“सरकारी नाम का निजी इस्तेमाल बना चिंता का विषय, आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने पुलिस और यातायात विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग की”
नोएडा। शहर की सड़कों पर नियमों की अनदेखी का एक ऐसा चलन सामने आ रहा है, जो महज यातायात उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है। निजी वाहनों पर ‘भारत सरकार’ या ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखवाकर चलना, कारों के शीशों पर प्रतिबंधित काली फिल्म लगाना और भारी-भरकम ट्रैक्टरों को बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ाना अब आम नागरिकों के बीच चिंता का कारण बनता जा रहा है। आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए नोएडा पुलिस और यातायात विभाग से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 के अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय का कहना है कि सड़क पर चलने वाला प्रत्येक वाहन केवल यातायात व्यवस्था का हिस्सा नहीं होता, बल्कि उसकी पहचान और वैध दस्तावेज कानून-व्यवस्था की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यदि कोई निजी वाहन सरकारी वाहन होने का भ्रम पैदा करे, उसकी पहचान काली फिल्म से छिपी हो अथवा उस पर नंबर प्लेट ही न लगी हो, तो किसी दुर्घटना, अपराध या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में वाहन की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन सकता है।
‘भारत सरकार’ लिखी निजी गाड़ियों पर उठे सवाल
नोएडा की सड़कों पर कई बार ऐसे निजी वाहन नजर आते हैं, जिन पर ‘भारत सरकार’, ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ अथवा सरकारी विभागों के नाम लिखे दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि क्या इन वाहनों को वास्तव में सरकारी उपयोग की अनुमति प्राप्त है या फिर महज सरकारी पहचान का प्रभाव पैदा करने के लिए इन शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है?
आरडब्ल्यूए का आरोप है कि कुछ मामलों में सरकारी नाम का इस्तेमाल पुलिस की सामान्य जांच से बचने, टोल अथवा अन्य प्रक्रियाओं में अनुचित लाभ लेने या वाहन को सामान्य निजी वाहन से अलग दिखाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि किसी वाहन पर सरकारी पहचान लिखे होने मात्र से उसके मालिक की मंशा को अपराधी मान लेना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि सरकारी पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल किया जा रहा है तो इसकी जांच और कार्रवाई जरूरी है।
पहचान छिपाने का जरिया तो नहीं बन रही काली फिल्म?
वाहनों के शीशों पर काली फिल्म का मुद्दा भी नोएडा में लगातार चर्चा का विषय रहा है। सुरक्षा के लिहाज से वाहन के अंदर बैठे लोगों की स्पष्ट दृश्यता महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में प्रतिबंधित स्तर की काली फिल्म वाहन के भीतर बैठे व्यक्ति या गतिविधि को बाहर से देखने में बाधा पैदा कर सकती है।
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 का कहना है कि काली फिल्म लगे वाहनों की जांच में लापरवाही सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। यदि किसी वाहन का इस्तेमाल अपराध के बाद भागने के लिए किया जाए और उसकी पहचान पहले से ही फिल्म और अन्य तरीकों से मुश्किल बना दी गई हो, तो जांच एजेंसियों के सामने अतिरिक्त चुनौती खड़ी हो सकती है।
हालांकि यह भी जरूरी है कि कार्रवाई कानून और निर्धारित मानकों के अनुसार ही हो तथा वैध परिस्थितियों में लगे सुरक्षा उपकरणों या अधिकृत प्रावधानों को अनावश्यक रूप से अपराध की श्रेणी में न रखा जाए।
बिना नंबर प्लेट ट्रैक्टरों ने बढ़ाई चिंता
सबसे गंभीर सवाल उन ट्रैक्टरों को लेकर उठाया गया है, जो कथित तौर पर बिना आगे-पीछे नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। नोएडा और आसपास के इलाकों में निर्माण कार्य, माल ढुलाई और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में ट्रैक्टरों का इस्तेमाल बढ़ा है। भारी वाहन होने के कारण इनसे जुड़ी किसी दुर्घटना के परिणाम भी गंभीर हो सकते हैं।
यदि किसी ट्रैक्टर पर नंबर प्लेट ही मौजूद नहीं है तो दुर्घटना के बाद वाहन की पहचान करना मुश्किल हो सकता है। यही नहीं, चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो जाए तो जांच की दिशा तय करने में भी पुलिस को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
आरडब्ल्यूए का कहना है कि व्यावसायिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले ऐसे वाहनों की नियमित जांच जरूरी है। वाहन के पंजीकरण, नंबर प्लेट, फिटनेस, परमिट, चालक के लाइसेंस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच करके ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि सड़क पर चलने वाला भारी वाहन निर्धारित नियमों का पालन कर रहा है।
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी तय करना मुश्किल
सड़क सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार वाहन की पहचान है। किसी दुर्घटना के बाद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और वाहन नंबर पुलिस जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन यदि वाहन पर नंबर प्लेट ही नहीं हो तो जांच का एक अहम आधार कमजोर हो जाता है।
नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। लगातार बढ़ता यातायात, निर्माण गतिविधियां और भारी वाहनों की आवाजाही पहले ही सड़क सुरक्षा के लिए चुनौती हैं। ऐसे में बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर और अन्य वाहन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
आरडब्ल्यूए का तर्क है कि नियमों का पालन केवल चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा के लिए होना चाहिए। यदि कोई वाहन सड़क पर चलने योग्य है तो उसकी पहचान स्पष्ट होनी चाहिए और उसके संचालन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज वैध होने चाहिए।
पुलिस जांच से बचने की कोशिश पर सख्ती जरूरी
सरकारी नाम और चिन्हों के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर भी आरडब्ल्यूए ने गंभीर सवाल उठाए हैं। किसी निजी व्यक्ति द्वारा अपने वाहन को सरकारी वाहन जैसा दिखाने की कोशिश यदि नियमों के विरुद्ध है तो संबंधित विभागों को इसकी जांच करनी चाहिए।
ऐसे वाहनों को देखकर आम नागरिकों के मन में यह भ्रम पैदा हो सकता है कि वाहन किसी सरकारी अधिकारी या विभाग से संबंधित है। इससे सड़क पर कानून के समान अनुपालन की भावना भी प्रभावित हो सकती है।
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 का कहना है कि पुलिस और यातायात विभाग को ऐसे मामलों में केवल चालान की औपचारिकता तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां सरकारी पहचान का दुरुपयोग सामने आए, वहां वाहन के दस्तावेज और इस्तेमाल की वैधता की जांच होनी चाहिए तथा कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
आरडब्ल्यूए ने की संयुक्त अभियान की मांग
दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा पुलिस और यातायात विभाग से मांग की है कि शहर में विशेष अभियान चलाकर ऐसे वाहनों की जांच की जाए। अभियान के दौरान सरकारी नाम या पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल करने वाले निजी वाहनों, प्रतिबंधित काली फिल्म लगे वाहनों तथा बिना नंबर प्लेट चल रहे वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
आरडब्ल्यूए ने विशेष रूप से बिना नंबर प्लेट व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल हो रहे ट्रैक्टरों पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे वाहनों को केवल सड़क पर चलते हुए नजरअंदाज करने के बजाय उनके दस्तावेजों और संचालन की वैधता की जांच की जानी चाहिए।
‘नियम सबके लिए बराबर’ का संदेश जरूरी
नोएडा की पहचान देश के तेजी से विकसित होते शहरों में होती है। यहां रोजाना लाखों लोग नौकरी, व्यापार, शिक्षा और अन्य कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। ऐसे शहर में यातायात नियमों का पालन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर वाहन मालिक की जिम्मेदारी है।
सरकारी नाम लिखे वाहन हों, काली फिल्म लगे वाहन हों या बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर—इन सभी मामलों में कानून के अनुसार समान कार्रवाई का संदेश जाना जरूरी है। इससे न केवल यातायात अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि आम नागरिकों में भी सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ेगा।
आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 ने स्पष्ट किया है कि उसकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि नियमों के समान और प्रभावी अनुपालन को लेकर है। संगठन चाहता है कि पुलिस और यातायात विभाग ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करें और जहां उल्लंघन मिले, वहां बिना किसी दबाव के कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
अब निगाह पुलिस और यातायात विभाग पर
नोएडा में सरकारी पहचान के कथित दुरुपयोग, काली फिल्म और बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टरों को लेकर उठी आवाज के बाद अब निगाह पुलिस और यातायात विभाग की कार्रवाई पर है। सवाल यह नहीं है कि सड़क पर कितने वाहनों का चालान होता है, बल्कि सवाल यह है कि क्या ऐसे वाहनों की पहचान, दस्तावेज और वैधता की गंभीरता से जांच हो रही है?
शहर की सुरक्षा व्यवस्था में छोटी दिखने वाली लापरवाहियां कई बार बड़ी समस्या का कारण बन सकती हैं। इसलिए समय रहते ऐसे वाहनों पर प्रभावी निगरानी और नियमों का निष्पक्ष पालन जरूरी है। आरडब्ल्यूए सेक्टर-105 की मांग के बाद यदि व्यापक जांच अभियान शुरू होता है, तो इससे न केवल संदिग्ध वाहनों पर लगाम लग सकती है, बल्कि नोएडा की सड़कों पर कानून के प्रति जवाबदेही का संदेश भी मजबूत होगा।
दिव्य कृष्णात्रेय, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए सेक्टर-105, नोएडा ने पुलिस एवं यातायात विभाग से तत्काल सख्त और कानूनसम्मत कार्रवाई की अपील की है।














