इसके अलावा स्टोरेज क्षेत्रों की सुरक्षा और हथियारों के रिकॉर्ड को लेकर भी विस्तृत समीक्षा की जा रही है।

हथियारों की गिनती से लेकर सुरक्षा तक, हर पहलू की जांच

घटना के बाद सेना ने हथियारों और गोला-बारूद के स्टॉक का दोबारा मिलान किया है। संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई है और अधिकृत स्टोरेज क्षेत्रों तथा आसपास के परिसरों की तलाशी ली गई है।

जांच का सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि आखिर सुरक्षित सैन्य परिसर में रखे हथियारों तक किसी की पहुंच कैसे हुई। अगर सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक सामने आती है तो भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव किए जा सकते हैं।

फिलहाल पुलिस और सेना दोनों की जांच जारी है। गायब हथियारों की पूरी सूची, चोरी का सही समय, आरोपियों की संख्या और हथियारों की बरामदगी से जुड़े तथ्य जांच आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होने की उम्मीद है।

सिकंदराबाद छावनी की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों में हथियारों और गोला-बारूद की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि चोरी की इस वारदात के पीछे कौन था, स्टोरेज बैरक तक पहुंच कैसे बनाई गई और सैन्य हथियारों के इस बड़े जखीरे को गायब करने की पूरी साजिश किस तरह अंजाम दी गई।

 

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VIKAS TRIPATHI
VIKAS TRIPATHIhttp://www.pardaphaas.com
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