तेहरान: पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचेंगे। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। माना जा रहा है कि मुनीर की ईरानी नेतृत्व के साथ मुलाकात में क्षेत्रीय सुरक्षा, अमेरिका-ईरान तनाव, द्विपक्षीय रिश्तों और मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा हो सकती है।
इस दौरे को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान हाल के घटनाक्रमों में ईरान और अमेरिका के बीच संवाद कायम कराने की कोशिश करता रहा है।
मक्का डिफेंस पैक्ट पर भी हो सकती है चर्चा
मुनीर के दौरे से जुड़ी रिपोर्टों में सबसे ज्यादा चर्चा ‘मक्का डिफेंस पैक्ट’ को लेकर है। दावा है कि इस क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में ईरान को भी शामिल होने का प्रस्ताव मिल सकता है। हालांकि, ईरान, पाकिस्तान, सऊदी अरब या तुर्की की ओर से इस निमंत्रण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि तेहरान इस व्यवस्था में शामिल होता है, तो पश्चिम एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
क्या है मक्का पैक्ट?
7 अगस्त को सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के तहत तीनों देश सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। समझौते की प्रमुख शर्तों में से एक यह है कि किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इस व्यवस्था की तुलना नाटो के अनुच्छेद 5 से की है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह समझौता किसी खास देश के खिलाफ नहीं है।
ईरान को क्यों अहम माना जा रहा है?
ईरान क्षेत्र की बड़ी सैन्य और राजनीतिक ताकत है। ऐसे में अगर तेहरान इस सुरक्षा व्यवस्था के करीब आता है, तो सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
लेकिन ईरान की भागीदारी आसान नहीं होगी। अमेरिका के साथ उसका बढ़ता तनाव, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अलग-अलग देशों के साथ उसके संबंध इस फैसले को बेहद संवेदनशील बनाते हैं।
अमेरिका की नई पाबंदियों के बीच दौरा
मुनीर का ईरान दौरा ऐसे वक्त हो रहा है, जब अमेरिका तेहरान पर और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहा है। ईरान भी अमेरिकी दबाव का जवाब देने की बात कह चुका है।
ऐसे में पाकिस्तान के लिए चुनौती यह होगी कि वह एक तरफ ईरान के साथ अपने रिश्ते बनाए रखे और दूसरी तरफ अमेरिका तथा खाड़ी देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भी संतुलित करे।
होर्मुज पर भी नजर
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ रहा है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है और वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
इसलिए क्षेत्र में किसी भी नए सैन्य तनाव का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर भी पड़ सकता है।
मुनीर का तेहरान दौरा इसलिए केवल द्विपक्षीय बातचीत नहीं, बल्कि ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।














